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Bhiwani News: सरकारी पाबंदियों के बाद भी मेडिकल कॉलेज में निजी कंपनियों की दवाएं लिख रहे चिकित्सक

Sat, 19 Jul 2025 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 19 Jul 2025 11:07 PM IST
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Despite government restrictions, doctors in medical colleges are prescribing medicines from private companies
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक कक्ष से बाहर निकलता निजी कंपनी का दवा प्रत
भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में सरकारी पाबंदियों के बावजूद निजी दवा कंपनियों की पैठ लगातार बनी हुई है। जन औषधि योजना के तहत मरीजों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध करवाने की सरकार की मंशा को झटका देते हुए चिकित्सक लगातार निजी कंपनियों की महंगी ब्रांडेड दवाएं मरीजों की ओपीडी पर्ची पर लिखकर दे रहे हैं।
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चौंकाने वाली बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 15 से 20 दवा प्रतिनिधि बेरोकटोक डॉक्टरों से मिलने पहुंचते हैं। प्रतिनिधियों की मौजूदगी पर प्रतिबंध होने के बावजूद वे पूरे दिन चिकित्सकों के कमरों के बाहर मंडराते रहते हैं और चिकित्सक अपनी जांच के समय से कटौती कर इनसे मुलाकात करते हैं।
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चिकित्सकों पर आरोप है कि वे मरीजों को सरकारी पर्ची पर दवा लिखने के साथ ही एक अलग निजी कंपनी की पर्ची भी थमा रहे हैं और यह हिदायत भी देते हैं कि ये दवाएं सिर्फ बाहर के मेडिकल स्टोर से मिलेंगी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि चिकित्सकों और निजी कंपनियों के बीच गहरी सांठगांठ चल रही है।
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नियम के अनुसार चिकित्सक को दवा का केवल रासायनिक (जेनेरिक) नाम ही लिखना होता है ताकि मरीज जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं ले सकें। लेकिन मेडिकल कॉलेज के कई चिकित्सक खुलेआम नियमों की अनदेखी कर निजी ब्रांडेड कंपनियों के नाम मरीजों को लिख रहे हैं।

जन औषधि योजना को पहुंचा रहे नुकसान
भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का उद्देश्य कम मूल्य पर उच्च गुणवत्ता की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करवाना है। भिवानी के नागरिक अस्पताल परिसर में भी जन औषधि केंद्र संचालित है लेकिन चिकित्सकों की यह प्रवृत्ति योजना को विफल कर रही है। रोजाना एक हजार से अधिक मरीज मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंचते हैं, जिनमें से अधिकांश गरीब व जरूरतमंद होते हैं जो सस्ती दवा की उम्मीद लेकर आते हैं।

प्रलोभनों का खेल और मरीजों पर आर्थिक भार
निजी कंपनियों के दवा प्रतिनिधि चिकित्सकों को आकर्षक गिफ्ट, नकद पुरस्कार और व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं देकर प्रभावित करते हैं। बदले में चिकित्सक उन्हीं कंपनियों की महंगी ब्रांडेड दवाएं मरीजों को लिखते हैं जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर दवा खरीदने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।



मेडिकल कॉलेज की ओपीडी विभाग में नागरिक अस्पताल की ओपीडी संचालित हो रही है। चिकित्सक कक्षों में निजी कंपनियों के दवा प्रतिनिधियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध है। किसी भी सरकारी चिकित्सक को निजी कंपनी की दवा लिखने की अनुमति नहीं है। यदि कोई ऐसा कर रहा है तो यह नियमों के खिलाफ है और इसकी जांच की जाएगी।
- डॉ. बलवान, कार्यवाहक प्रभारी, नागरिक अस्पताल, भिवानी।
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