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दया सुखां री बेलड़ी, दया सुखां री खान : महाश्रमण
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अपनी धवल सेना के साथ पैदल चलते हुए आचार्य महाश्रमण। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
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भिवानी। महातपस्वी अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण ने अपनी धवल सेना सहित सोमवार को भिवानी जिले में प्रवेश कर लिया। रोहतक रोड स्थित बिट्स संस्थान में अपने अल्पप्रवास विश्राम के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए दया के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में जीवों के प्रति अनुकंपा दया की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने एक राजस्थानी मुक्तक के माध्यम से दया का महत्व बताया, जिसके बोल थे ‘दया सुखां री बेलड़ी, दया सुखां री खान, अनंत जीव मुखी गया, दया-दया गुणगान।
उन्होंने फरमाया कि अगर आदमी के मन में दया है तो आदमी हिंसा से बच सकता है। उन्होंने इतना तक कहा कि हमें बिना मतलब चींटियों को भी तकलीफ नहीं देनी चाहिए। भक्ति का सागर बहाते हुए उन्होंने एक मधुर भजन जिसके बोल थे यदि भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना भी सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। युगप्रधान अलंकरण से अलंकृत आचार्य ने मोबाइल के बढ़ते प्रयोग पर भी चिंता जताई और लोगों को सलाह दी कि कम से कम वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग तो न करें।
गौरतलब होगा कि जैन तेरापंथ के गुरु आचार्य महाश्रमण किसी भी भौतिक सुख सुविधा को नहीं ग्रहण करते, पैदल ही चलते हैं। यहां तक कि इस गर्मी में पंखा भी प्रयोग नहीं करते। बिट्स संस्थान में पधारने पर पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने सभी संतों का वंदन किया।
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उन्होंने फरमाया कि अगर आदमी के मन में दया है तो आदमी हिंसा से बच सकता है। उन्होंने इतना तक कहा कि हमें बिना मतलब चींटियों को भी तकलीफ नहीं देनी चाहिए। भक्ति का सागर बहाते हुए उन्होंने एक मधुर भजन जिसके बोल थे यदि भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना भी सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। युगप्रधान अलंकरण से अलंकृत आचार्य ने मोबाइल के बढ़ते प्रयोग पर भी चिंता जताई और लोगों को सलाह दी कि कम से कम वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग तो न करें।
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गौरतलब होगा कि जैन तेरापंथ के गुरु आचार्य महाश्रमण किसी भी भौतिक सुख सुविधा को नहीं ग्रहण करते, पैदल ही चलते हैं। यहां तक कि इस गर्मी में पंखा भी प्रयोग नहीं करते। बिट्स संस्थान में पधारने पर पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने सभी संतों का वंदन किया।
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