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झुलस रहे नियम, आग की लपटों से घिरी इंसानी जिंदगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:42 AM IST
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More than 230 plastic grain industries running in the industrial sector, no one has NOC of fire department
संजय वर्मा
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भिवानी। मानकों के लिए तय नियम झुलस रहे हैं तो इंसानों की जिंदगी भी आग की लपटों से घिरी है। यहां बात कर रहे हैं शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 की, जहां करीब 250 से अधिक प्लास्टिक दाना उद्योग नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन उद्योगों के पास दमकल विभाग की एनओसी तक नहीं हैं।
अब तक औद्योगिक सेक्टर के प्लास्टिक दाना उद्योगों में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद भी जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। प्रशासन की नींद इन हादसों के बाद भी नहीं टूटी है। ताजा हादसा बुधवार देर रात का है, जहां एक बंद पड़ी प्लास्टिक दाना फैक्टरी के अंदर एक के बाद एक तीन गैस सिलिंडरों के धमाकों से आसपास की बिल्डिंगें भी हिल उठीं। वहीं फैक्टरी का पूरा भवन ही धराशायी हो गया। गनीमत यह रही कि फैक्टरी के अंदर कोई नहीं था।
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शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के अलावा नजदीकी गांव हरिपुर पालुवास की हद में भी काफी प्लास्टिक दाना फैक्टरी ऐसी हैं, जो घनी आबादी से घिरी हैं। इन फैक्टरियों के अंदर गैस सिलिंडर व केमिकल तक प्रयोग किए जा रहे हैं। फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी घनी आबादी की तरफ खुले में ही डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के मानकों की भी धज्जियां उड़ रही हैं और लोगों की जिंदगी से भी खिलवाड़ हो रहा है। सबसे अहम इन फैक्टरियों के अंदर पर्यावरण प्रदूषण के मानकों की जांच के लिए कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचता। हालांकि किसी भी उद्योग के लिए सबसे जरूरी दमकल विभाग से फायर एनओसी होना बहुत जरूरी है, ताकि किसी भी हादसे के वक्त जानमाल के नुकसान को होने से रोका जा सके। इसके अलावा अन्य संबंधित विभागों से भी उनके मानकों के अनुसार एनओसी लेनी पड़ती है, मगर प्लास्टिक दाना उद्योग चलाने वालों के लिए ये नियम और कानून कोई मायने नहीं रखते। हरियाणा सरकार पराली जलाने पर किसानों को तो जागरूक करने में जुटी है, मगर उद्योगों के अंदर मानक पूरे नहीं होने पर हादसों से जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, उसकी ओर शायद किसी भी अधिकारी का कोई ध्यान नहीं गया है।
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औद्योगिक सेक्टर के ग्रीन बेल्ट को भी चाट गया जहरीला केमिकल
एनजीटी ने उद्योगों के लिए काफी ऐसे मानक तय किए गए हैं, जिनका पालन बहुत जरूरी है। लेकिन औद्योगिक सेक्टर के प्लास्टिक दाना उद्योगों में रोजाना ही हजारों लीटर प्रयोग किया गया केमिकल युक्त जहरीला पानी औद्योगिक क्षेत्र के ग्रीन बेल्ट में खुले में ही छोड़ा जा रहा है। जिससे यहां पहले से पनप रही हरियाली भी चौपट हो चुकी है। हरे पेड़ भी सूखकर ठूठ बन चुके हैं। ये पानी लोगों की सेहत के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि इसके संपर्क में आने से कई गंभीर व चर्म रोग तक हो सकते हैं।
उद्योगों में इस्तेमाल हो रहा है मेडिकल वेस्ट
प्लास्टिक दाना उद्योगों में कच्चा मैटीरियल के तौर पर मेडिकल वेस्ट का भी इस्तेमाल किया जा रहा हैं, जैसे वन टाइम यूज इंजेक्शन सीरिंज। इस्तेमाल हो चुके इंजेक्शन सीरिंज की कटिंग भी फैक्टरी के अंदर ही की जाती है, जिसके बाद बचा हुआ हिस्सा खुले में ही फेंका जा रहा है, जो सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। (संवाद)
किसी के पास नहीं दमकल की एनओसी
कोई भी उद्योग नॉर्म पूरे करने के बाद जिला दमकल विभाग से फायर की एनओसी ले सकता है, लेकिन किसी भी प्लास्टिक उद्योग के पास दमकल विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई है। नियम के अनुसार नए और पहले से चल रहे उद्योगों के पास फायर एनओसी अत्यंत जरूरी है।

- ताराचंद, जिला दमकल अधिकारी, हरियाणा दमकल एवं आपातकालीन सेवाएं।

 ये कोई प्रकृति का नजारा नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट है, जहां प्लास्टिक दाना फ?

ये कोई प्रकृति का नजारा नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट है, जहां प्लास्टिक दाना फ?- फोटो : Bhiwani

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