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हड़ताल : नहीं चलीं बसें, यात्री होते रहे परेशान, बैंकों में बिना काम कराए लौटे उपभोक्ता
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राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर शहर में प्रदर्शन करते विभिन्न जनसंगठनों के लोग। संवाद
- फोटो : Bhiwani
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भिवानी। राष्ट्रव्यापी हड़ताल का सोमवार को जिलेभर में व्यापक असर देखने को मिला। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यात्री बसों का इंतजार करते रहे तो अन्य विभागों में भी कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण लोग परेशान रहे। भिवानी डिपो से 90 में से महज 26 बसें ही चली, जबकि तोशाम सब डिपो में 37 में से 33 बसों के पहिये थमे रहे। हड़ताल के दौरान विभिन्न विभागों कर्मचारी दिनभर नेहरू पार्क और सरकारी बैंकों के बाहर धरना देकर रोष जताते रहे।
हड़ताल के कारण सरकारी बैंकों का 80 फीसदी कारोबार ठप रहा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में थोड़ा काम हुआ, मगर बाकी बैंकों में कामकाज ठप रहा। कई सरकारी बैंकों पर ताले लटके रहे। वहीं काम के लिए आए उपभोक्ता दिनभर परेशान रहे और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। बैंक कर्मचारियों के साथ इंश्योरेंस क्षेत्र के कर्मचारी धरने पर बैठे। हालांकि निजी बैंकों पर हड़ताल का कोई असर नहीं था, वे सुचारु चलते रहे।
छह हजार यात्री रहे परेशान
राष्ट्रव्यापी हड़ताल बहुत कुछ रोडवेज के ऊपर निर्भर थी। हड़ताल का व्यापक असर दिखा। भिवानी डिपो में 90 में से 26 बसें ही चलीं तो तोशाम सब डिपो पर 37 में से 33 बसों के चक्का जाम रहा। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण छह हजार यात्री परेशान रहे। रोडवेज को भी सात लाख से अधिक का घाटा हुआ। परिवहन व्यवस्था पूरी तरह निजी बसों पर निर्भर नजर आई। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ उमड़ी।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। अनुबंधित कर्मचारियों में 90 फीसदी हड़ताल पर रहे। स्वास्थ्य विभाग में करीब 600 अनुबंधित कर्मचारी हैं। स्वास्थ्य विभाग के 80 फीसदी मिनिस्ट्रीयल स्टाफ भी हड़ताल पर रहा। इस वजह से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं। ओपीडी में पर्ची (ट्रीटमेंट स्लिप) बनाने वाला कोई नहीं था तो ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर उमड़ी भीड़ को काबू करने वाला भी कोई नजर नहीं आया। हालांकि बाद में फार्मासिस्ट को ट्रीटमेंट स्लिप बनाने की ड्यूटी पर लगाया गया।
सफाई कर्मचारियों ने की हड़ताल, शहर में लगे कचरे के ढेर
राष्ट्रव्यापी हड़ताल में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी शामिल हुए। 143 नियमित और 160 कच्चे कर्मचारियों ने हड़ताल रखी। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी नजर आई। रविवार को अवकाश के कारण सफाई नहीं हुई थी तो सोमवार को हड़ताल के कारण सफाई ठप रही। ऐसे में शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे थे।
1890 में से 411 बिजली कर्मचारियों ने की हड़ताल
भिवानी बिजली निगम सर्कल में 1890 में से 411 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण सेवाओं पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। 272 अनुबंधित और 139 नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
यात्रियों की परेशानी, उनकी जुबानी
मुझे रोहतक जाना था और किसी तरह प्राइवेट साधन से भिवानी तो पहुंची। यहां से आगे के लिए बसें ही नहीं चल रहीं। जाना जरूरी था, अब तो घर वापस जाना भी मुश्किल भरा हो गया है।
-हजरा देवी, निवासी जुई गांव।
मैं जुई गांव से आई हूं और मुझे करनाल जाना था। मगर बसें नहीं चलने के कारण बीच रास्ते फंस गई हूं। अब वापस जाने के लिए भी साधन नहीं है। सरकार को चाहिए कि हड़ताल होने पर भी वैकल्पिक व्यवस्था करती।
-रहीशा, निवासी, जुई गांव।
मेरी बुआ की तबीयत बहुत खराब है और मुझे रोहतक जाना था। मगर यहां बसें ही नहीं चल रहीं, जिस कारण समस्या आ रही है। सरकार को हड़ताल के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
-मनीषा, निवासी, ढाणा नरसान।
मैं अपने भाई के घर यहां आई थी और मुझे वापस झज्जर जाना था। बसें नहीं चलने के कारण परेशानी हो रही है।
-भतेरी, निवासी, झज्जर।
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हड़ताल के कारण सरकारी बैंकों का 80 फीसदी कारोबार ठप रहा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में थोड़ा काम हुआ, मगर बाकी बैंकों में कामकाज ठप रहा। कई सरकारी बैंकों पर ताले लटके रहे। वहीं काम के लिए आए उपभोक्ता दिनभर परेशान रहे और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। बैंक कर्मचारियों के साथ इंश्योरेंस क्षेत्र के कर्मचारी धरने पर बैठे। हालांकि निजी बैंकों पर हड़ताल का कोई असर नहीं था, वे सुचारु चलते रहे।
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छह हजार यात्री रहे परेशान
राष्ट्रव्यापी हड़ताल बहुत कुछ रोडवेज के ऊपर निर्भर थी। हड़ताल का व्यापक असर दिखा। भिवानी डिपो में 90 में से 26 बसें ही चलीं तो तोशाम सब डिपो पर 37 में से 33 बसों के चक्का जाम रहा। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण छह हजार यात्री परेशान रहे। रोडवेज को भी सात लाख से अधिक का घाटा हुआ। परिवहन व्यवस्था पूरी तरह निजी बसों पर निर्भर नजर आई। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ उमड़ी।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। अनुबंधित कर्मचारियों में 90 फीसदी हड़ताल पर रहे। स्वास्थ्य विभाग में करीब 600 अनुबंधित कर्मचारी हैं। स्वास्थ्य विभाग के 80 फीसदी मिनिस्ट्रीयल स्टाफ भी हड़ताल पर रहा। इस वजह से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं। ओपीडी में पर्ची (ट्रीटमेंट स्लिप) बनाने वाला कोई नहीं था तो ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर उमड़ी भीड़ को काबू करने वाला भी कोई नजर नहीं आया। हालांकि बाद में फार्मासिस्ट को ट्रीटमेंट स्लिप बनाने की ड्यूटी पर लगाया गया।
सफाई कर्मचारियों ने की हड़ताल, शहर में लगे कचरे के ढेर
राष्ट्रव्यापी हड़ताल में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी शामिल हुए। 143 नियमित और 160 कच्चे कर्मचारियों ने हड़ताल रखी। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी नजर आई। रविवार को अवकाश के कारण सफाई नहीं हुई थी तो सोमवार को हड़ताल के कारण सफाई ठप रही। ऐसे में शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे थे।
1890 में से 411 बिजली कर्मचारियों ने की हड़ताल
भिवानी बिजली निगम सर्कल में 1890 में से 411 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण सेवाओं पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। 272 अनुबंधित और 139 नियमित कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
यात्रियों की परेशानी, उनकी जुबानी
मुझे रोहतक जाना था और किसी तरह प्राइवेट साधन से भिवानी तो पहुंची। यहां से आगे के लिए बसें ही नहीं चल रहीं। जाना जरूरी था, अब तो घर वापस जाना भी मुश्किल भरा हो गया है।
-हजरा देवी, निवासी जुई गांव।
मैं जुई गांव से आई हूं और मुझे करनाल जाना था। मगर बसें नहीं चलने के कारण बीच रास्ते फंस गई हूं। अब वापस जाने के लिए भी साधन नहीं है। सरकार को चाहिए कि हड़ताल होने पर भी वैकल्पिक व्यवस्था करती।
-रहीशा, निवासी, जुई गांव।
मेरी बुआ की तबीयत बहुत खराब है और मुझे रोहतक जाना था। मगर यहां बसें ही नहीं चल रहीं, जिस कारण समस्या आ रही है। सरकार को हड़ताल के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
-मनीषा, निवासी, ढाणा नरसान।
मैं अपने भाई के घर यहां आई थी और मुझे वापस झज्जर जाना था। बसें नहीं चलने के कारण परेशानी हो रही है।
-भतेरी, निवासी, झज्जर।

रोडवेज की हड़ताल के चलते प्राइवेट बसों में कुछ इस तरह नजर आई भीड़। संवाद- फोटो : Bhiwani