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Ambala News: नशे की लत से एचआईवी की चपेट में युवा
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अंबाला सिटी। नशे की लत में उलझे युवा अपना पारिवारिक जीवन तो खराब कर ही रहे हैं। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। इनमें वो युवा सबसे अधिक हैं, जिन्हें टीके से नशा लेने की लत लगी है।
नागरिक अस्पताल में बने ओएसटी सेंटर में नशा छोड़ने की दवा लेने आ रहे 600 मरीजों में से अधिक 50 से अधिक मरीज ऐसे हैं, जिन्हें एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी बीमारी है। इतना ही नहीं कई मरीजों के परिजन भी एचआईवी पॉजिटिव मिल रहे है। प्रत्येक माह में आठ से 10 मरीज ऐसे मिल रहे हैं। जो नशे के आदि हैं और उनमें एचआईवी और हैपेटाइटिस बीमारियां मिल रही है।
हर छह माह में होती है जांच
जिला ओएसटी सेंटर में दवा लेने आ रहे मरीजों की प्रत्येक छह माह में एचआईवी और अन्य बीमारियों की जांच होती है। इससे मरीज के परिजनों को सचेत किया जाता है और उनकी भी समय पर जांच की जा सके। रोजाना करीब 200 से अधिक मरीज नशा छोड़ने की दवा लेने के लिए आ रहे हैं। प्रत्येक छह माह में 40 से 50 मरीजों के टेस्ट करवाए जाते हैं।
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इंजेक्शन लेने वालों को खतरा अधिक
एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी बीमारी का खतरा सबसे अधिक उन मरीजों को हैं, जो इंजेक्शन से नशा लेते थे। नशा लेने के लिए कई बार मरीज एक ही सीरिंज का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर दूसरे मरीज को काई गंभीर बीमारी होगी तो वह इंजेक्शन के जरिए दूसरे मरीज को भी हो जाती है। जिला अंबाला में इंजेक्शन से नशा लेने वाले मरीजों की संख्या 600 से भी अधिक है। इनमें से 80 प्रतिशत मरीज इंजेक्शन से नशा लेते हैं।
वर्जन
ओएसटी सेंटर में आने वाले मरीजों को ओपिओइड प्रतिस्थापन थेरेपी से दवा दी जाती है। इसके साथ ही मरीजों की प्रत्येक छह माह में जांच भी करवाई जाती है। जिससे समय रहते गंभीर बीमारियों का उपचार किया जा सके।
-डॉ. सीमा, डीटीओ अंबाला।
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नागरिक अस्पताल में बने ओएसटी सेंटर में नशा छोड़ने की दवा लेने आ रहे 600 मरीजों में से अधिक 50 से अधिक मरीज ऐसे हैं, जिन्हें एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी बीमारी है। इतना ही नहीं कई मरीजों के परिजन भी एचआईवी पॉजिटिव मिल रहे है। प्रत्येक माह में आठ से 10 मरीज ऐसे मिल रहे हैं। जो नशे के आदि हैं और उनमें एचआईवी और हैपेटाइटिस बीमारियां मिल रही है।
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हर छह माह में होती है जांच
जिला ओएसटी सेंटर में दवा लेने आ रहे मरीजों की प्रत्येक छह माह में एचआईवी और अन्य बीमारियों की जांच होती है। इससे मरीज के परिजनों को सचेत किया जाता है और उनकी भी समय पर जांच की जा सके। रोजाना करीब 200 से अधिक मरीज नशा छोड़ने की दवा लेने के लिए आ रहे हैं। प्रत्येक छह माह में 40 से 50 मरीजों के टेस्ट करवाए जाते हैं।
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इंजेक्शन लेने वालों को खतरा अधिक
एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी बीमारी का खतरा सबसे अधिक उन मरीजों को हैं, जो इंजेक्शन से नशा लेते थे। नशा लेने के लिए कई बार मरीज एक ही सीरिंज का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर दूसरे मरीज को काई गंभीर बीमारी होगी तो वह इंजेक्शन के जरिए दूसरे मरीज को भी हो जाती है। जिला अंबाला में इंजेक्शन से नशा लेने वाले मरीजों की संख्या 600 से भी अधिक है। इनमें से 80 प्रतिशत मरीज इंजेक्शन से नशा लेते हैं।
वर्जन
ओएसटी सेंटर में आने वाले मरीजों को ओपिओइड प्रतिस्थापन थेरेपी से दवा दी जाती है। इसके साथ ही मरीजों की प्रत्येक छह माह में जांच भी करवाई जाती है। जिससे समय रहते गंभीर बीमारियों का उपचार किया जा सके।
-डॉ. सीमा, डीटीओ अंबाला।

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