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Bhiwani News: सेना जवान विजयंत ने शादी से पहले लग्न टीका में मिले 21 लाख लौटाए
Tue, 10 Dec 2024 01:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 10 Dec 2024 01:31 PM IST
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अपने लग्न टीका में शगुन राशि वापस करते विजयंत तंवर।
भिवानी। दहेज का दानव न जाने कितने ही वैवाहिक रिश्तों में खटास का जहर घोलकर जिंदगियां बर्बाद कर डालता है, लेकिन समाज में कुछ युवा ऐसा उदाहरण भी बन रहे हैं, जिनकी बदौलत दहेज रूपी बुराई को ही खत्म किया जा सकता है। जिले के गांव तिगड़ाना में भारतीय सेना में सिपाही विजयंत तंवर का सोमवार को शादी से एक दिन पहले लग्न-टीका आया। जिसमें उसकी ससुराल वालों ने उसे दहेज में 21 लाख रुपये नकद दिए। विजयंत और उसके पिता ने ये राशि सम्मानपूर्वक वापस लौटा दी। इससे पहले भात में मिले 51 हजार रुपये भी विजयंत का परिवार लौटा चुका था।
दरअसल गांव तिगड़ाना निवासी सेना से सेवानिवृत्त हवलदार मुकेश कुमार फौजी के इकलौते बेटी की शादी मंगलवार को खरककलां निवासी पूर्व सरपंच अनिल की बेटी नंदिनी के साथ तय हुई है। बारात जाने से ठीक एक दिन पहले सोमवार को विजयंत तंवर का लग्न टीका गांव में आया। जिसमें ससुराल पक्ष से 21 लाख रुपये नकद और अन्य सामान भी दिया गया। लग्न टीका में विजयंत और उसके पिता मुकेश ने सिर्फ एक रुपया नारियल के साथ रिश्ता स्वीकार किया और दहेज में दी जाने वाली पूरी रकम लौटा दी। जिससे गांव के सभी मौजिज लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया।
विजयंत के परदादा जसवंत सिंह तंवर भी भारतीय सेना से रिसलदार सेवानिवृत्त हैं। जबकि उसके पिता मुकेश भी सेना से ही हवलदार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। भारतीय सेना में तीसरी पीढ़ी से सेवा कर रहे विजयंत का कहना है कि बिना दहेज के शादी करना उसका सपना रहा है। वह दहेज लेकर अपने शादी जैसे पवित्र रिश्ते की शुरुआत नहीं करना चाहता है। उसने अन्य युवाओं से भी दहेज बिना शादी करने की अपील की है। विजयंत की मंगलवार को गांव खरककलां में बारात जाएगी।
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दरअसल गांव तिगड़ाना निवासी सेना से सेवानिवृत्त हवलदार मुकेश कुमार फौजी के इकलौते बेटी की शादी मंगलवार को खरककलां निवासी पूर्व सरपंच अनिल की बेटी नंदिनी के साथ तय हुई है। बारात जाने से ठीक एक दिन पहले सोमवार को विजयंत तंवर का लग्न टीका गांव में आया। जिसमें ससुराल पक्ष से 21 लाख रुपये नकद और अन्य सामान भी दिया गया। लग्न टीका में विजयंत और उसके पिता मुकेश ने सिर्फ एक रुपया नारियल के साथ रिश्ता स्वीकार किया और दहेज में दी जाने वाली पूरी रकम लौटा दी। जिससे गांव के सभी मौजिज लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया।
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विजयंत के परदादा जसवंत सिंह तंवर भी भारतीय सेना से रिसलदार सेवानिवृत्त हैं। जबकि उसके पिता मुकेश भी सेना से ही हवलदार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। भारतीय सेना में तीसरी पीढ़ी से सेवा कर रहे विजयंत का कहना है कि बिना दहेज के शादी करना उसका सपना रहा है। वह दहेज लेकर अपने शादी जैसे पवित्र रिश्ते की शुरुआत नहीं करना चाहता है। उसने अन्य युवाओं से भी दहेज बिना शादी करने की अपील की है। विजयंत की मंगलवार को गांव खरककलां में बारात जाएगी।
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