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मंडी में पहुंच रहा सड़ा हुआ बाजरा
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अनाजमंडी में लगी सड़े हुए बाजरे की ढेरी। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। सरकारी खरीद अभी शुरू भी नहीं हुई है। वहीं, मंडी में सड़ा हुआ बाजरा पहुंच रहा है। मंडी में बाजरे के साथ किसानों की आवक शुरू हो चुकी है। मंडी गेट पर टोकन के बाद ही फसल लेकर पहुंच रहे किसानों को एंट्री मिल रही है।
अब तक बाजरा, कपास और मूंग की प्राइवेट खरीद कराई जा रही है। भावांतर योजना का लाभ लेने के चक्कर में पुराना व सड़ा हुआ बाजरा भी मंडी में धड़ल्ले से बिक रहा है। मंडी में पहुंची खराब ढेरियों की जांच के लिए कोई अधिकारी व कर्मचारी भी नहीं हैं। सिर्फ मंडी के लाइसेंसी आढ़ती ही खरीद करा रहे हैं। हालांकि मंडी में पहुंच रहे बाजरे के दाम 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं, जबकि किसानों द्वारा प्राइवेट बाजरा बिक्री पर 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर योजना के तहत किसानों को दिए जाने की योजना भी है। इसी के चक्कर में अब खराब बाजरा भी नए बाजरे के साथ मंडी में बिक रहा है। हालांकि पिछले सीजन खराब बाजरा व दूसरे राज्यों के बाजरा के यहां बिक्री की आशंका के चलते बाजरा की रिकॉर्ड तोड़ खरीद हो गई थी। जिसके बाद इस बार सरकार ने शायद अब तक बाजरा की सरकारी खरीद को लेकर कोई पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि अधिकारियों को भी अभी तक बाजरा व मूंग खरीद के शेड्यूल की कोई जानकारी तक नहीं है। वहीं आढ़तियों का कहना है कि जो भी बाजरा मंडी पहुंच रहा है, सब प्राइवेट बिक रहा है।
टोकन लेकर कर रहे एंट्री
जिला मुख्यालय की मंडी गेट पर ही कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों ने किसानों के लिए गेट पास की व्यवस्था कराई है। किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद मंडी में फसल लाने पर गेट पास के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। इसके लिए अलग से कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई है। वहीं गेट पर ही किसान सुविधा केंद्र भी स्थापित किया गया है। रोजाना ही करीब 25 से 30 ट्रैक्टरों के साथ किसान मंडी फसल लेकर पहुंच रहे हैं।
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बाजरा, मूंग, कपास खरीदा जा रहा है
मंडी में फिलहाल प्राइवेट एजेंसियों द्वारा बाजरा, मूंग व कपास की खरीद की जा रही है। सरकारी खरीद के शेड्यूल के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं है। किसानों को भावांतर योजना के बारे में भी कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं।
-प्रदीप कुमार, अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड भिवानी।
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अब तक बाजरा, कपास और मूंग की प्राइवेट खरीद कराई जा रही है। भावांतर योजना का लाभ लेने के चक्कर में पुराना व सड़ा हुआ बाजरा भी मंडी में धड़ल्ले से बिक रहा है। मंडी में पहुंची खराब ढेरियों की जांच के लिए कोई अधिकारी व कर्मचारी भी नहीं हैं। सिर्फ मंडी के लाइसेंसी आढ़ती ही खरीद करा रहे हैं। हालांकि मंडी में पहुंच रहे बाजरे के दाम 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं, जबकि किसानों द्वारा प्राइवेट बाजरा बिक्री पर 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर योजना के तहत किसानों को दिए जाने की योजना भी है। इसी के चक्कर में अब खराब बाजरा भी नए बाजरे के साथ मंडी में बिक रहा है। हालांकि पिछले सीजन खराब बाजरा व दूसरे राज्यों के बाजरा के यहां बिक्री की आशंका के चलते बाजरा की रिकॉर्ड तोड़ खरीद हो गई थी। जिसके बाद इस बार सरकार ने शायद अब तक बाजरा की सरकारी खरीद को लेकर कोई पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि अधिकारियों को भी अभी तक बाजरा व मूंग खरीद के शेड्यूल की कोई जानकारी तक नहीं है। वहीं आढ़तियों का कहना है कि जो भी बाजरा मंडी पहुंच रहा है, सब प्राइवेट बिक रहा है।
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टोकन लेकर कर रहे एंट्री
जिला मुख्यालय की मंडी गेट पर ही कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों ने किसानों के लिए गेट पास की व्यवस्था कराई है। किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद मंडी में फसल लाने पर गेट पास के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। इसके लिए अलग से कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई है। वहीं गेट पर ही किसान सुविधा केंद्र भी स्थापित किया गया है। रोजाना ही करीब 25 से 30 ट्रैक्टरों के साथ किसान मंडी फसल लेकर पहुंच रहे हैं।
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बाजरा, मूंग, कपास खरीदा जा रहा है
मंडी में फिलहाल प्राइवेट एजेंसियों द्वारा बाजरा, मूंग व कपास की खरीद की जा रही है। सरकारी खरीद के शेड्यूल के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं है। किसानों को भावांतर योजना के बारे में भी कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं।
-प्रदीप कुमार, अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड भिवानी।