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Bhiwani News: 170 साल पुराना गौरी शंकर मंदिर बना श्रद्धा, आस्था और मनोकामनाओं का केंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:07 AM IST
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The 170-year-old Gauri Shankar temple has become a center of devotion, faith, and wishes.
बवानीखेड़ा का 170 साल पुराना गौरी शंकर मंदिर। संवाद
नरेंद्र भाकर
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भिवानी । कस्बे के ऐतिहासिक बालेश्वर धाम पर स्थित 170 साल पुराना गौरी शंकर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि श्रावण मास के दौरान जो भी श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में इस मंदिर में स्थित प्राचीन शिवलिंग पर सच्चे मन से गंगाजल चढ़ाता है और नियमपूर्वक व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान शंकर अवश्य पूरी करते हैं।
जानकारी के अनुसार यह मंदिर करीब 1855 में पंडित नाथूराम के सुपुत्र पंडित गौरी शंकर और पंडित रामेश्वर दत्त पुजारी द्वारा स्थापित किया गया था। मंदिर की नींव इससे भी करीब दो शताब्दी पूर्व, लगभग 350 साल पहले पंडित हरिराम कौशिक लाटा ने रखी थी। इसे पूर्ण रूप से तैयार होने में करीब 7 से 8 वर्ष लगे। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि कस्बे व आसपास के क्षेत्रों के लिए सांस्कृतिक विरासत का भी केंद्र है।
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कस्बे के वरिष्ठ नागरिक मास्टर रामनरेश कौशिक ने बताया कि मंदिर उनके पूर्वजों ने क्षेत्र में सुख-शांति और अमन-चैन की कामना से बनवाया था। उनके पूर्वज बाबा गौरी दत्त ने मंदिर में ठाकुर की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई थी। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और समय-समय पर हवन व भंडारों का आयोजन होता है, जिनमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में एक 100 साल पुराना पीपल का पेड़ भी स्थित है जो भक्तों की आस्था का प्रतीक माना जाता है। वहीं एक ओर भगवान नारायण का मंदिर और राम दरबार स्थित हैं तो दूसरी ओर प्राचीन शिवलिंग के साथ पूरा शिव परिवार विराजमान है।
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पौराणिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु 41 दिनों तक सूर्योदय से पूर्व शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है उसकी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। खासकर श्रावण मास में यह साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लाकर कांवड़ रूप में मंदिर में अर्पित करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की मन्नत मांगते हैं।

इस संबंध में मंदिर के पुजारी पंडित सतीश कौशिक ने बताया कि यह गौरी शंकर मंदिर भगवान शिव के चेतन मंदिरों में से एक है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में जल चढ़ाने से विशेष पुण्य और फल की प्राप्ति होती है। इस मंदिर की एक विशेष परंपरा यह भी है कि कस्बे में जब कोई विवाह आदि आयोजन होता है तो पहले यहीं पूजा अर्चना की जाती है और फिर दूल्हा बारात लेकर निकलता है। संवाद
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