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Bhiwani News: सांगी ने किया वीर विक्रमा खांडेराव परी सांग का मंचन
Sun, 11 Feb 2024 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 11 Feb 2024 11:46 PM IST
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भिवानी। गांव बापोड़ा की पंच पीर गोशाला में हरियाणा कला परिषद कुरुक्षेत्र के सहयोग से सांग उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव के प्रथम दिन सांगी रहीश यादव ने वीर विक्रमा खांडेराव परी सांग का मंचन किया।
इसमें बताया गया कि राजा विक्रमा एक न्यायकारी राजा थे और सदैव दूसरों के हित के कार्य में लगे रहते थे। एक बार कुछ हंस उनकी शरण में आते हैं। जब वो हंस अपना समय व्यतीत कर वापस अपने मानसरोवर ताल जाते हैं तो राजा विक्रमा को भगवान के तुल्य बताते जा रहे होते हैं। यह बात इंद्र भगवान सुन लेते हैं और क्रोधित हो उनकी एक हंसनी अपने पास रख लेते हैं और कह देते हैं जाओ अगर विक्रमा इतना ही बलवान है तो कह देना वो मुझे से तुम्हारी ये हंसनी छूटा ले जाएगा। वो हंस वापस राजा विक्रमा के पास आकर सब हाल बताते हैं और विनती करते हैं। आप इंद्र भगवान से हमारी हंसनी को छुटवा कर लाओ। राजा विक्रम उन हंसों को अपने राज्य में ठहरा कर उनकी हंसनी को छुटवाने चल पड़ते हैं।
अनेक उतार-चढ़ाव के बाद राजा विक्रमा इंद्र भगवान तक पहुंच जाते हैं और अपना परिचय देते हैं। भगवान मैं आपका ही पोता हूं, आपके पुत्र गंधर्व सेन का लड़का एक तो आप उन हंसों की हंसनी को मुक्त करें। एक खांडे राव परी आपकी सभा में नाच गाना करती हैं उसको भी मुक्त करें वो आपके पोते की बहु है। इस प्रकार राजा विक्रमा उन दोनों जो इंद्र भगवान की कैद से छुटवा देते हैं। इस कड़ी मे आज सांगी वेदू अत्री अपनी प्रस्तुति देंगे।
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इसमें बताया गया कि राजा विक्रमा एक न्यायकारी राजा थे और सदैव दूसरों के हित के कार्य में लगे रहते थे। एक बार कुछ हंस उनकी शरण में आते हैं। जब वो हंस अपना समय व्यतीत कर वापस अपने मानसरोवर ताल जाते हैं तो राजा विक्रमा को भगवान के तुल्य बताते जा रहे होते हैं। यह बात इंद्र भगवान सुन लेते हैं और क्रोधित हो उनकी एक हंसनी अपने पास रख लेते हैं और कह देते हैं जाओ अगर विक्रमा इतना ही बलवान है तो कह देना वो मुझे से तुम्हारी ये हंसनी छूटा ले जाएगा। वो हंस वापस राजा विक्रमा के पास आकर सब हाल बताते हैं और विनती करते हैं। आप इंद्र भगवान से हमारी हंसनी को छुटवा कर लाओ। राजा विक्रम उन हंसों को अपने राज्य में ठहरा कर उनकी हंसनी को छुटवाने चल पड़ते हैं।
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अनेक उतार-चढ़ाव के बाद राजा विक्रमा इंद्र भगवान तक पहुंच जाते हैं और अपना परिचय देते हैं। भगवान मैं आपका ही पोता हूं, आपके पुत्र गंधर्व सेन का लड़का एक तो आप उन हंसों की हंसनी को मुक्त करें। एक खांडे राव परी आपकी सभा में नाच गाना करती हैं उसको भी मुक्त करें वो आपके पोते की बहु है। इस प्रकार राजा विक्रमा उन दोनों जो इंद्र भगवान की कैद से छुटवा देते हैं। इस कड़ी मे आज सांगी वेदू अत्री अपनी प्रस्तुति देंगे।
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सत्यवीर उर्फ बंटू का फाइल फोटो।

सत्यवीर उर्फ बंटू का फाइल फोटो।