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Bhiwani News: पांच साल बेहतर शिक्षा देने के लिए होते रहे दावे, लेकिन नहीं सुधरा व्यवस्थागत ढांचा

Thu, 26 Sep 2024 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 26 Sep 2024 02:52 AM IST
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Claims were made for providing better education for five years, but the systemic structure did not improve.
 गांव मुंढाल कलां का खस्ताहाल राजकीय स्कूल ।
भिवानी। सरकार की ओर से प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए पांच सालों में केवल हवाई दावे ही किए जाते रहे। लेकिन हकीकत इससे कोसों परे है। विधायकों से लेकर सरपंचों के कार्यकाल बदलते रहे, लेकिन स्कूलों के भवनों में कोई सुधार नहीं हुआ स्कूल भवनों को खंडहर घोषित होने के बाद भी नए भवन के लिए ग्रांट तक मंजूर नहीं की गई है।
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दरअसल, गांव मुंढाल कलां में बने प्राथमिक पाठशाला की हालात दयनीय स्थिति में है। इससे हर समय बच्चों के सिर पर खतरा मंडराता रहता है। मुंढाल कलां के राजकीय प्राथमिक पाठशाला को चार साल पहले कंडम घोषित करके तोड़ दिया गया था। इसके बाद इस स्कूल के बच्चों को इसी परिसर में बने राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला के भवन में शिफ्ट कर दिया।
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इस सत्र में यहां पर करीब 60 बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। लेकिन स्कूल की हालात दयनीय स्थिति में होने के कारण बच्चों पर खतरा बना रहता है। यहां पर लड़कियों के लिए अलग से शौचालय तक नहीं है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल की चहारदीवारी गिरने के कारण आवारा पशु अंदर घुसकर पेड़ पौधों को तोड़ देते है। वहीं स्कूल भवन के पीछे कंटीले झाड़ उगे हुए हैं। जहां पर बारिश के समय जहरीले जानवरों से बच्चों को खतरा बना रहता है।
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कई अभिभावकों ने तो स्कूल भवन जर्जर होने व यहां पर बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। एक भवन में दो स्कूल संचालित होने के बावजूद बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। ग्रामीण स्कूल की जर्जर हालात को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी स्कूल भवन निर्माण की गुहार लगा चुके हैं।
स्कूल ग्राउंड पक्का करने के लिए आई है ग्रांट
सरकार की ओर से पांच सालों में केवल स्कूल ग्राउंड को पक्का करने के लिए पांच लाख रुपये की राशि भेजी गई है। स्कूल ग्राउंड पक्का करने के अलावा अन्य सुविधाओं के लिए कोई बजट नहीं जारी किया गया है।
चार साल पहले सरकार की ओर से राजकीय प्राथमिक पाठशाला को कंडम घोषित किया गया था। लेकिन उसके बाद नया स्कूल भवन बनाने के लिए कोई सुध नहीं ली है। इसके कारण स्कूल में लगातार बच्चों की संख्या भी घट रही है। स्कूल भवन के लिए हम विभाग के अधिकारियों से भी मिल चुके हैं। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
- सोरण शर्मा।
राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला के भवन में दोनों स्कूलों के बच्चों की कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। लेकिन यह भवन भी खंडहर हो चुका है। इससे बच्चों का यहां पढ़ना खतरे से खाली नहीं है। किसी भी समय हादसा हो सकता है। लेकिन विभाग का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
- आशीष भारद्वाज।
स्कूल की चहारदीवारी गिर चुकी है। इसके कारण आवारा पशु स्कूल में घूमते रहते हैं। इसके कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता है। साथ ही आवारा पशु स्कूल में लगे पेड़ पौधों को भी तहस नहस कर रहे हैं। स्कूल भवन निर्माण की मांग के लिए हम काफी भी विभाग के समक्ष अपनी आवाज भी उठा चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
- संजय मास्टर।
सरकार की ओर से स्कूल के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। यहां पर स्कूल भवन से लेकर बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं तक की कमी बनी हुई है। सुविधाओं के अभाव के कारण स्कूल में हर साल बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन फिर भी सरकार की ओर से स्कूल भवन को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
- सतबीर शर्मा, पूर्व सरपंच।
मैं स्वयं काफी बार भवन कंडम होने के बारे में पंचायत व शिक्षा विभाग को अवगत करवा चुका हूं। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। सरकार की ओर से पांच साल में केवल स्कूल ग्राउंड को पक्का करने के लिए पांच लाख रुपये के अलावा कुछ नहीं भेजा गया है।

- बलजीत सिंह, मुख्य अध्यापक, राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला, मुंढाल कलां।
स्कूल भवन के निर्माण के लिए मैंने मेरे कार्यकाल में दो बार एस्टीमेट बनाकर फाइल मुख्यालय भेज चुका हूं। इसको मंजूरी नहीं मिली है। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की तरफ मेरा पूरा ध्यान है। मुख्यालय की तरफ से फाइल को मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
- विनोद कुमार, सरपंच मुंढाल कलां।
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