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नवजात मौत मामले में भिवानी तीसरे नंबर पर

Sun, 18 Oct 2015 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/भिवानी
अमर उजाला ब्यूरो/भिवानी Updated Sun, 18 Oct 2015 11:56 PM IST
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प्रदेश सरकार भले ही जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करे, मगर जमीनी हकीकत दावों से इतर है। नवजात बच्चों की मौत का आंकड़ा जो सामने आया है वह झकझोर देने वाला है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सूबे में हर रोज औसतन लगभग 42 नवजात बच्चों की मौत हो रही है। इस वर्ष के शुरूआती सात माह में ही 8862 बच्चे जन्म के कुछ समय बाद ही दम तोड़ चुके हैं।
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सबसे अधिक बच्चों की मौत मेवात में 841 है। भिवानी 619 बच्चों की मौत के साथ तीसरे स्थान पर है। अगर जच्चा की बात की जाए तो प्रदेशभर में अप्रैल से जुलाई माह के दौरान ही 159 महिलाओं ने दम तोड़ा। इनमें 16 महिलाओं की मौत भिवानी में हुई।
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प्रदेशभर में जच्चा-बच्चा की मौत के बढ़ने आंकड़े ने चिंता में डाल दिया है। जच्चा-बच्चा की बढ़ती मौतों के पीछे बड़ी वजह विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मानी जा रही है।

प्रदेशभर में महिला रोग विशेषज्ञ बहुत कम है। इसका सीधा असर जच्चा-बच्चा मृत्यु दर पर पड़ रहा है। देशभर में मातृ मृत्यु दर 167 है। हरियाणा में इससे बेहतर हालात है। यहां मृत्यु दर 127 है मगर भिवानी में हालात गंभीर है। भिवानी में मृत्यु दर 166 है। पिछले वर्ष 163 थी यानी तीन अंक की वृद्धि।

इस बारे में स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है और सभी चिकित्सा अधिकारियों, सिविल सर्जन की बैठक में इस पर मंथन किया। इसके बाद शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए कुछ फैसले लिए गए है। इनमें सबसे पहले स्टाफ को सही दिशा-निर्देश देने का निर्णय लिया है।

इसके तहत अब स्टाफ को प्रत्येक महिला का सेफ बर्थ चेकलिस्ट फार्म भरना होगा। इसमें चार प्वाइंट होंगे। इसके तहत जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के बाबत स्टाफ सदस्यों को जानकारी देनी होगी। सभी सरकारी अस्पताल, सीएचसी पर ये फार्म स्टाफ को भरने होंगे।
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ये है मौत के कारण
डिलीवरी के दौरान महिलाओं की मौत का मुख्य कारण खून की कमी या अधिक रक्त स्त्राव है। 70 फीसदी तक महिलाओं में खून की कमी मिल रही है। बच्चों की मौत का मुख्य कारण इंफेक्शन या प्री-मेच्योर होना है।
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नवजात शिशुओं को बचाने के लिए विशेष अभियान
* बीमार बच्चों को रेफर करने से पहले एंटीबायटिक इंजेक्शन जेंटामाइसिन लगेगा
* जन्म के 24 घंटे के अंदर बच्चे को विटामिन-के का इंजेक्शन लगेगा
* बच्चे को इंफेक्शन से बचाने के लिए डेक्सामिथासोन एएमसी कोरटीको स्टेराइड लगेगा
* बच्चे को हर हाल में मां का ही दूध पिलाया जाएगा
* कंगारु मदर केयर सिस्टम के तहत बच्चे को मां के साथ स्किन टू स्किन रखा जाएगा।
*  कम वजनी बच्चों को भी मां का दूध पिलाने की व्यवस्था की जाएगी।


जच्चा को बचाने के लिए होंगे ये प्रयास
* डिलीवरी के एक मिनट के अंदर ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन लगाया जाएगा
* मिसोप्रोस्ट टेबलेट दी जाएगी
* रक्त की कमी के लिए टेबलेट शुरूआत से दी जाएगी
* डिलीवरी के दौरान भी रिजर्व में रक्त बैग रखे जाएंगे
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ये है शिशु मृत्यु दर (जुलाई तक)
जिला                    मृत्यु
मेवात                    841
हिसार                    621
भिवानी                619
फरीदाबाद                617
करनाल                570
पलवल                564
रोहतक                    437
कैथल                    431
फतेहाबाद                423
पानीपत                411
जींद                    403
गुड़गांव                389
सोनीपत                362
सिरसा                    361
झज्जर                    341
यमुनानगर                292
रेवाड़ी                    288
महेंद्रगढ़                274
कुरुक्षेत्र                264
अंबाला                242
पंचकूला                112
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मातृ मृत्यु अप्रैल से जुलाई माह
जिला                    मृत्यु
मेवात                    17
भिवानी                16
फरीदाबाद                13
गुडग़ांव                12
सोनीपत                11
हिसार                    08
रेवाड़ी                    08
फतेहाबाद                08
पलवल                07
जींद                    06
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वर्जन::
शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर बढ़ी है। अब इस बारे में कोई निर्णय लिए गए है ताकि जच्चा-बच्चा को सुरक्षा प्रदान की जा सके। इसमें बच्चों को जन्म के बाद इंफेक्शन से बचाने के लिए इंजेक्शन लगाना आदि शामिल है। - डा. रणदीप पूनिया, सिविल सर्जन

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वर्जन:::
शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया है। स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया जा रहा है। अब स्टाफ को सेफ बर्थ चेकलिस्ट फार्म भी भरना होगा। इसमें गर्भवती महिला के रजिस्ट्रेशन से डिलीवरी और डिस्चार्ज तक की जानकारी लिखी जाएगी। - डा. मनीष पचार, डिप्टी सिविल सर्जन
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