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जहरीली हुई हवा, 251 पहुंचा एक्यूआई
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भिवानी। पिछले 10 दिन से हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को छुट्टी होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर अन्य दिनों से काफी ज्यादा रहा। रविवार को शाम चार बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 251 दर्ज किया गया। यह आंकड़ा बहुत ही खतरनाक है। लगातार बढ़ रहे एक्यूआई से हवा जहरीली होती जा रही है। इतने प्रदूषण में लगातार सांस लेने से व्यक्ति को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बता दें कि बारिश के मौसम के दौरान हवा बहुत शुद्ध और साफ हो गई थी। लगभग 12 दिन पहले छह अक्तूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 दर्ज किया गया था जो बढ़िया श्रेणी में आता है। मगर उसके बाद हर रोज हवा प्रदूषित होती चली गई और रविवार को हवा का स्तर बहुत खराब हो गया। विशेषज्ञों की मानें तो इसका कारण फैक्टरियों और वाहनों से निकलने वाला धुंआ सबसे ज्यादा है। उसके बाद अगर खेतों में फसल अवशेष जलाए जाते हैं तो वह भी पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
ईंट-भट्ठे और चिमनियां भी फैलाती हैं प्रदूषण
कोरोना काल में ईंट-भट्ठे पर भी रोक लगा दी गई थी, मगर अब ईंट-भट्टे भी फिर से शुरू हो गए हैं। जिले में करीब 1200 से 1400 ईंट-भट्ठे हैं। इनसे हर रोज भारी मात्रा में धुआं निकलता है जो वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। इनमें से कई ईंट-भट्ठे नियमों को ताक पर रखकर भी बनाए गए हैं। उनकी ऊंचाई निर्धारित से कम है और बाकी पैमानों पर भी वे खरे नहीं उतरते हैं।
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सांस के मरीजों के लिए स्थिति गंभीर
सीनियर फिजीशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि एक्यूआई 251 होने का अर्थ है कि वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है। इससे सांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। दमा पीड़ित लोगों को अटैक आने का डर बना रहता है। इसके अलावा आंखों और त्वचा के लिए भी वायु प्रदूषण काफी हानिकारक है।
06 अक्तूबर 62
07 अक्तूबर 77
08 अक्तूबर 138
09 अक्तूबर 122
10 अक्तूबर 103
11 अक्तूबर 106
12 अक्तूबर 104
13 अक्तूबर 144
14 अक्तूबर 164
15 अक्तूबर 157
16 अक्तूबर 205
17 अक्तूबर 251
वर्जन
लोगों को प्रयास करना चाहिए कि प्रदूषण को कम किया जाए। खुले में कूड़ा नहीं जलाना चाहिए और कोई ऐसा कर रहा है तो उसे रोकना भी चाहिए। प्रशासन को ईंट-भट्ठों की जांच करनी चाहिए।
- सुभाष गोयल, भूजल वैज्ञानिक
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बता दें कि बारिश के मौसम के दौरान हवा बहुत शुद्ध और साफ हो गई थी। लगभग 12 दिन पहले छह अक्तूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 दर्ज किया गया था जो बढ़िया श्रेणी में आता है। मगर उसके बाद हर रोज हवा प्रदूषित होती चली गई और रविवार को हवा का स्तर बहुत खराब हो गया। विशेषज्ञों की मानें तो इसका कारण फैक्टरियों और वाहनों से निकलने वाला धुंआ सबसे ज्यादा है। उसके बाद अगर खेतों में फसल अवशेष जलाए जाते हैं तो वह भी पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
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ईंट-भट्ठे और चिमनियां भी फैलाती हैं प्रदूषण
कोरोना काल में ईंट-भट्ठे पर भी रोक लगा दी गई थी, मगर अब ईंट-भट्टे भी फिर से शुरू हो गए हैं। जिले में करीब 1200 से 1400 ईंट-भट्ठे हैं। इनसे हर रोज भारी मात्रा में धुआं निकलता है जो वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। इनमें से कई ईंट-भट्ठे नियमों को ताक पर रखकर भी बनाए गए हैं। उनकी ऊंचाई निर्धारित से कम है और बाकी पैमानों पर भी वे खरे नहीं उतरते हैं।
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सांस के मरीजों के लिए स्थिति गंभीर
सीनियर फिजीशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि एक्यूआई 251 होने का अर्थ है कि वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है। इससे सांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। दमा पीड़ित लोगों को अटैक आने का डर बना रहता है। इसके अलावा आंखों और त्वचा के लिए भी वायु प्रदूषण काफी हानिकारक है।
06 अक्तूबर 62
07 अक्तूबर 77
08 अक्तूबर 138
09 अक्तूबर 122
10 अक्तूबर 103
11 अक्तूबर 106
12 अक्तूबर 104
13 अक्तूबर 144
14 अक्तूबर 164
15 अक्तूबर 157
16 अक्तूबर 205
17 अक्तूबर 251
वर्जन
लोगों को प्रयास करना चाहिए कि प्रदूषण को कम किया जाए। खुले में कूड़ा नहीं जलाना चाहिए और कोई ऐसा कर रहा है तो उसे रोकना भी चाहिए। प्रशासन को ईंट-भट्ठों की जांच करनी चाहिए।
- सुभाष गोयल, भूजल वैज्ञानिक