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बहल डिस्ट्रीब्यूटरी में दरार, फसल जलमग्र
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Sun, 29 Nov 2015 12:58 AM IST
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बहल। शुक्रवार रात को गरवां गांव के बस स्टैंड से सुरपुरा खुर्द रोड पर बहल डिस्ट्रीब्यूटरी में दरार पड़ गई। इस कारण नहर किनारे करीब 40 एकड़ में खड़ी फसल जलमग्न हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि खेत में फसलों की जगह दूर दूर तक पानी ही पानी नजर आ रहा था। नहर का पानी बहल-झुप्पा रोड पर भी करीब पांच किमी तक भर गया, जिससे वाहनों के आवागमन में बाधा हुई। नहर टूटने के क्या कारण रहे, इस पर किसानों तथा नहर विभाग द्वारा अलग अलग कारण बताए जा रहे हैं।
शनिवार सुबह जब सुरपुरा खुर्द गांव के किसान अपने खेतों में गए तो पैरों तले की जमीन खिसक गई। उनको खेत में सरसों व गेहूं की फसल की जगह हर ओर पानी ही पानी नजर आया। किसानों के अनुसार, वे रात को खेत से करीब नौ बजे गए थे, तब सब ठीक था। लेकिन, सुबह सब कुछ तबाह हुआ मिला। जुई कनाल की बहल डिस्ट्रीब्यूटरी में क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण नहर रात के करीब एक से दो बजे के बीच टूटी है। किसानों ने आरोप लगाया कि विभाग के कर्मचारियों को सूचना दिए जाने के बाद भी पानी कई देर तक बंद नहीं किया गया। नहर विभाग की लापरवाही के कारण उनको लगातार दूसरी बार फसल का नुकसान झेलना पड़ा है। इससे पहले करीब दो महीने पहले नहर टूटी थी। किसानों ने बताया कि नहर टूटने से किसान सुरेंद्र की दस एकड़, महीपाल की पांच एकड़, बिजेंद्र की चार एकड़, महाबीर की तीन एकड़, बलवान की दो एकड़, मुकेश की दो एकड़, प्रताप व वेदप्रकाश की दो-दो एकड़, मांगेराम की तीन एकड़, गुगन की चार एकड़, महेंद्र की दो एकड़, जयचंद की तीन एकड़ तथा धर्मपाल की एक एकड़ फसल खराब हुई है। किसानों ने प्रशासन से उचित मुआवजे और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
नहर कैसे टूटी, दावे अलग-अलग
किसानों के मुताबिक नहर में पानी की क्षमता 70 क्यूसिक की है जबकि इसमें घटना के समय 90 क्यूसिक पानी चल रहा था। इसके अलावा क्रॉसिंग के नीचे नाले की सफाई नहीं होने के कारण नहर पर बढ़ा पानी का दबाव नहर टूटने का कारण बना है। उधर नहर विभाग का कहना है कि नहर की क्षमता मात्र 38 क्यूसिक पानी की है। नहर पानी ओवरफ्लो होने की वजह से नहीं वरन नहर की तलहटी में पेड़ की जड़ के कारण मिट्टी खोखरी हुई है जिससे नहर टूटी है। उन्होंने बताया कि नहर में पानी की क्षमता के अनुसार मोटरें चल रही थी। नहर टूटने की सूचना मिलते ही पानी बंद करवा दिया था।
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वर्जन:::::::
नहर किनारे खड़े पेड़ की जड़ों में मिट्टी का कटाव होने के कारण नहर से पानी का बहाव खेत की ओर हो गया इस कारण नहर टूटी है। नहर में पानी क्षमता के हिसाब से ही चल रहा था इस कारण ओवरलो होने का सवाल ही नहीं है। सूचना मिलते ही पानी बंद करवा दिया था।
प्रदीप, जेई, नहर विभाग।
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शनिवार सुबह जब सुरपुरा खुर्द गांव के किसान अपने खेतों में गए तो पैरों तले की जमीन खिसक गई। उनको खेत में सरसों व गेहूं की फसल की जगह हर ओर पानी ही पानी नजर आया। किसानों के अनुसार, वे रात को खेत से करीब नौ बजे गए थे, तब सब ठीक था। लेकिन, सुबह सब कुछ तबाह हुआ मिला। जुई कनाल की बहल डिस्ट्रीब्यूटरी में क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण नहर रात के करीब एक से दो बजे के बीच टूटी है। किसानों ने आरोप लगाया कि विभाग के कर्मचारियों को सूचना दिए जाने के बाद भी पानी कई देर तक बंद नहीं किया गया। नहर विभाग की लापरवाही के कारण उनको लगातार दूसरी बार फसल का नुकसान झेलना पड़ा है। इससे पहले करीब दो महीने पहले नहर टूटी थी। किसानों ने बताया कि नहर टूटने से किसान सुरेंद्र की दस एकड़, महीपाल की पांच एकड़, बिजेंद्र की चार एकड़, महाबीर की तीन एकड़, बलवान की दो एकड़, मुकेश की दो एकड़, प्रताप व वेदप्रकाश की दो-दो एकड़, मांगेराम की तीन एकड़, गुगन की चार एकड़, महेंद्र की दो एकड़, जयचंद की तीन एकड़ तथा धर्मपाल की एक एकड़ फसल खराब हुई है। किसानों ने प्रशासन से उचित मुआवजे और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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नहर कैसे टूटी, दावे अलग-अलग
किसानों के मुताबिक नहर में पानी की क्षमता 70 क्यूसिक की है जबकि इसमें घटना के समय 90 क्यूसिक पानी चल रहा था। इसके अलावा क्रॉसिंग के नीचे नाले की सफाई नहीं होने के कारण नहर पर बढ़ा पानी का दबाव नहर टूटने का कारण बना है। उधर नहर विभाग का कहना है कि नहर की क्षमता मात्र 38 क्यूसिक पानी की है। नहर पानी ओवरफ्लो होने की वजह से नहीं वरन नहर की तलहटी में पेड़ की जड़ के कारण मिट्टी खोखरी हुई है जिससे नहर टूटी है। उन्होंने बताया कि नहर में पानी की क्षमता के अनुसार मोटरें चल रही थी। नहर टूटने की सूचना मिलते ही पानी बंद करवा दिया था।
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नहर किनारे खड़े पेड़ की जड़ों में मिट्टी का कटाव होने के कारण नहर से पानी का बहाव खेत की ओर हो गया इस कारण नहर टूटी है। नहर में पानी क्षमता के हिसाब से ही चल रहा था इस कारण ओवरलो होने का सवाल ही नहीं है। सूचना मिलते ही पानी बंद करवा दिया था।
प्रदीप, जेई, नहर विभाग।
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