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पटाखों पर बैन के बावजूद बढ़ा प्रदूषण स्तर
Updated Sat, 21 Oct 2017 12:38 AM IST
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भिवानी। न्यायालय के पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद दीपावली के दिन शहर का प्रदूषण का स्तर एकाएक बढ़ गया। सेहत के लिहाज सबसे खतरनाक माने जाने वाले पीएम (पार्टिकल मैटर) 2.5 क्यूबिक मीटर आकार के कणों की मात्रा हवा में खतरनाक स्तर से 43 क्यूबिक मीटर ज्यादा पाई गई। भिवानी सिटी की तुलना में चरखी दादरी शहर का प्रदूषण का स्तर दीपावली से पहले भी ज्यादा रहा और दीपावली के दिन भी।
राज्य प्रदूषण बोर्ड ने दीपावली से पहले यानी 12 अक्तूबर और दिवाली के दिन (19 अक्तूबर) को पूरे राज्य की आबोहवा की गुणवत्ता के आंकड़े एकत्र किए। बोर्ड ने हवा में पाए जाने वाले दोनों तरह के कण (अति सूक्ष्म व इससे बड़े) की मात्रा को रिकॉर्ड किया गया। 2.5 क्यूबिक मीटर या इससे कम आकार के कणों को अति सूक्ष्म कण यानी पार्टिकल मैटर (पीएम) कहा जाता है और बड़े आकार के कणों को 10 क्यूबिक मीटर या इससे आकार के कणों को पीएम-10 की श्रेणी में रखा जाता है।
गत 12 अक्तूबर को भिवानी सिटी की आबोहवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा 203 क्यूबिक मीटर पाई गई। यह स्तर 200 क्यूबिक मीटर से कम होना चाहिए। यानी, 12 तारीख को सूक्ष्म कणों की मात्रा सामान्य कुछ अधिक पाई गई। दीपावली के दिन सूक्ष्म व अति सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़कर 246 क्यूबिक मीटर पहुंच गई।
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पीएम-10 क्यूबिक मीटर की श्रेणी की बात करें तो 12 अक्तूबर को शहर की स्थिति कोई ज्यादा अच्छी नहीं थी। उस दिन हवा में कणों की मात्रा 127 क्यूबिक मीटर रही और दीपावली के दिन यह मात्रा आश्चर्यजनक रूप से कम होकर 109 के स्तर पर पहुंच गई। पीएम-10 का स्तर 125 से कम होना चाहिए।
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भिवानी से ज्यादा प्रदूषित चरखी दादरी
दीपावली से पहले और बाद में भिवानी सिटी से ज्यादा प्रदूषित चरखी दादरी रही। 12 अक्तूबर को चरखी दादरी सिटी में पीएम 2.5 श्रेणी का स्तर 258 क्यूबिक मीटर नोट किया गया। जबकि, दीपावली के दिन यह बढ़कर 268 क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। यहां नोट करने वाली बात यह है कि दिवाली से पहले और दीपावली के दिन के आंकड़े पर गौर करें तो दादरी का स्तर 258 से 268 पर पहुंचा। यानी, 10 क्यूबिक मीटर की वृद्धि। जबकि, भिवानी सिटी में यह बढ़ोतरी 43 क्यूबिक मीटर रही। पीएम 10 श्रेणी का प्रदूषण दीपावली से एक सप्ताह पहले 118 क्यूबिक मीटर था, जो दिवाली के दिन 132 हो गया। इस श्रेणी में भी चरखी दादरी में भिवानी की तुलना में ज्यादा प्रदूषण है।
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पीएम 2.5 क्यूबिक मीटर आकार के कणों की मात्रा दीपावली के दिन बढ़ गई। दीपावली से एक सप्ताह पहले भिवानी की हवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा 203 थी, जो दिवाली के दिन बढ़कर 246 हो गई। दादरी में पहले यह आंकड़ा 258 क्यूबिक मीटर था और दीपावली के दिन बढ़कर 268 हो गया। दीपावली के दिन दोनों शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। प्रदूषण बढ़ने के और भी कारण हो सकते हैं। माइनिंग से लेकर वाहनों का धुआं भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा सकता है।
- विनय गिल, एसडीओ, राज्य प्रदूषण बोर्ड
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मानव की सेहत पर क्या होगा असर
2.5 क्यूबिक मीटर आकार के कण सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डा. शिवकांत बताते हैं कि इस आकार के कण हवा में तैरते रहते हैं। सांस के माध्यम से सीधे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और स्वस्थ आदमी को भी सांस लेने में तकलीफ से लेकर सांस की नली में सिकुड़न समेत कई तरह की परेशानी हो जाती है। प्रभावित व्यक्ति यदि तुरंत इलाज न ले तो ब्रोंकाइटिस तक हो सकता है। यदि दमा के रोगी के शरीर में ये कण पहुंच जाते हैं तो बीमारी विकराल रूप भी ले सकती है। दिल पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण की चपेट में आने वाले लोगों को चाहिए कि वे घर के अंदर ही रहें। बाहर निकलना भी पड़े तो मास्क पहनकर निकलें। इसका बचाव ही एकमात्र उपाय है।
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सप्ताहभर लगता है स्थिति नार्मल होने में
एक बार हवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा बढ़ती है तो स्थिति सामान्य होने में सप्ताह-10 दिन लग जाते हैं। डा. शिवकांत का कहना है कि आबोहवा सुधरने में कम से कम 6-7 दिन तो लगते हैं।
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राज्य प्रदूषण बोर्ड ने दीपावली से पहले यानी 12 अक्तूबर और दिवाली के दिन (19 अक्तूबर) को पूरे राज्य की आबोहवा की गुणवत्ता के आंकड़े एकत्र किए। बोर्ड ने हवा में पाए जाने वाले दोनों तरह के कण (अति सूक्ष्म व इससे बड़े) की मात्रा को रिकॉर्ड किया गया। 2.5 क्यूबिक मीटर या इससे कम आकार के कणों को अति सूक्ष्म कण यानी पार्टिकल मैटर (पीएम) कहा जाता है और बड़े आकार के कणों को 10 क्यूबिक मीटर या इससे आकार के कणों को पीएम-10 की श्रेणी में रखा जाता है।
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गत 12 अक्तूबर को भिवानी सिटी की आबोहवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा 203 क्यूबिक मीटर पाई गई। यह स्तर 200 क्यूबिक मीटर से कम होना चाहिए। यानी, 12 तारीख को सूक्ष्म कणों की मात्रा सामान्य कुछ अधिक पाई गई। दीपावली के दिन सूक्ष्म व अति सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़कर 246 क्यूबिक मीटर पहुंच गई।
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पीएम-10 क्यूबिक मीटर की श्रेणी की बात करें तो 12 अक्तूबर को शहर की स्थिति कोई ज्यादा अच्छी नहीं थी। उस दिन हवा में कणों की मात्रा 127 क्यूबिक मीटर रही और दीपावली के दिन यह मात्रा आश्चर्यजनक रूप से कम होकर 109 के स्तर पर पहुंच गई। पीएम-10 का स्तर 125 से कम होना चाहिए।
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भिवानी से ज्यादा प्रदूषित चरखी दादरी
दीपावली से पहले और बाद में भिवानी सिटी से ज्यादा प्रदूषित चरखी दादरी रही। 12 अक्तूबर को चरखी दादरी सिटी में पीएम 2.5 श्रेणी का स्तर 258 क्यूबिक मीटर नोट किया गया। जबकि, दीपावली के दिन यह बढ़कर 268 क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। यहां नोट करने वाली बात यह है कि दिवाली से पहले और दीपावली के दिन के आंकड़े पर गौर करें तो दादरी का स्तर 258 से 268 पर पहुंचा। यानी, 10 क्यूबिक मीटर की वृद्धि। जबकि, भिवानी सिटी में यह बढ़ोतरी 43 क्यूबिक मीटर रही। पीएम 10 श्रेणी का प्रदूषण दीपावली से एक सप्ताह पहले 118 क्यूबिक मीटर था, जो दिवाली के दिन 132 हो गया। इस श्रेणी में भी चरखी दादरी में भिवानी की तुलना में ज्यादा प्रदूषण है।
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पीएम 2.5 क्यूबिक मीटर आकार के कणों की मात्रा दीपावली के दिन बढ़ गई। दीपावली से एक सप्ताह पहले भिवानी की हवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा 203 थी, जो दिवाली के दिन बढ़कर 246 हो गई। दादरी में पहले यह आंकड़ा 258 क्यूबिक मीटर था और दीपावली के दिन बढ़कर 268 हो गया। दीपावली के दिन दोनों शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। प्रदूषण बढ़ने के और भी कारण हो सकते हैं। माइनिंग से लेकर वाहनों का धुआं भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा सकता है।
- विनय गिल, एसडीओ, राज्य प्रदूषण बोर्ड
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मानव की सेहत पर क्या होगा असर
2.5 क्यूबिक मीटर आकार के कण सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डा. शिवकांत बताते हैं कि इस आकार के कण हवा में तैरते रहते हैं। सांस के माध्यम से सीधे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और स्वस्थ आदमी को भी सांस लेने में तकलीफ से लेकर सांस की नली में सिकुड़न समेत कई तरह की परेशानी हो जाती है। प्रभावित व्यक्ति यदि तुरंत इलाज न ले तो ब्रोंकाइटिस तक हो सकता है। यदि दमा के रोगी के शरीर में ये कण पहुंच जाते हैं तो बीमारी विकराल रूप भी ले सकती है। दिल पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण की चपेट में आने वाले लोगों को चाहिए कि वे घर के अंदर ही रहें। बाहर निकलना भी पड़े तो मास्क पहनकर निकलें। इसका बचाव ही एकमात्र उपाय है।
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सप्ताहभर लगता है स्थिति नार्मल होने में
एक बार हवा में पीएम 2.5 आकार के कणों की मात्रा बढ़ती है तो स्थिति सामान्य होने में सप्ताह-10 दिन लग जाते हैं। डा. शिवकांत का कहना है कि आबोहवा सुधरने में कम से कम 6-7 दिन तो लगते हैं।
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