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Bhiwani News: साइकिल मेले में जीएसटी बिल काट पैसे मांगने पर शिक्षकों और अभिभावकों ने किया हंगामा
Thu, 21 Sep 2023 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 21 Sep 2023 10:36 PM IST
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भिवानी। सेठ किरोड़ीमल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वीरवार को शिक्षा विभाग की ओर से जिलास्तरीय साइकिल मेला लगाया गया। मेले में भिवानी जिले के सभी खंडों के विभिन्न स्कूलों से शिक्षक और छठी कक्षा के बच्चों को लेकर अभिभावक भी पहुंचे। मेले में साइकिल देने के नाम पर जीएसटी बिल का भुगतान कराकर साइकिल के पैसे मांगे जाने को लेकर विवाद हो गया। कई शिक्षकों ने इस पर एतराज उठा दिया, जिसके बाद बच्चों के साथ आए अभिभावक भी बिफर पड़े। मामला बढ़ता देख मामले की सूचना जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संतोष नागर को दी गई। कई अभिभावकों की तो मेले में काउंटर पर बैठे कर्मचारियों से भी तीखी नोकझोंक हुई और जीएसटी बिल वापस कर पैसे लौटाने की मांग पर अभिभावक अड़ गए।
सेठ किरोड़ीमल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में कक्षा छठी में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने के लिए मेला लगाया गया था। सिवानी खंड के शिक्षक रमेश ने बताया कि पिछले साल भी बच्चों को साइकिल देने के नाम पर पांच सौ रुपये प्रति बच्चा जीएसटी बिल काटा गया था। इसके बाद साइकिल के 2800 रुपये कीमत विभाग द्वारा भुगतान की जानी थी। अभिभावकों को आज तक ये पैसे वापस नहीं मिले। इस बार भी 300 रुपये का जीएसटी बिल काट अभिभावकों को थमा दिया है। जबकि साइकिल के अलग से 2500 रुपये कोस्ट मांगी जा रही है। मेहनत मजदूरी करने वाले अभिभावक ये राशि कहां से लेकर आए।
वहीं, दूरदराज से छोटे बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों का आरोप था कि उन्हें विभाग द्वारा साइकिल मुफ्त मिलने की बात कही थी, मगर यहां आते ही साइकिल के चार हजार रुपये जमा कराने के लिए बोला जा रहा है, जबकि शिक्षा विभाग बाद में सिर्फ 2800 रुपये ही वापस लौटाएगा। वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ भी अभिभावकों व बच्चों के साथ आए टीचरों की खूब तू तड़ाक तक हुई। वहीं, कुछ अभिभावकों ने तो इस हंगामे की वीडियो बनाकर भी साइकिलों के नाम पर गरीबों के साथ भत्ता मजाक किए जाने की सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।
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यह है प्रावधान
शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा छठी में पढ़ाई करने वाले और घर से दो किलोमीटर दूर से आने वाले बच्चों के लिए साइकिल का प्रावधान है। इसके लिए शिक्षा विभाग वेंडर्स को मौके पर बुलाते हैं, जिसमें बच्चा साइकिल पसंद करता है। इस साइकिल का जीएसटी बिल अनिवार्य है। बिल के आधार पर ही साइकिल की राशि बच्चे के खाते में जाएगी। अभिभावकों को अपनी पसंद की साइकिल लेने पर जीएसटी सहित राशि का एकमुश्त भुगतान करना है। बाद में साइकिल की 2800 और 3000 रुपये के हिसाब से राशि लौटाई जाएगी, ऊपर लगने वाली कास्ट का वहन खुद बच्चे के अभिभावक को उठाना पड़ेगा।
छठी में पढ़ाई कर रही पोती को नहीं मिली साइकिल, अब आठवीं में हुई तो फिर यहां आई
जैन चौक क्षेत्र निवासी बुजुर्ग महिला सावित्री ने बताया कि उसकी पोती जब छठी में तब भी वह साइकिल के लिए आई थी, अब दूसरी पोती छठी में पढ़ रही है। उसके लिए दोबारा यहां आई तो साइकिल के नाम पर पैसे मांगे। घर से स्कूल काफी दूर है, इसलिए साइकिल से आना जाना करेगी तो लड़की को परेशानी नहीं होगी। मगर, यहां तो हालात ही दूसरे हैं।
मेले में साइकिल वेंडर्स को बुलाया गया है। भिवानी जिले में 341 छठी कक्षा के बच्चों की साइकिल के लिए पहचान की गई है। जिन्हें साइकिल दी जा रही है। बच्चों के खाते में साइकिल के पैसे भेजे जाएंगे। जबकि साइकिल खरीद पर उन्हें जीएसटी का बिल लेना अनिवार्य होगा। कुछ अभिभावक बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं, जबकि मेले में नियमानुसार बच्चों को साइकिलें दी जा रही हैं।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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सेठ किरोड़ीमल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में कक्षा छठी में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने के लिए मेला लगाया गया था। सिवानी खंड के शिक्षक रमेश ने बताया कि पिछले साल भी बच्चों को साइकिल देने के नाम पर पांच सौ रुपये प्रति बच्चा जीएसटी बिल काटा गया था। इसके बाद साइकिल के 2800 रुपये कीमत विभाग द्वारा भुगतान की जानी थी। अभिभावकों को आज तक ये पैसे वापस नहीं मिले। इस बार भी 300 रुपये का जीएसटी बिल काट अभिभावकों को थमा दिया है। जबकि साइकिल के अलग से 2500 रुपये कोस्ट मांगी जा रही है। मेहनत मजदूरी करने वाले अभिभावक ये राशि कहां से लेकर आए।
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वहीं, दूरदराज से छोटे बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों का आरोप था कि उन्हें विभाग द्वारा साइकिल मुफ्त मिलने की बात कही थी, मगर यहां आते ही साइकिल के चार हजार रुपये जमा कराने के लिए बोला जा रहा है, जबकि शिक्षा विभाग बाद में सिर्फ 2800 रुपये ही वापस लौटाएगा। वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ भी अभिभावकों व बच्चों के साथ आए टीचरों की खूब तू तड़ाक तक हुई। वहीं, कुछ अभिभावकों ने तो इस हंगामे की वीडियो बनाकर भी साइकिलों के नाम पर गरीबों के साथ भत्ता मजाक किए जाने की सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।
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यह है प्रावधान
शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा छठी में पढ़ाई करने वाले और घर से दो किलोमीटर दूर से आने वाले बच्चों के लिए साइकिल का प्रावधान है। इसके लिए शिक्षा विभाग वेंडर्स को मौके पर बुलाते हैं, जिसमें बच्चा साइकिल पसंद करता है। इस साइकिल का जीएसटी बिल अनिवार्य है। बिल के आधार पर ही साइकिल की राशि बच्चे के खाते में जाएगी। अभिभावकों को अपनी पसंद की साइकिल लेने पर जीएसटी सहित राशि का एकमुश्त भुगतान करना है। बाद में साइकिल की 2800 और 3000 रुपये के हिसाब से राशि लौटाई जाएगी, ऊपर लगने वाली कास्ट का वहन खुद बच्चे के अभिभावक को उठाना पड़ेगा।
छठी में पढ़ाई कर रही पोती को नहीं मिली साइकिल, अब आठवीं में हुई तो फिर यहां आई
जैन चौक क्षेत्र निवासी बुजुर्ग महिला सावित्री ने बताया कि उसकी पोती जब छठी में तब भी वह साइकिल के लिए आई थी, अब दूसरी पोती छठी में पढ़ रही है। उसके लिए दोबारा यहां आई तो साइकिल के नाम पर पैसे मांगे। घर से स्कूल काफी दूर है, इसलिए साइकिल से आना जाना करेगी तो लड़की को परेशानी नहीं होगी। मगर, यहां तो हालात ही दूसरे हैं।
मेले में साइकिल वेंडर्स को बुलाया गया है। भिवानी जिले में 341 छठी कक्षा के बच्चों की साइकिल के लिए पहचान की गई है। जिन्हें साइकिल दी जा रही है। बच्चों के खाते में साइकिल के पैसे भेजे जाएंगे। जबकि साइकिल खरीद पर उन्हें जीएसटी का बिल लेना अनिवार्य होगा। कुछ अभिभावक बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं, जबकि मेले में नियमानुसार बच्चों को साइकिलें दी जा रही हैं।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।