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उमरावत में पेयजल समस्या पर ग्रामीणों में नाराजगी
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भिवानी। गांव उमरावत की सांगा माईनर में मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी आखिरी टेल तक पानी नहीं पहुचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हरेक सरकार के नेता उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर जाते है मगर पानी आज तक नहीं आया।
ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री का आगमन भिवानी में हुआ तो उन्होंने अपने नहरी पानी की मांग उनके समक्ष रखी थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उक्त मामले में शीघ्रता से कार्यवाही करने के आदेश दिए थे जो आज भी अधूरे हैं। जयकिशन, प्रमोद, मांगेराम, रामधारी, भोलू, दयाकिशन ने कहा कि उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी हुए 25 से 30 साल का समय बीत चुका है। ऐसे में उनके खेत बंजर होते जा रहे हैं। लोग अब किसानी छोडक़र शहरों की तरफ प्लायन करने लगे हैं क्योंकि न तो खेतों में पानी है और न ही पीने का पानी है। कुछेक जमीदारों ने तो अपने खेत ही बेच दिए। बाकी बचे किसानों ने अपनी-अपनी जमीनों पर लोन लिया हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने निर्णय लिया कि जो भी पार्टी उन्हें सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाएगी वे उसी पार्टी को अपना मत देंगे। सरपंच दिनेश शर्मा ने कहा कि यहां पर जो भी कार्यकर्ता आता है, उसके सामने पानी की समस्या रखी जाती है। उच्च अधिकारियों को भी इस समस्या से अवगत कराया गया। समस्या का अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
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ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री का आगमन भिवानी में हुआ तो उन्होंने अपने नहरी पानी की मांग उनके समक्ष रखी थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उक्त मामले में शीघ्रता से कार्यवाही करने के आदेश दिए थे जो आज भी अधूरे हैं। जयकिशन, प्रमोद, मांगेराम, रामधारी, भोलू, दयाकिशन ने कहा कि उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी हुए 25 से 30 साल का समय बीत चुका है। ऐसे में उनके खेत बंजर होते जा रहे हैं। लोग अब किसानी छोडक़र शहरों की तरफ प्लायन करने लगे हैं क्योंकि न तो खेतों में पानी है और न ही पीने का पानी है। कुछेक जमीदारों ने तो अपने खेत ही बेच दिए। बाकी बचे किसानों ने अपनी-अपनी जमीनों पर लोन लिया हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने निर्णय लिया कि जो भी पार्टी उन्हें सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाएगी वे उसी पार्टी को अपना मत देंगे। सरपंच दिनेश शर्मा ने कहा कि यहां पर जो भी कार्यकर्ता आता है, उसके सामने पानी की समस्या रखी जाती है। उच्च अधिकारियों को भी इस समस्या से अवगत कराया गया। समस्या का अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
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