{"_id":"5de16b7b8ebc3e550115f23d","slug":"light-problem-bill-compaint-bhiwani-news-rtk529989879","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन दिन में होना था शिकायतों का निदान, तीन सप्ताह से लटक रहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन दिन में होना था शिकायतों का निदान, तीन सप्ताह से लटक रहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली निगम में भ्रष्टाचार और उपभोक्ताओं के कार्य में बिना देरी के समाधान और धांधली पर लगाम लगाने की नियत से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम हिसार मुख्यालय में कंज्यूमर बैक आफिस (सीबीओ) सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन ये सिस्टम शुरूआती दौर में ही उपभोक्ताओं के साथ-साथ निगम कर्मचारियों के लिए भी परेशानी बन गया है। तीन शहरी सब डिवीजनों से हर माह 350 से अधिक शिकायतें हिसार मुख्यालय के सेंट्रल कंज्यूमर बैक आफिस में दर्ज कराई जाती हैं, मगर इनका समाधान तीन दिन की निर्धारित अवधि के बावजूद भी तीन सप्ताह तक लटकाया जा रहा है।
बिजली बिल ठीक कराने, मीटर बदली कराने के साथ साथ बिजली मीटर हटवाने तक की शिकायतों को हिसार मुख्यालय के सीबीओ में वेरिफिकेशन के दायरे में लाया गया है। शहरी बिजली उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में गड़बड़ी व मीटर बदली कराने के लिए एसडीओ को ही अधिकार दिए थे। इसी के चलते निगम ने कंज्यूमर बैक आफिस बनाया था। जिसमें एसडीओ द्वारा किसी भी उपभोक्ता के बिजली बिल की गड़बड़ी को ठीक करने और मीटर बदली करने के साथ साथ पीडीसीओ के मामले सीबीओ के पास भेजे जाने लगे। सीबीओ से मंजूरी मिलने के बाद ही उपभोक्ता के बिल को ठीक किए जाने व मीटर बदलने की अनुमति निगम अधिकारियों को दी गई। लेकिन इस सिस्टम के शुरूआत में ही उपभोक्ताओं को इस नई व्यवस्था का लाभ मिलने की बजाए उनके काम और उलझते चले गए।
भिवानी सर्कल में सिटी डिवीजन के अंतर्गत तीन सब डिवीजन आती हैं। इसमें सिटी सब डिवीजन के अंतर्गत करीब 23 हजार बिजली उपभोक्ता आते हैं, जबकि सिटी सब डिवीजन नंबर एक में करीब 29 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इसी तरह सिटी सब डिवीजन नंबर दो में करीब 30 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इन सभी उपभोक्ताओं के बिजली बिलों को ठीक करने, मीटर बदलने और बिल संबंधी सभी प्रकार की शिकायतें दुरुस्त करने के लिए सीबीओ की मंजूरी अनिवार्य की गई हैं। इसके लिए निगम सब डिवीजन स्तर पर उस बिजली उपभोक्ता के संबंधित दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए सीबीओ के पास भेजते हैं, जिनकी अच्छी तरह से जांच पड़ताल के बाद ही उस कार्य की मंजूरी मिलती है।
विज्ञापन
हर माह आती हैं 350 से अधिक शिकायतें
तीनों ही शहरी सब डिवीजनों में हर माह 350 से अधिक बिजली बिलों से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, मगर इन शिकायतों का निवारण करने से पहले एसडीओ को इसकी सीबीओ से मंजूरी अनिवार्य हैं। इसके बाद ही उन्हें दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाया जाता है। इन समस्याओं का मात्र तीन दिन के अंदर समाधान करना अनिवार्य हैं, मगर दस्तावेजों का सही से मिलान नहीं हो पाने की वजह से तीन से चार सप्ताह तक भी उपभोक्ताओं के काम नहीं बन रहे हैं।
बिल ठीक होने के इंतजार में निकल गई तिथि
बिल ठीक कराने के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर उपभोक्ताओं के बिजली बिलों की तिथि बिल ठीक होने के इंतजार में निकल गई है। अब उन्हें पेनल्टी का डर सता रहा है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि विभाग इनकी पेनल्टी माफ करेगा या इन्हें भुगतनी होगी।
कंज्यूमर बैक ऑफिस सिस्टम का शुरूआती दौर हैं। इस सिस्टम को समझने के लिए कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। सीबीओ और सब डिवीजन आफिस के स्टाफ में आपसी तालमेल और दस्तावेजों के आदान प्रदान में सही प्रक्रिया अपनाने के संबंध में भी जरूरी हिदायतें दी जा रही हैं, ताकि उपभोक्ता को बेवजह परेशानी न उठानी पड़े।
- रवींद्र घणघस, कार्यकारी अभियंता सिटी डिवीजन भिवानी।
विज्ञापन
बिजली बिल ठीक कराने, मीटर बदली कराने के साथ साथ बिजली मीटर हटवाने तक की शिकायतों को हिसार मुख्यालय के सीबीओ में वेरिफिकेशन के दायरे में लाया गया है। शहरी बिजली उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में गड़बड़ी व मीटर बदली कराने के लिए एसडीओ को ही अधिकार दिए थे। इसी के चलते निगम ने कंज्यूमर बैक आफिस बनाया था। जिसमें एसडीओ द्वारा किसी भी उपभोक्ता के बिजली बिल की गड़बड़ी को ठीक करने और मीटर बदली करने के साथ साथ पीडीसीओ के मामले सीबीओ के पास भेजे जाने लगे। सीबीओ से मंजूरी मिलने के बाद ही उपभोक्ता के बिल को ठीक किए जाने व मीटर बदलने की अनुमति निगम अधिकारियों को दी गई। लेकिन इस सिस्टम के शुरूआत में ही उपभोक्ताओं को इस नई व्यवस्था का लाभ मिलने की बजाए उनके काम और उलझते चले गए।
विज्ञापन
भिवानी सर्कल में सिटी डिवीजन के अंतर्गत तीन सब डिवीजन आती हैं। इसमें सिटी सब डिवीजन के अंतर्गत करीब 23 हजार बिजली उपभोक्ता आते हैं, जबकि सिटी सब डिवीजन नंबर एक में करीब 29 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इसी तरह सिटी सब डिवीजन नंबर दो में करीब 30 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इन सभी उपभोक्ताओं के बिजली बिलों को ठीक करने, मीटर बदलने और बिल संबंधी सभी प्रकार की शिकायतें दुरुस्त करने के लिए सीबीओ की मंजूरी अनिवार्य की गई हैं। इसके लिए निगम सब डिवीजन स्तर पर उस बिजली उपभोक्ता के संबंधित दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए सीबीओ के पास भेजते हैं, जिनकी अच्छी तरह से जांच पड़ताल के बाद ही उस कार्य की मंजूरी मिलती है।
विज्ञापन
हर माह आती हैं 350 से अधिक शिकायतें
तीनों ही शहरी सब डिवीजनों में हर माह 350 से अधिक बिजली बिलों से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, मगर इन शिकायतों का निवारण करने से पहले एसडीओ को इसकी सीबीओ से मंजूरी अनिवार्य हैं। इसके बाद ही उन्हें दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाया जाता है। इन समस्याओं का मात्र तीन दिन के अंदर समाधान करना अनिवार्य हैं, मगर दस्तावेजों का सही से मिलान नहीं हो पाने की वजह से तीन से चार सप्ताह तक भी उपभोक्ताओं के काम नहीं बन रहे हैं।
बिल ठीक होने के इंतजार में निकल गई तिथि
बिल ठीक कराने के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर उपभोक्ताओं के बिजली बिलों की तिथि बिल ठीक होने के इंतजार में निकल गई है। अब उन्हें पेनल्टी का डर सता रहा है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि विभाग इनकी पेनल्टी माफ करेगा या इन्हें भुगतनी होगी।
कंज्यूमर बैक ऑफिस सिस्टम का शुरूआती दौर हैं। इस सिस्टम को समझने के लिए कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। सीबीओ और सब डिवीजन आफिस के स्टाफ में आपसी तालमेल और दस्तावेजों के आदान प्रदान में सही प्रक्रिया अपनाने के संबंध में भी जरूरी हिदायतें दी जा रही हैं, ताकि उपभोक्ता को बेवजह परेशानी न उठानी पड़े।
- रवींद्र घणघस, कार्यकारी अभियंता सिटी डिवीजन भिवानी।