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Ambala News: किसान सम्मेलन में गूंजा डब्ल्यूटीओ मुद्दा, बोले इससे बाहर आए भारत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:46 AM IST
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WTO issue echoed in farmers conference, said India should come out of it
सुखविंद्र कौर, पंजाब महासचिव, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी।
अंबाला सिटी। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के लिए पंजाब शंभू सीमा पर किसान नेताओं ने सम्मेलन किया। सम्मेलन में डब्ल्यूडीओ के जानकार विशेषज्ञों ने किसानों को संबोधित किया और इसके बारे में अहम जानकारी दी।
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सम्मेलन में मंच की कमान भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी की पंजाब महासचिव सुखविंद्र कौर के हाथों में रही। इस सम्मेलन को वक्ता चंडीगढ़ से अजय पाल बराड़, पटियाला से रणजीत सिंह घुम्मण, स्टूडेंट फेडरेशन से हरमन सिंह, हमीर सिंह, अधिवक्ता धर्मवीर ढींडसा ने भी संबोधित किया। वहीं, किसान नेताओं का कहना है कि भारत के ऊपर विश्व व्यापार संगठन का प्रेशर है, इसलिए भारत को संगठन से बाहर आना चाहिए।
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फोटो नंबर - 30
सरकार कार्पोरेट घरानों को देना चाहती है लाभ
भारतीय किसान मजदूर यूनियन पंजाब के राष्ट्रीय प्रधान मनजीत सिंह घुमाना ने कहा कि भारत के ऊपर विश्व व्यापार संगठन का प्रेशर है। इसलिए इस संगठन से भारत को बाहर आना चाहिए। अगर सरकार संगठन से बाहर आकर किसान व मजदूर के हक में खड़ी होती है तो एमएसपी को लेकर कुछ कर सकते हैं। सरकार कॉरपोरेट घरानों को ही लाभ देना चाहती हैं। एमएसपी पर कानून की गारंटी किसानों की मुख्य मांग है। दुबई में सोमवार को डब्ल्यूटीओ की बैठक होनी है। शंभू सीमा पर इस बारे में सम्मेलन रखकर किसानों को जानकारी दी गई। भारत के किसानों को रेड जोन में रखा है, जोकि जीडीपी के हिसाब से कुछ भी नहीं है। यह किसान और मजदूर वर्ग को कुचलना चाह रहे हैं और कार्पोरेट घरानों को लाभ देना चाहते हैं।
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फोटो नंबर - 28
डब्ल्यूटीओ से बाहर होना चाहिए भारत
भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी की महासचिव सुखविंद्र कौर ने कहा कि उनकी मांग है कि भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर होना चाहिए। सरकार विदेशी कार्पोरेट की शर्तें न मानें, बल्कि अपने लोगों की बात को सुने। सरकार या तो डब्ल्यूटीओ संस्था से बाहर आए या उस संस्था से किसानों की मांगों को मनवाए। अमेरिका में किसानों को वहां की जीडीपी का पांच प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। मगर भारत की जनसंख्या वहां से ज्यादा है और किसानों की आबादी 60 प्रतिशत है। इन किसानों को जीडीपी का 10 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। यह भी कई वर्ष पुरानी जीडीपी पर सब्सिडी दी जा रही है। यह सब्सिडी की शर्त हटाई जानी चाहिए।
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लीगल गारंटी कानून बनाने के बीच में डब्ल्यूटीओ की नीति बांधा
किसान मजदूर मोर्चा एसकेएम गैर राजनीतिक मोर्चा के नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की नीति जो है वो लीगल गारंटी कानून बनाने के बीच में बड़ी बाधा है। विश्व व्यापार संगठन की नीतियां कैसे किसान को प्रभावित कर रही है। इस बारे में सम्मेलन में विशेषज्ञ वक्ताओं ने जानकारी दी है। उनकी मांग पूरी न होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा, चाहे किसानों को कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े। संगठन की बैठक के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा।

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सरकार किसानों को खत्म करना चाह रही
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के प्रवक्ता तेजवीर सिंह पंजोखरा ने बताया कि डब्ल्यूटीओ की बैठक दुबई में होनी है। किसानों ने इसको लेकर शंभू सीमा पर सम्मेलन किया है। किसानों को जीडीपी की 10 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। भारत में किसान को 20 हजार सब्सिडी मिलती है तो अमेरिका में किसान को 45 लाख तक सब्सिडी मिलती है। सरकार को डब्ल्यूटीओ से बाहर आना चाहिए। सरकार किसानों को खत्म करना चाहती है।
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