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न कंप्यूटर न लाइट कैसे होगा वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन
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नागरिक अस्पताल में बगैर लाइट व कंप्यूटर के मोबाइल से रजिस्ट्रेशन करते चिकित्सक व अन्य। संवाद
- फोटो : Bhiwani
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नवनीत शर्मा
भिवानी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को सुविधा देना तो दूर की बात है, वह अपने कर्मचारियों को ही उचित संसाधन उपलब्ध करवाने में असमर्थ नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना रोधी वैक्सीन का टीकाकरण करवाने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया हुआ है। इसके लिए विभाग ने अपना पल्ला झड़ने के लिए नागरिक अस्पताल में रजिस्ट्रेशन के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगा दी मगर उन्हें रजिस्ट्रेशन करने के लिए लैपटॉप और कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं करवाए। इसकी वजह से कर्मचारियों के लिए वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करना सिरदर्द बन गया है।
इस संबंध में वॉर रूम के अधिकारियों की ओर से कई बार सिविल सर्जन कार्यालय में मांग भेजी है, मगर इसको अनदेखा कर दिया जाता है। मजबूरी में अधिकारी और कर्मचारी अपने खुद के फोन से ही रजिस्ट्रेशन में जुटे हैं। उच्च अधिकारियों की लापरवाही और गैर जिम्मेदार रवैये के कारण कर्मचारियों और काम नागरिकों को परेशानी हो रही है, मगर उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
जरूरत छह की, उपलब्ध एक कंप्यूटर
नागरिक अस्पताल के वार रूम में दो जगह रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की हुई है। इन दोनों जगह तीन-तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। विभाग ने छह कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगा दी मगर उनमें से महज एक ही कर्मचारी को कंप्यूटर उपलब्ध करवाया हुआ है। बाकि के कर्मचारी रजिस्ट्रेशन कैसे करें, ये उनकी समस्या है, न की स्वास्थ्य विभाग की। यह हम नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था कह रही है। कई बार तो कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर भी तैयार नहीं मिलता है। ऐसे में वैक्सीन अभियान से जुड़े अधिकारी भी अपने फोन से ही रजिस्ट्रेशन करते नजर आते हैं।
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आठ माह बाद भी नहीं शुरू हुई बिजली सुविधा
वॉर रूम के पिछले हिस्से में रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण की व्यवस्था की हुई है। पिछले हिस्से में लोहे की टीन लगे होने की वजह से गर्मी ज्यादा हो जाती है। साथ ही इस तरफ 18 से 45 आयु वर्ग के लाभार्थियों को वैक्सीनेशन किया जाता है तो इस आयु वर्ग की संख्या भी अधिक रहती है। ऐसे में उमस भरी गर्मी है, बिजली की व्यवस्था न होने से कर्मचारी बिना पंख, कूलर के ही काम पर लगे रहते हैं। इस ओर ड्यूटी दे रहे स्वास्थ्य कर्मी और लाभार्थियों का पसीने से बुरा हाल है मगर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सैंपलिंग से संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने इन दिनों सैंपलिंग अभियान में पर अधिक जोर दे रखा है। सैंपलिंग को बढ़ाने के चक्कर में विभाग लोगों की सुरक्षा को ही भूल गया है। वार रूम में मुख्य गेट पर ही स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग शुरू कर दी है। इसकी एक तरफ वैक्सीनेशन करवाने के आने वाले लाभार्थियों की लंबी लाइन लगी रहती है। ऐसे में अगर किसी संक्रमित मरीज का कोरोना सैंपल दूसरी लोगों के लिए मुसीबत बन सकता है। साथ ही सैंपल लेने वाले कर्मचारी बगैर पीपीई किट के ही अपने कार्य में जुटे हुए हैं।
साढ़े आठ माह में 58 फीसदी को हुआ टीकाकरण
स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन का टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू किया था। विभाग ने जिलेभर में 852900 लाभार्थियों को टीकाकरण करने का लक्ष्य लिया था, जिनमें से अबतक 644630 यानी 58 फीसदी ने टीकाकरण करवाया है। जिले के स्वास्थ्यकर्मियों ने 9313 डोज, फ्रंट लाइन वर्कर ने 6348 डोज, 18-45 आयुवर्ग के लाभार्थियों ने 343564 डोज, 45-60 आयु वर्ग के लाभार्थियों को 150528 डोज, 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों को 644630 डोज लगाई है। स्वास्थ्य विभाग ने इन साढ़े आठ में महज 58 फीसदी को ही टीकाकरण किया है।
वार रूम में वैक्सीन के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की हुई है मगर वार रूम में महज एक ही कंप्यूटर है। वैक्सीनेशन के रजिस्ट्रेशन और लोगों की भीड़ के हिसाब से छह कंप्यूटर की जरूरत है। इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों से कई बार मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कर्मचारी मजबूरी में अपने फोन से ही रजिस्ट्रेशन करने में लग जाते हैं।
- डॉ. आशीष सांगवान, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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भिवानी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को सुविधा देना तो दूर की बात है, वह अपने कर्मचारियों को ही उचित संसाधन उपलब्ध करवाने में असमर्थ नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना रोधी वैक्सीन का टीकाकरण करवाने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया हुआ है। इसके लिए विभाग ने अपना पल्ला झड़ने के लिए नागरिक अस्पताल में रजिस्ट्रेशन के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगा दी मगर उन्हें रजिस्ट्रेशन करने के लिए लैपटॉप और कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं करवाए। इसकी वजह से कर्मचारियों के लिए वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करना सिरदर्द बन गया है।
इस संबंध में वॉर रूम के अधिकारियों की ओर से कई बार सिविल सर्जन कार्यालय में मांग भेजी है, मगर इसको अनदेखा कर दिया जाता है। मजबूरी में अधिकारी और कर्मचारी अपने खुद के फोन से ही रजिस्ट्रेशन में जुटे हैं। उच्च अधिकारियों की लापरवाही और गैर जिम्मेदार रवैये के कारण कर्मचारियों और काम नागरिकों को परेशानी हो रही है, मगर उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
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जरूरत छह की, उपलब्ध एक कंप्यूटर
नागरिक अस्पताल के वार रूम में दो जगह रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की हुई है। इन दोनों जगह तीन-तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। विभाग ने छह कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगा दी मगर उनमें से महज एक ही कर्मचारी को कंप्यूटर उपलब्ध करवाया हुआ है। बाकि के कर्मचारी रजिस्ट्रेशन कैसे करें, ये उनकी समस्या है, न की स्वास्थ्य विभाग की। यह हम नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था कह रही है। कई बार तो कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर भी तैयार नहीं मिलता है। ऐसे में वैक्सीन अभियान से जुड़े अधिकारी भी अपने फोन से ही रजिस्ट्रेशन करते नजर आते हैं।
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आठ माह बाद भी नहीं शुरू हुई बिजली सुविधा
वॉर रूम के पिछले हिस्से में रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण की व्यवस्था की हुई है। पिछले हिस्से में लोहे की टीन लगे होने की वजह से गर्मी ज्यादा हो जाती है। साथ ही इस तरफ 18 से 45 आयु वर्ग के लाभार्थियों को वैक्सीनेशन किया जाता है तो इस आयु वर्ग की संख्या भी अधिक रहती है। ऐसे में उमस भरी गर्मी है, बिजली की व्यवस्था न होने से कर्मचारी बिना पंख, कूलर के ही काम पर लगे रहते हैं। इस ओर ड्यूटी दे रहे स्वास्थ्य कर्मी और लाभार्थियों का पसीने से बुरा हाल है मगर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सैंपलिंग से संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने इन दिनों सैंपलिंग अभियान में पर अधिक जोर दे रखा है। सैंपलिंग को बढ़ाने के चक्कर में विभाग लोगों की सुरक्षा को ही भूल गया है। वार रूम में मुख्य गेट पर ही स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग शुरू कर दी है। इसकी एक तरफ वैक्सीनेशन करवाने के आने वाले लाभार्थियों की लंबी लाइन लगी रहती है। ऐसे में अगर किसी संक्रमित मरीज का कोरोना सैंपल दूसरी लोगों के लिए मुसीबत बन सकता है। साथ ही सैंपल लेने वाले कर्मचारी बगैर पीपीई किट के ही अपने कार्य में जुटे हुए हैं।
साढ़े आठ माह में 58 फीसदी को हुआ टीकाकरण
स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन का टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू किया था। विभाग ने जिलेभर में 852900 लाभार्थियों को टीकाकरण करने का लक्ष्य लिया था, जिनमें से अबतक 644630 यानी 58 फीसदी ने टीकाकरण करवाया है। जिले के स्वास्थ्यकर्मियों ने 9313 डोज, फ्रंट लाइन वर्कर ने 6348 डोज, 18-45 आयुवर्ग के लाभार्थियों ने 343564 डोज, 45-60 आयु वर्ग के लाभार्थियों को 150528 डोज, 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों को 644630 डोज लगाई है। स्वास्थ्य विभाग ने इन साढ़े आठ में महज 58 फीसदी को ही टीकाकरण किया है।
वार रूम में वैक्सीन के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की हुई है मगर वार रूम में महज एक ही कंप्यूटर है। वैक्सीनेशन के रजिस्ट्रेशन और लोगों की भीड़ के हिसाब से छह कंप्यूटर की जरूरत है। इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों से कई बार मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कर्मचारी मजबूरी में अपने फोन से ही रजिस्ट्रेशन करने में लग जाते हैं।
- डॉ. आशीष सांगवान, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी