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Bhiwani News: नए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन ने फूंका पुतला
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तोशाम। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने नए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में शनिवार को गांव दुल्हेड़ी में पुतला दहन कर रोष जताया। संगठन के जिला प्रधान रोहतास सिंह सैनी ने कहा कि यह व्यापार समझौता एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित रहने के बाद तीन फरवरी को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता संसद में किसान विरोधी, जनविरोधी और कॉरपोरेट समर्थक केंद्रीय बजट पेश होने के तुरंत बाद किया गया है।
रोहतास सिंह सैनी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस समझौते की घोषणा ऐसे समय की गई, जब संसद का सत्र चल रहा था। इसका सीधा असर देश के किसानों, विशेषकर भारतीय कृषि समुदाय पर पड़ेगा। संगठन के जिला कमेटी सदस्य फूलचंद ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इसके बदले रूस से तेल खरीदने के नाम पर भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर भारत से आयातित अमेरिकी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
जिला कमेटी सदस्य महेंद्र सिंह कटारिया ने कहा कि इस समझौते में कई ऐसे बिंदु शामिल हैं, जो किसानों को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। भारत ने मक्का और आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन सहित अमेरिकी कृषि उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने की प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे 1.3 अरब डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार यदि भारत अपने डेयरी क्षेत्र को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए खोलता है, तो इससे भारतीय डेयरी किसानों को प्रति वर्ष लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है। वर्तमान में भारत द्वारा विभिन्न डेयरी उत्पादों पर लगाए गए 55 से 81 प्रतिशत टैरिफ भारतीय किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच थे, जिन्हें समाप्त किए जाने से अमेरिकी डेयरी उत्पादों की बाढ़ आने का खतरा है। पुतला दहन कार्यक्रम में शुभराम, दयासिंह, मालाराम, द्वारका प्रसाद, राजबीर सहित अन्य किसान व मजदूर संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
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रोहतास सिंह सैनी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस समझौते की घोषणा ऐसे समय की गई, जब संसद का सत्र चल रहा था। इसका सीधा असर देश के किसानों, विशेषकर भारतीय कृषि समुदाय पर पड़ेगा। संगठन के जिला कमेटी सदस्य फूलचंद ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इसके बदले रूस से तेल खरीदने के नाम पर भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर भारत से आयातित अमेरिकी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
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जिला कमेटी सदस्य महेंद्र सिंह कटारिया ने कहा कि इस समझौते में कई ऐसे बिंदु शामिल हैं, जो किसानों को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। भारत ने मक्का और आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन सहित अमेरिकी कृषि उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने की प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे 1.3 अरब डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार यदि भारत अपने डेयरी क्षेत्र को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए खोलता है, तो इससे भारतीय डेयरी किसानों को प्रति वर्ष लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है। वर्तमान में भारत द्वारा विभिन्न डेयरी उत्पादों पर लगाए गए 55 से 81 प्रतिशत टैरिफ भारतीय किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच थे, जिन्हें समाप्त किए जाने से अमेरिकी डेयरी उत्पादों की बाढ़ आने का खतरा है। पुतला दहन कार्यक्रम में शुभराम, दयासिंह, मालाराम, द्वारका प्रसाद, राजबीर सहित अन्य किसान व मजदूर संगठन के सदस्य मौजूद रहे।