{"_id":"5f00c3d28ebc3e43106cee44","slug":"monkey-caught-nagar-parishad-bhiwani-news-rtk562525743","type":"story","status":"publish","title_hn":"नप अधिकारियों को नहीं पता ठेकेदार ने अब तक पकड़े कितने बंदर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नप अधिकारियों को नहीं पता ठेकेदार ने अब तक पकड़े कितने बंदर
विज्ञापन
एक मकान की छत में बैठे बंदर।
- फोटो : Bhiwani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर परिषद द्वारा शहर को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मुहिम को शुरूआत में ही झटका लगा है। अचरज की बात तो यह है कि नप अधिकारियों को खुद नहीं मालूम कि ठेकेदार ने अब तक शहर के अंदर से कितने बंदर पकड़े हैं। वहीं बंदरों के आतंक से परेशान शहरवासी भी नगर परिषद के बंदर पकड़ो अभियान को केवल कागजों तक समेटने के आरोप लगा रहे हैं।
शहर की कोई भी ऐसी कॉलोनी या इलाका नहीं है, जहां पर बंदरों का आतंक नहीं है। शहर के दिनोद गेट, सराय चौपटा, खाड़ी मोहल्ला, आजाद मोहल्ला व शिवनगर कॉलोनी में अभी तक सैकड़ों बंदरों की भरमार हैं। दिनोद गेट निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उनके घरों पर सारा दिन बंदरों का आतंक रहता है। जिससे वह काफी परेशान हैं। उन्होंने इसके लिए नगर परिषद में शिकायत भी दी है परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही उनके एरिया में कोई भी ठेकेदार बंदर पकड़ने को आया है।
12 जून को हुई थी शुरुआत
गौरतलब है कि नगर परिषद ने शहर के सभी 31 वार्डों से बंदर पकड़ने के लिए धनाना वासी कृष्ण नामक ठेकेदार को ठेका दिया हुआ है। ठेकेदार को प्रत्येक बंदर पकड़ने पर करीब प्रति बंदर साढ़े सात सौ रुपये भुगतान निर्धारित किया हुआ है। 12 जून को नगर परिषद के ठेकेदार ने जिला सामान्य अस्पताल परिसर से बंदर पकड़ने की मुहिम शुरू की थी। नप चेयरमैन रणसिंह यादव व उपाध्यक्ष मामनचंद ने बंदर पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों में बंदर पकड़वा कर इस कार्य की शुरूआत की थी। ठेकेदार को शुरूआत में दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया और इसके बाद भी उसके ठेके को रिवाइज कर फिर से बंदर पकड़कर पूरे शहर को बंदरों से मुक्त किए जाने का दावा किया गया। नगर परिषद के सर्वेक्षण के अनुसार पूरे शहर में करीब दस हजार बंदर हैं। शहरी आबादी पर बंदरों की ये तादाद किसी आफत से कम नहीं है, लेकिन करीब 25 दिन बीत जाने के बावजूद भी शहर बंदर के अंदर बंदरों की तादाद कम नहीं हुई।
विज्ञापन
घर की छत पर जाने से लगता है डर
शिव नगर कॉलोनी निवासी अरुण अग्रवाल ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बंदरों का आतंक है। जिसके लिए कॉलोनी वासी घरों में बंद होकर रह गए हैं। टीआईटी कॉलोनी निवासी विकास वशिष्ट ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बंदरों ने काफी उत्पात मचाया हुआ है, बंदर घरों में घुस जाते हैं। औरतों, बच्चों को काटने दौड़ते हैं और घर में तोड़फोड़ भी करते हैं। प्रशासन द्वारा इनकी रोकथाम के लिए अभी कोई कदम नहीं उठाया है। लोगों का आरोप है कि अभी तक नगर परिषद ने बंदर पकड़ने का ठेका दिया है, लेकिन कोई भी कॉलोनी व इलाका बंदर मुक्त नहीं हुआ है।
पूरे शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने का अभियान शुरू किया गया है। ठेकेदार को बंदर पकड़ने के बाद इन्हें यमुनानगर के कलेसर के जंगलों में छोड़ा जाना है। हर दूसरे दिन पकड़े गए बंदरों को छोड़ने की व्यवस्था की गई है। सोमवार से ठेकेदार को शहर से बंदर पकड़ने के लिए निर्धारित जगहों की सूची सौंपी जाएगी। फिलहाल मुझे नहीं मालूम की कितने बंदर अब तक पकड़े हैं।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन नगर परिषद भिवानी।
विज्ञापन
शहर की कोई भी ऐसी कॉलोनी या इलाका नहीं है, जहां पर बंदरों का आतंक नहीं है। शहर के दिनोद गेट, सराय चौपटा, खाड़ी मोहल्ला, आजाद मोहल्ला व शिवनगर कॉलोनी में अभी तक सैकड़ों बंदरों की भरमार हैं। दिनोद गेट निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उनके घरों पर सारा दिन बंदरों का आतंक रहता है। जिससे वह काफी परेशान हैं। उन्होंने इसके लिए नगर परिषद में शिकायत भी दी है परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही उनके एरिया में कोई भी ठेकेदार बंदर पकड़ने को आया है।
विज्ञापन
12 जून को हुई थी शुरुआत
गौरतलब है कि नगर परिषद ने शहर के सभी 31 वार्डों से बंदर पकड़ने के लिए धनाना वासी कृष्ण नामक ठेकेदार को ठेका दिया हुआ है। ठेकेदार को प्रत्येक बंदर पकड़ने पर करीब प्रति बंदर साढ़े सात सौ रुपये भुगतान निर्धारित किया हुआ है। 12 जून को नगर परिषद के ठेकेदार ने जिला सामान्य अस्पताल परिसर से बंदर पकड़ने की मुहिम शुरू की थी। नप चेयरमैन रणसिंह यादव व उपाध्यक्ष मामनचंद ने बंदर पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों में बंदर पकड़वा कर इस कार्य की शुरूआत की थी। ठेकेदार को शुरूआत में दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया और इसके बाद भी उसके ठेके को रिवाइज कर फिर से बंदर पकड़कर पूरे शहर को बंदरों से मुक्त किए जाने का दावा किया गया। नगर परिषद के सर्वेक्षण के अनुसार पूरे शहर में करीब दस हजार बंदर हैं। शहरी आबादी पर बंदरों की ये तादाद किसी आफत से कम नहीं है, लेकिन करीब 25 दिन बीत जाने के बावजूद भी शहर बंदर के अंदर बंदरों की तादाद कम नहीं हुई।
विज्ञापन
घर की छत पर जाने से लगता है डर
शिव नगर कॉलोनी निवासी अरुण अग्रवाल ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बंदरों का आतंक है। जिसके लिए कॉलोनी वासी घरों में बंद होकर रह गए हैं। टीआईटी कॉलोनी निवासी विकास वशिष्ट ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बंदरों ने काफी उत्पात मचाया हुआ है, बंदर घरों में घुस जाते हैं। औरतों, बच्चों को काटने दौड़ते हैं और घर में तोड़फोड़ भी करते हैं। प्रशासन द्वारा इनकी रोकथाम के लिए अभी कोई कदम नहीं उठाया है। लोगों का आरोप है कि अभी तक नगर परिषद ने बंदर पकड़ने का ठेका दिया है, लेकिन कोई भी कॉलोनी व इलाका बंदर मुक्त नहीं हुआ है।
पूरे शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने का अभियान शुरू किया गया है। ठेकेदार को बंदर पकड़ने के बाद इन्हें यमुनानगर के कलेसर के जंगलों में छोड़ा जाना है। हर दूसरे दिन पकड़े गए बंदरों को छोड़ने की व्यवस्था की गई है। सोमवार से ठेकेदार को शहर से बंदर पकड़ने के लिए निर्धारित जगहों की सूची सौंपी जाएगी। फिलहाल मुझे नहीं मालूम की कितने बंदर अब तक पकड़े हैं।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन नगर परिषद भिवानी।