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कृष्णा कॉलोनी में धू-धू कर जल गया मकान
ब्यूरो/ अमर उजाला, भिवानी
Updated Wed, 08 Oct 2014 12:42 AM IST
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कृष्णा कॉलोनी में क्रॉकरी मालिक का घर जलकर खाक हो गया। मकान में रखा लाखों रुपये का क्रॉकरी का सामान भी राख हो गया। साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग में करीब 12 लाख का सामान जलकर राख हो गया। मकान की छत व दीवारें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की छह गाड़ियां लगाई गई।
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हादसा मंगलवार सुबह करीब 10 बजे हुआ। कृष्णा कॉलोनी के मकान नंबर 252 वासी विनोद छाबड़ा की घंटाघर पर क्रॉकरी की दुकान है। वह अपनी पत्नी के साथ सोमवार को वृंदावन चले गए। उनका इकलौता लड़का रशीश सुबह दुकान पर चला गया। घर के बाहर बने कमरे में उनकी माता चंद्रावती ही थी।
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सुबह अचानक घर में आग लग गई। सूचना पर रशीश मौके पर पहुंचा और इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। सुबह करीब सवा 10 बजे आग बुझाना शुरू हुआ। घर के नीचे बने तीन कमरों में क्रॉकरी व प्लास्टिक का स्टॉक रखा था। आग प्लास्टिक के सामान में लगी होने के कारण तेजी से फैलती चली गई और उसे काबू करना भी मुश्किल रहा। दूर-दूर तक आग की लपटें व धुंआ ही दिखाई दे रहा था।
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दमकल विभाग की तीन गाड़ियों ने दो-दो-तीन-तीन चक्कर काट करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग पर दोपहर दो बजे तक काबू पाया गया, जब तक सारा सामान जल चुका था। रशीश ने बताया कि आग से घर में रखा दुकान का सारा सामान जल गया। इसके अलावा खिड़की-दरवाजा व घरेलू सामान जल गया। मकान की छत गिर गई और दीवार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
आग बुझाने में खर्च हुआ 31 हजार लीटर पानी
आग बुझाने के लिए दमकल विभाग को खूब मेहनत करनी पड़ी। आग इतनी प्रचंड थी कि दमकल विभाग को 30 हजार लीटर पानी फेंकना पड़ा। दस-दस हजार लीटर क्षमता की दो, पांच-पांच हजार की दो व एक हजार क्षमता की एक गाड़ी आग बुझाने में लगी। एक हजार क्षमता वाली एक गाड़ी के अलावा गैस व केमिकल आग बुझाने वाली फोम टेंडर गाड़ी भी भेजनी पड़ी।
धमाका हुआ और बच गए कर्मचारी
आग बुझाने में जब दमकल कर्मचारी जुटे थे तो अचानक धमाका हुआ और आग का गोला सा नजर आया। दमकल कर्मचारियों और अन्य लोगों ने मकान से बाहर भागकर जान बचाई। धमाका सिलेंडर फटने का था या किसी अन्य चीज का, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया। आग कैसे लगी यह भी पूरे समय स्पष्ट नहीं था। मकान मालिक विनोद के बेटे रशीश ने बताया कि उन्हें लगता है कि शार्ट सर्किट से आग लगी। मगर आसपास के लोगों ने यह भी बताया कि तेज धमाका हुआ था। ऐसा लगा माना सिलेंडर फट गया हो।
धुएं के प्रभाव से हर की आंख में थे आंसू
आग बुझाने में जुटे दमकल विभाग के कर्मचारियों, आग बुझाने में मदद कर रहे पड़ोसियों व नगर व्यापार मंडल के कर्मचारियों सभी की आंखों में आंसू थे। ये आंसू सामान जलने से हुए नुकसान के नहीं बल्कि आग में जले प्लास्टिक व अन्य सामान के कारण निकले धुएं के कारण थे। केमिकल वाले इस धुएं के कारण सभी की आंखों से आंसू निकलने लगे और जलन होने लगी। आग बुझाने में जुटे कर्मचारियों के पास ना तो मास्क था और ना ही फायर सेफ्टी सूट। मास्क व सुरक्षा किट नहीं होने के कारण कर्मचारी धुएं में नहीं जा पा रहे थे और कुछ दूरी से ही पानी फेंका जा रहा था। जिस कारण आग पर काबू पाने में अधिक समय लगा।
हर समय रहती है हादसे की आशंका
आग बुझाने में जुटे कर्मचारियों व अन्य लोगों को हर समय घर मेें रखे चार सिलेंडरों के फटने की आशंका सताती रही। आग के कारण सिलेंडर काफी गर्म भी हो गए थे। बाद में दमकल विभाग के कर्मचारियों ने सिलेंडर उठाए। विभाग के एक कर्मचारी ने दो सिलेंडर फायर ब्रिगेड की गाड़ी में रख लिए। जिस पर पड़ोसियों ने आपत्ति जताई तो हंगामा शुरू हो गया। बाद में आसपास मौजूद अन्य लोगों ने दोनों को अलग किया।
मदद के लिए उठे हाथ
घर में भीषण आग लगी और 17-18 वर्षीय रशीश अकेला सामान बाहर निकालने में जुटा था। तभी नगर व्यापार मंडल के करीब 50 युवकों ने सचिव संजय दुआ के नेतृत्व में सहायता के लिए अभियान छेड़ा और आग बुझाने व सामान बाहर निकालने में मदद की। इसके अलावा परिजन व पड़ोसी भी मदद करते दिखे।