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हिमांशु ने ह्यूमिडिफायर का देसी जुगाड़ बनाया

Mon, 17 May 2021 01:04 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 01:04 AM IST
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covid- 19
मुश्किल समय में दिमाग विचलित होता है पर अगर जंग जीतने की जिद हो तो नए रास्ते भी खोलता है। कस्बे के हिमांशु भारद्वाज ने ऑक्सीजन गैस सिलिंडरों पर लगने वाले ह्यूमिडीफायर की कमी को दूर करने के लिए देशी जुगाड़ बना दिया। ह्यूमिडिफायर की कमी से एक कोने में लगे गैस सिलिंडर पल भर में मरीजों की सांसों का सहारा बन गए।
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बहल में 10 बेड का कोरोना आइसोलेशन सेंटर बनाने के बाद ऑक्सीजन लेवल कम आने वाले मरीजों के लिए 10 सिलिंडर भेजे थे लेकिन ह्यूमिडिफायर न होने से ये सिलिंडर काम में नहीं आ सके। ऐसे में चिकित्सकों के समक्ष यह समस्या थी कि इनका प्रयोग कैसे किया जाए। इस पर बहल पीएचसी के डॉ. अजय श्योराण ने कस्बे के इंजीनियर हिमांशु भारद्वाज के समक्ष यह समस्या रखी तो उसने एक ऑक्सीजन सिलिंडर अपने घर पर पहुंचाने के लिए कहा। सिलिंडर आने के बाद हिमांशु ने केवल 15 से 20 रुपये की लागत पर ऐसा देसी जुगाड़ कर दिया, जिससे सभी सिलिंडरों को आसानी से प्रयोग में लाया जा सके। हिमांशु द्वारा बनाए गए देशी ह्यूमिडिफायर के कामयाब होने पर अब चिकित्सकों ने उससे सभी सिलिंडरों के लिए यह जुगाड़ बनाने के लिए आग्रह किया है। हिमांशु ने कहा कि उसे इस बात में बड़ी खुशी होगी कि इस महामारी में उसकी थोड़ी सी मेहनत से किसी को चिकित्सीय सहायता मिल जाए।
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एक सिलिंडर में लग सकेंगे दो ऑक्सीजन मास्क
हिमांशु ने जो ह्यूमिडिफायर बनाए है उसमें एक और भी फायदा है। इसमें एक समय में एक सिलिंडर में दो मरीजों को ऑक्सीजन की सपोर्ट दी जा सकेगी। अन्यथा एक मरीज को देने की स्थिति में दूसरे वाल्व को बंद किया जा सकेगा जिससे ऑक्सीजन बेकार नहीं जाएगी। इसका प्रयोग भी बेहद आसान है और कहीं भी प्रयोग किया जा सकता है।
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सिलिंडर और ऑक्सीजन वाल्व के बीच लगता है ह्यूमिडिफायर
जब किसी मरीज का ऑक्सीजन लेवल कम आ जाता है तो उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। ऑक्सीजन सिलिंडर और ऑक्सीजन वाल्व के बीच एक ह्यूमिडिफायर नाम का ऐसा सिस्टम लगता है जिसमें ऑक्सीजन पानी के साथ मिलती है और फिर उसे मरीज को दिया जाता है। पानी में ऑक्सीजन मिलने के बाद वह प्यूरीफाई हो जाती है और फेफड़ों में किसी प्रकार का क्षय नहीं होता है। हिमांशु ने पिछले साल कोरोना काल में सेनिटाइजर इक्यूपमेंट बनाया था जो गेट पर लगाने से एक व्यक्ति महज कुछ मिनट में ही पूरी तरह से सैनिटाइज हो जाता है।

हमारे पास ऑक्सीजन सिलिंडर होने के बाद भी यह समस्या थी कि हमारे पास ह्यूमिडिफायर नहीं नहीं थे जिससे सिलिंडर का प्रयोग नहीं हो पा रहे थे। हिमांशु ने जो सिस्टम तैयार कर दिया है वो पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे हम आसानी से मरीजों को ऑक्सीजन देने में सक्षम है’
डॉ. अजय श्योराण, चिकित्साधिकारी, पीएचसी बहल।
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