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95 साल पुरानी टीआईटी मिल पर लगा ताला
भिवानी
Updated Thu, 21 Aug 2014 12:18 AM IST
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हरियाणा की सबसे पुरानी टेक्सटाइल मिल टीआईटी को लगातार हो रहे बड़े घाटे के कारण बंद कर दिया गया है। मिल के दोनों गेटों पर ताले लग गए हैं और मिल बंद करते हुए कार्य निलंबन की नोटिस चस्पा कर दी गई है। मिल के अंदर किसी के प्रवेश पर भी पाबंदी लग गई है।
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वर्ष 1943 में स्थापित टीआईटी मिल के बंद होने से 300 से अधिक मजदूर परिवारों की आजीविका का सहारा छिन गया है। दशकों से मिल में नौकरी कर रहे मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को मिल पर नोटिस चस्पा होने से हैरान मजदूरों ने आक्रोश भी जताया। अब वह मिल प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में जाने की भी तैयारी कर रहे हैं।
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आजादी के पहले स्थापित टीआईटी मिल के संचालन को लेकर पिछले कुछ वर्षों से दिक्कतें उत्पन्न हो रही थी। मजदूरों का समय से वेतन न मिलना सहित अन्य शिकायतें लगातार बढ़ रही थी। मिल प्रबंधन ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि मिल घाटे में चल रही है, बावजूद इसका संचालन किया जा रहा है।
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जैसे-तैसे चल रहे मिल पर मंगलवार की देर शाम अचानक ताला लगा दिया गया और गेट पर ‘कार्य निलंबन’ की नोटिस चस्पा कर दी गई। अगली शिफ्ट में मजदूरों ने नोटिस देखा तो मानों उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मिल प्रबंधन के इस फैसले पर शोर-गुल मचाते हुए विरोध भी जताया।
कर्मचारियों ने प्रबंधन से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन कोई वार्ता नहीं हो पाई। बुधवार की देर शाम तक वह इसी आस में मिल के आसपास जमे रहे कि शायद प्रबंधन अपना फैसला वापस ले ले। उधर, दूसरी ओर गेट पर नोटिस चस्पा होने के बाद मिल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने भी पूरी तरह मौन साध लिया है। सोसायटी का फैसला बताते हुए कुछ भी कहने से बचते रहे।
सैकड़ों मजदूरों का छिना सहारा
टीआईटी मिल में तीन सौ से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। मिल बंद होने से उनके परिवार की आजीविका का सहारा ही छिन गया है। कई मजदूर 40-45 वर्ष से जुड़े हुए थे। मिल बंद होने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें। पूरे दिन उनके घरों में मायूसी छाई रही। अनेक मजदूर तो ऐसे है जो करीब 60 वर्ष की उम्र के आसपास के है और कुछ कार्य करना उनके लिए संभव नहीं। करीब 40 फीसदी मजदूर ऐसे है जो पिछले करीब 40 से 45 वर्षों से कार्य कर रहे है। अब मजदूरों के सामने भी रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है।
क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा
बार-बार गेट पर लगे नोटिस को पढ़ने आ रहे एक मजदूर राम सिंह ने बताया कि वर्षाें से यहां नौकरी कर रहे थे, अब एकदम बंद कर दिया है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें, कहां जाएं। बच्चों का पेट कैसे पालेंगे। ऐसा ही कुछ अन्य मजदूराें लक्ष्मण, बुद्धदेव, रामानंद, दयानंद आदि ने बताया।
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मिल बंद होने के लिए यह दी गई दलील
* मिल के मुख्य गेट पर चस्पाए गए नोटिस में बताया गया है कि सोसायटी अपने नियंत्रण से बाहरी कारणों को लेकर सोसायटी टेक्सटाइल मिल को आगे चलाने में असमर्थ है।
* पिछले कई वर्षों से कंपनी उत्पाद बेचने में असमर्थ थी, जिसके कारण उसने दूसरे मिल के जॉब वर्क शुरू किया। मगर दूसरे मिल ने इसका अनुचित लाभ उठाया।
* जॉब वर्क की आमदनी से मिल के लाभ और फिक्स कॉस्ट तो दूर वैरिएबल कास्ट भी नहीं निकल पाता था।
* मिल के प्रति श्रमिकों का रवैया उत्साहवर्द्धक नहीं रहा।
* महंगाई भत्ते, बिजली बिलों का खर्च लगातार बढ़ने से बढ़ता गया घाटा।
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नोटिस में यह भी
* सुरक्षा कर्मचारियों और अति आवश्यक सेवाओं पर कार्यरत कर्मचारियों पर कार्य निलंबन लागू नहीं होगा।
* जब तक मिल में कार्य निलंबन रहेगा तब तक श्रमिकों को दिया जाने वाला वेतन भी निलंबित रहेगा।
* किसी भी श्रमिक को मिल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
* टीआईटीएस के बच्चों के भविष्य का ध्यान रखेगी सोसायटी।