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कैरू माइनर को कैनाल बनाने पर एकमत हुए 10 गांवों के किसान

Mon, 07 Oct 2019 12:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 12:21 AM IST
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farmers, 10 villege
पानी समस्या से परेशान 10 गांवों के किसानों की पंचायत में वाद-विवाद के बीच कैरू माइनर को कैनाल बनवाने के लिए सहमति बन गई। अब सरकार के समक्ष इस मांग के साथ पानी बढ़ाने की मांग रखी जाएगी। इतना ही नहीं सभी मिलकर टेल तक पानी पहुंचाने केलिए संघर्ष करेंगे।
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रविवार को गांव दिनोद के विश्वकर्मा मंदिर में सुबह 11 बजे 10 गांवों की पंचायत हुई। करीबन दो से ढाई घंटे तक चली इस पंचायत में सभी गांवों के किसानों ने कैरू माइनर को कैनाल बनाने की मांग को लेकर एक साथ आवाज उठाने और इस इलाके के लिए नहरी पानी बढ़ाए जाने की मांग सरकार के समक्ष रखे जाने का फैसला लिया।
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पिछले दिनों कैरू माइनर में पाइप लाइन बिछाने को लेकर किसानों के दो पक्ष आमने-सामने हो गए थे। कैरू माइनर के टेल पर लगने वाले गांवों के किसान नहर में पाइप लाइन डालने का पक्ष ले रहे थे तो हेड के साथ लगने वाले गांवों ने पाइप लाइन की जगह खुली नहर को ही चौड़ा किए जाने की मांग उठाई थी। किसानों के विरोध के चलते कैरू माइनर हेड पर पाइप लाइन डालने का काम भी करीबन 10 दिन पहले ही बंद करा दिया था। इतना ही नहीं पाइप लाइन के विरोध में काम रुकवाए जाने के बाद ढाणीमाहू के किसानों ने भी उपायुक्त से लघु सचिवालय पहुंचकर मुलाकात की थी, मगर उपायुक्त ने इस संबंध में किसानों को कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। इसके बाद इस मसले पर रविवार को करीबन दस गांवों की पंचायत हुई।
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इन गांवों के प्रतिनिधियों ने लिया पंचायत में हिस्सा : गांव दिनोद के विश्वकर्मा मंदिर में हुई पंचायत मेें गांव दिनोद, कोहाड़, बीरण ढाणी, बीरण, कोहाड़ मालवास के अलावा कैरू माइनर के टेल पर लगने वाले गांव ढाणीमाहू, लेंघा, जीतवानबास सहित आसपास के किसानों ने भी हिस्सा लिया। पंचायत में दिनोद के सरपंच राजपाल डीपी, कोहाड से पूर्व सरपंच सुरेंद्र, पूर्व सरपंच बीर सिंह पहलवान, नर सिंह राव, पूर्व सरपंच विनोद, नरेश उर्फ बाणिया, महेश यादव, भगत सिंह यादव सहित अनेक किसान शामिल हुए।

पंचायत में किसानों ने दिए ये तर्क : पंचायत में मौजूद किसानों ने अपने-अपने तर्क देकर कैरू माइनर पर लगने वाले सभी गांवों के किसानों की सिंचाई से पहले पेयजल जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त पानी की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि पाइपलाइन डालना समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है। जब तक इस इलाके की नहर को पूरा पानी नहीं मिलेगा, कोई भी गांव का किसान न तो खेतों को सिंचित कर पाएगा और न ही पशुओं के साथ-साथ लोगों की पेयजल जरूरत पूरी होगी। वे इसकी पुरजोर पैरवी करते हैं कि ढाणीमाहू, लेंघा, जीतवानबास को भी पूरा नहरी पानी मिले। लेकिन ये तब संभव होगा जब माइनर को कैनाल में बदला जाएगा और यहां पानी की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इसके साथ साथ पंचायत में नहरी पानी चोरी पर भी कई किसानों ने अपने तर्क रखे। इस पर पंचायत में मौजूद किसानों ने कहा कि नहरी पानी चोरी के पक्ष में कोई भी नहीं है, इस पर विभाग चाहे कितनी भी सख्ती करें, वे उसका समर्थन करेंगे। किसानों का कहना था कि यहां का जमीनी पानी 50 से 70 फुट नीचे है, जिसका स्वाद भी अब पीने लायक नहीं रह गया है। पंचायत में कैरू माइनर पर पाइप लाइन डालने का किसानों ने विरोध किया। जिस पर टेल पर लगने वाले गांवों के किसानों ने चुप्पी साध ली।
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