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Bhiwani News: बदलते मौसम में बढ़ीं दमे के मरीजों की मुश्किलें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 01:35 AM IST
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Asthma patients face increased difficulties with the changing weather
भिवानी। अक्तूबर के अंतिम दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव और सुबह-शाम की ठंडी हवाओं के कारण सांस, दमा और नजला-जुकाम से पीड़ित मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। बदलते मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और पुराने श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि ठंडी हवा और प्रदूषण सांस की तकलीफ बढ़ा सकते हैं।
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मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतिन गुप्ता के अनुसार, तापमान में गिरावट और ठंडी हवा श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। सुबह के समय हवा में मौजूद नमी और प्रदूषक कणों के कारण सांस संबंधी परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है। दमा के मरीजों में श्वास नलियां सिकुड़ने से सीने में जकड़न, सांस फूलना, लगातार खांसी और बेचैनी जैसे लक्षण उभर सकते हैं। ऐसे मरीजों को ठंडी हवा और प्रदूषण के सीधे संपर्क से बचना चाहिए।
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बदलते मौसम में बच्चे और बुजुर्ग अधिक संवेदनशील होते हैं। बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण श्वसन संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अस्थमा या बार-बार जुकाम से परेशान बच्चों की विशेष देखभाल जरूरी है। इस मौसम में वायरल संक्रमण भी फैल सकता है जिससे सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ने के साथ कुछ लोगों में गंभीर लक्षण भी उभर सकते हैं।
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अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ने लगे मरीज
नागरिक अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में इन दिनों सांस और एलर्जी से जुड़ी शिकायतों के मरीज बढ़ने लगे हैं। ओपीडी में दमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और पुरानी एलर्जी या नजले से पीड़ित युवा पहुंच रहे हैं। तापमान में बदलाव और शुष्क मौसम से गले में खराश, नाक बंद होने और लगातार छींक आने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

ऐसे करें बचाव
घर से बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। सुबह की ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बचें।
ठंडी हवा और प्रदूषण से बचाव के लिए बाहर जाते समय नाक और मुंह को अच्छी तरह ढकने वाला मास्क पहनें। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखें।
पर्याप्त पानी पिएं। गुनगुना पानी गले को आराम दे सकता है, लेकिन ठंडी चीजों से परहेज करना हर मरीज के लिए जरूरी नहीं है। अपनी परेशानी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से बचें और संतुलित आहार लें।
दमा और सांस के पुराने मरीज निर्धारित दवाएं समय पर लें और चिकित्सक के निर्देशानुसार इन्हेलर साथ रखें। बिना सलाह दवा बंद न करें और न ही उसकी मात्रा बदलें।

सांस लेने में अधिक तकलीफ, सीने में दर्द या भारीपन होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। गंभीर सांस की परेशानी में आपातकालीन उपचार कराएं और खुद से दवा लेने से बचें।
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