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आयुष्मान- जिले के ढाई लाख गरीबों में सिर्फ 48 हजार को आयुष्मान
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भिवानी। सोशल इकोनामिक कास्ट सेंसेक्स 2011 के आंकड़ों के आधार पर भिवानी जिले के करीब ढाई लाख गरीब परिवारों में से सिर्फ 48 हजार परिवारों को आयुष्मान योजना का लाभ मिला है। इतना ही नहीं करीब 17 हजार गरीब परिवारों को इस योजना का लाभ सिर्फ इसलिए नहीं मिला कि उनके नाम, सदस्यों के नाम या फिर आधार कार्ड लिंक नहीं होने जैसी खामियां बाकी हैं। ऐसे में अब इन परिवारों को इस योजना से जोड़ने के लिए फिर से कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू जाएगी। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक सरकारी अस्पतालों में 223 लोगों ने बीमारी के चलते आपरेशन कराएं हैं। योजना के तहत जिले में 61 हजार के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं।
शहर के 11 निजी अस्पताल भी आयुष्मान योजना के पैनल से जोड़े गए हैं। मगर अधिकांश अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का काम इधर-उधर से ही चल रहा है। कोई भी मरीज प्राइवेट अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत आपरेशन के लिए दाखिल होता है तो दूसरे अस्पताल से विजिट पर विशेषज्ञ चिकित्सक को बुलाकर उसका उपचार दिलाया जा रहा है। सबसे अहम बात तो यह है कि आयुष्मान योजना का प्रचार घर-घर किया गया, मगर फिर भी इस योजना के अभियान को रफ्तार नहीं मिली। जिला रोजगार कार्यालय से सक्षम युवाओं को डोर टू डोर आयुषमान योजना की प्रचार सामग्री बांटने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी और गांव की चौपाल में भी आयुष्मान योजना पर चर्चा का मसौदा तैयार किया गया। इस पर विभाग ने लाखों का बजट भी खर्च किया, मगर फिर भी लोगों की सेहत सुधारने की इस मुहिम की लोगों तक जागरूकता आज भी कम ही है। लोगों को तो ठीक से यह तक मालूम नहीं है कि पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज योजना में ऑपरेशन के बाद कोई पैसा नहीं मिलता है, बल्कि उसे इलाज ही मुफ्त मिलता है, मगर कुछ लोग बीमारी का इलाज कराने के बाद उसके पैसे लेने के लिए भी दौड़ धूप करने में जुटे हैं। ऐसा जागरूकता के अभाव मेें हुआ है।
23 सितंबर को आयुष्मान योजना की पहली वर्षगांठ
गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज पाने की कैशलेस योजना आयुष्मान की पहली वर्षगांठ 23 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन जिला स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। योजना को बेहतर बनाने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
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इन निजी अस्पतालों ने किया है अब तक योजना में क्लेम
शहर के जेबी गुप्ता अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत करीबन दो लाख का क्लेम किया है। जबकि जांगड़ा अस्पताल ने 50 हजार रुपये का क्लेम भेजा है। चुघ अस्पताल ने करीबन एक लाख का क्लेम किया है। सिवानी के एकेएम अस्पताल ने करीबन दो लाख रुपये का क्लेम इस योजना के तहत किया है।
पैनल के अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सक जरूरी
किसी भी पैनल के अस्पताल में आयुष योजना का लाभ लेने से पहले उसमें विशेषज्ञ चिकित्सक का होना जरूरी है। क्योंकि अलग-अलग अस्पतालों को अलग अलग बीमारियों के लिए ही पैनल पर लिया गया है। जबकि अधिकांश सरकारी पैनल के अस्पतालों में तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक नहीें है। यही हाल प्राइवेट अस्पतालों का भी है। जिसमें स्पेशलिस्ट डॉक्टर ऑप्रेशन के समय बाहर से ही आते हैं।
सोशल इकोनामिक कास्ट सेंसेक्स के अनुसार आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले सभी परिवारों को कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कुछ परिवार नॉन आधार पाए गए हैं। इनमें कई अन्य त्रुटियां भी मिली हैं, जिनके दोबारा कार्ड बनेंगे। पैनल पर लिए गए सभी निजी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हैं। योजना के प्रति जरूरतमंद परिवारों को भी जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ संदीप कुमार, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।
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अब तक भिवानी जिले में 223 आपरेशन सरकारी अस्पतालों में किए जा चुके हैं, जबकि 14 लाख रुपये का क्लेम आ चुका है। इस योजना के तहत प्राइवेट अस्पतालों में भी 90 हजार रुपये तक के स्टंट भी डाले जा रहे है। 148 योजना से जुड़े परिवार प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज पा चुके हैं। जबकि करीबन 61 हजार गोल्डन कार्ड आयुष्मान भारत योजना के तहत बन चुके हैं। पीएम मोदी की इस योजना का प्रचार प्रसार के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
-डॉ आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन भिवानी।
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शहर के 11 निजी अस्पताल भी आयुष्मान योजना के पैनल से जोड़े गए हैं। मगर अधिकांश अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का काम इधर-उधर से ही चल रहा है। कोई भी मरीज प्राइवेट अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत आपरेशन के लिए दाखिल होता है तो दूसरे अस्पताल से विजिट पर विशेषज्ञ चिकित्सक को बुलाकर उसका उपचार दिलाया जा रहा है। सबसे अहम बात तो यह है कि आयुष्मान योजना का प्रचार घर-घर किया गया, मगर फिर भी इस योजना के अभियान को रफ्तार नहीं मिली। जिला रोजगार कार्यालय से सक्षम युवाओं को डोर टू डोर आयुषमान योजना की प्रचार सामग्री बांटने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी और गांव की चौपाल में भी आयुष्मान योजना पर चर्चा का मसौदा तैयार किया गया। इस पर विभाग ने लाखों का बजट भी खर्च किया, मगर फिर भी लोगों की सेहत सुधारने की इस मुहिम की लोगों तक जागरूकता आज भी कम ही है। लोगों को तो ठीक से यह तक मालूम नहीं है कि पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज योजना में ऑपरेशन के बाद कोई पैसा नहीं मिलता है, बल्कि उसे इलाज ही मुफ्त मिलता है, मगर कुछ लोग बीमारी का इलाज कराने के बाद उसके पैसे लेने के लिए भी दौड़ धूप करने में जुटे हैं। ऐसा जागरूकता के अभाव मेें हुआ है।
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23 सितंबर को आयुष्मान योजना की पहली वर्षगांठ
गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज पाने की कैशलेस योजना आयुष्मान की पहली वर्षगांठ 23 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन जिला स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। योजना को बेहतर बनाने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
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इन निजी अस्पतालों ने किया है अब तक योजना में क्लेम
शहर के जेबी गुप्ता अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत करीबन दो लाख का क्लेम किया है। जबकि जांगड़ा अस्पताल ने 50 हजार रुपये का क्लेम भेजा है। चुघ अस्पताल ने करीबन एक लाख का क्लेम किया है। सिवानी के एकेएम अस्पताल ने करीबन दो लाख रुपये का क्लेम इस योजना के तहत किया है।
पैनल के अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सक जरूरी
किसी भी पैनल के अस्पताल में आयुष योजना का लाभ लेने से पहले उसमें विशेषज्ञ चिकित्सक का होना जरूरी है। क्योंकि अलग-अलग अस्पतालों को अलग अलग बीमारियों के लिए ही पैनल पर लिया गया है। जबकि अधिकांश सरकारी पैनल के अस्पतालों में तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक नहीें है। यही हाल प्राइवेट अस्पतालों का भी है। जिसमें स्पेशलिस्ट डॉक्टर ऑप्रेशन के समय बाहर से ही आते हैं।
सोशल इकोनामिक कास्ट सेंसेक्स के अनुसार आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले सभी परिवारों को कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कुछ परिवार नॉन आधार पाए गए हैं। इनमें कई अन्य त्रुटियां भी मिली हैं, जिनके दोबारा कार्ड बनेंगे। पैनल पर लिए गए सभी निजी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हैं। योजना के प्रति जरूरतमंद परिवारों को भी जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ संदीप कुमार, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।
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अब तक भिवानी जिले में 223 आपरेशन सरकारी अस्पतालों में किए जा चुके हैं, जबकि 14 लाख रुपये का क्लेम आ चुका है। इस योजना के तहत प्राइवेट अस्पतालों में भी 90 हजार रुपये तक के स्टंट भी डाले जा रहे है। 148 योजना से जुड़े परिवार प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज पा चुके हैं। जबकि करीबन 61 हजार गोल्डन कार्ड आयुष्मान भारत योजना के तहत बन चुके हैं। पीएम मोदी की इस योजना का प्रचार प्रसार के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
-डॉ आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन भिवानी।