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Bhiwani News: तीन करोड़ खर्च कर बनाई झील बदहाल, झाड़ियों में तब्दील हुआ परिसर

Thu, 29 Oct 2026 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 29 Oct 2026 11:59 PM IST
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Lake built at a cost of 30 million (3 crore) is in a dilapidated state; the premises have turned into a thicket of bushes.
बवानीखेड़ा में बाबा कमाल मंदिर के साथ लगती झील का दृश्य।
बवानीखेड़ा। कस्बे में बाबा कमाल मंदिर के साथ लगती झील पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर सुंदरीकरण और विकास कार्य करवाए गए थे लेकिन देखरेख के अभाव में यह बदहाल हो चुकी है। कभी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी लेकिन अब यहां दूषित पानी, घनी झाड़ियां और सरकंडे लोगों के लिए परेशानी और डर का कारण बने हुए हैं।
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स्थानीय नागरिक महेंद्र, रोहताश और सतबीर ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्रशासन झील की देखरेख नहीं कर पाया। दिनेश और शमशेर के अनुसार झील के आसपास झाड़ियां और सरकंडे उग आए हैं जिससे क्षेत्र सुनसान और भयावह नजर आता है। शुरुआत में दिन-रात लोगों की आवाजाही रहती थी और कुछ समय तक लाइटें भी जलती थीं लेकिन झील का पानी कभी नहीं निकाला गया। अब शाम ढलते ही परिसर वीरान हो जाता है।
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नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार झील में दूषित पानी जमा है और नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं है। झाड़ियों और सरकंडों के कारण सांप व अन्य जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले यहां एक व्यक्ति का शव भी मिला था और परिसर में अक्सर युवा नशे की हालत में दिखाई देते हैं। असामाजिक तत्वों की आवाजाही की आशंका के चलते महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
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कर्मबीर, शुभम और शंकर ने कहा कि पहले यह स्थान परिवारों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र था लेकिन अब यहां जाना जोखिम भरा लगता है। सतबीर, रामकिशन और बीर सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी झील की यह हालत जनता के पैसे की बर्बादी है। लोगों ने सफाई, झाड़ियों की कटाई, नियमित रखरखाव, रोशनी और चौकीदार की व्यवस्था करने की मांग की है। झील के निर्माण कार्य को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर और सतर्कता विभाग की जांच चलने की बात भी कही जा रही है।

झील के बजाय म्हारा जोहड़ ए आच्छा था
झील के आसपास रहने वाले सतबीर और रामकिशन का कहना है कि इस झील से तो उनका पुराना जोहड़ ही अच्छा था। कम से कम पशुओं को पानी पीने के लिए तो मिल जाता था। लोगों ने संबंधित प्रशासन से झील की सुध लेने और यहां फैली झाड़ियों को हटाकर परिसर को सुरक्षित बनाने की मांग की है। बदहाली के कारण लोग यहां आने-जाने से भी डरते हैं।



झील की वर्तमान स्थिति को लेकर मुझे जानकारी है और जल्द ही इसकी सुध ली जाएगी। झील के आसपास की झाड़ियों को हटवाया जाएगा, नियमित सफाई करवाई जाएगी और आवश्यकतानुसार लाइटिंग व सुरक्षा के इंतजाम भी किए जाएंगे ताकि लोग यहां पर घूमने आ-जा सकें। पहले पक्षी विहार व मौजूदा योग शेड की स्थापना करवाई गई है जल्द ही इसका लुक तबदील किया जाएगा। -सुंदर अत्री, चेयरमैन, नगरपालिका बवानीखेड़ा।
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