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Haryana: पांच बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय तो एक ने राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई गांव को पहचान, दो सेना में चयनित
Sun, 25 Dec 2022 09:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह
नवनीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
नवनीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 25 Dec 2022 09:01 AM IST
सार
दो बेटियों को हाल ही में सेना में पद मिला तो ट्रेनर किसान रमेश भी चर्चा में आ गए। उन्होंने अपनी बेटी प्रियंका के अलावा गांव की करीब 20 लड़कियों को कुश्ती का अभ्यास शुरू करवाया।
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माता-पिता के साथ पहलवान प्रियंका। अपनी बहनों के साथ अंतरराष्ट्रीय कुश्ती पहलवान भतेरी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के गांव बलाली की फौगाट बहनों की कुश्ती देख और अपने पहलवानी के सपने को पूरा करने के लिए नंगला के किसान रमेश ने गांव में ही दंगल जमा दिया। उन्होंने अपनी बेटी प्रियंका के अलावा गांव की करीब 20 लड़कियों को कुश्ती का अभ्यास शुरू करवाया।
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इनकी मेहनत के दम पर गांव की छह बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांव की विशेष पहचान दिलाई। गांव नंगला की प्रियंका और भतेरी ने हाल ही में मिलिट्री पुलिस कोर (सीएमपी) में नियुक्ति पाई है। जबकि गांव की अन्य चार बेटियां रोहतक की कुश्ती अकादमी ने अभ्यास कर रही है।
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गांव नंगला की कुश्ती पहलवान 65 किलोग्राम भारवर्ग में प्रियंका व भतेरी, 53 किलोग्राम में पिंकी, 55 किलोग्राम में मंजू, 59 किलोग्राम में पुष्पा और 62 किलोग्राम में लक्ष्मी देश का प्रतिनिधित्व कर रही है।
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गांव नंगला निवासी रमेश ने बताया कि वह गांव में ही खेतीबाड़ी करता है। पहले वह पहलवानी करता था, मगर परिवार की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण उसने पहलवानी छोड़ दी। मगर उनके मन में मलाल था कि वह पहलवानी में गांव को विशेष पहचान कैसे दिलाएं।
करीब 10 साल पहले जब बलाली की फौगाट बहनें सुर्खियों में आईं तो उन्होंने भी अपनी बेटी प्रियंका और गांव की अन्य बेटियों को सरकारी स्कूल के मैदान में कुश्ती का अभ्यास शुरू करवाया। 10 साल की मेहनत के बाद प्रियंका, भतेरी, पिंकी, मंजू, पुष्पा व लक्ष्मी ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा दी।
रमेश ने बताया कि जब वे इन लड़कियों को अभ्यास करवाते थे तो लोग उन्हें तरह-तरह के ताने देते थे मगर उन्होंने अपने लक्ष्य को अटल रखा और आज उनके द्वारा प्रशिक्षित पहलवान सेना की तरफ से देश का प्रतिनिधित्व कर रही है। रमेश अब ट्रेनर बनकर गांव में लड़कियों का अभ्यास करवा रहे हैं। संवाद
चार बहनों में सबसे छोटी है प्रियंका
गांव नंगला निवासी प्रियंका (20) चार बहनों में सबसे छोटी है। जोकि 65 किलोभार वर्ग में कुश्ती पहलवान है। प्रियंका ने सब जूनियर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, एशियन जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप, गोल्ड मेडल, वर्ल्ड जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल सहित अनेक मेडल अपने नाम किए हैं। वह एमडीयू रोहतक से स्नातक की पढ़ाई कर रही है। जोकि फिलहाल महादेव कुश्ती अकादमी में अभ्यास कर रही है। प्रियंका की मां चंद्रकाल गृहिणी है। प्रियंका ने बताया कि वह अब सेना की ओर से खेल रही है। ओलंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतना ही उनका सपना है, जिसके लिए वे लगातार अभ्यास कर रही है।
भतेरी को देख बहनों ने भी शुरू की कुश्ती
गांव नंगला निवासी भतेरी (21) 65 किलोग्राम भार वर्ग की पहलवान है, जिन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में सेना की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। उनके नाम वर्ल्ड जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर सहित जूनियर, सीनियर, अंडर 21 कुश्ती चैंपियनशिप में पदक पहले से है। भतेरी के पिता ओमबीर गांव में ही खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि मां अनीता देवी गृहिणी है। भतेरी अपने परिवार से पहली कुश्ती खिलाड़ी थी, जिसके प्रदर्शन को देखकर छोटी बहनों ने भी कुश्ती में अपना भविष्य बनाने की ठानी। उसकी मौसी के बेटी पुष्पा भी कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय और लक्ष्मी राष्ट्रीय खिलाड़ी बन गई है। जबकि मौसी के बेटे कुलदीप ने कुछ समय पहले ही कुश्ती सीखनी शुरू की है। भतेरी स्नातक की पढ़ाई कर रही है, जोकि फिलहाल रोहतक की महादेव कुश्ती अकादमी में कोच देवेंद्र गुलिया व बिजेंद्र गुलिया के मार्गदर्शन में अभ्यास करती थी।