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Ambala News: एसी बंद, हाथ के पंखे से नवजातों को हवा कर रहीं प्रसूताएं

Tue, 22 Sep 2026 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Tue, 22 Sep 2026 12:53 AM IST
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With the AC turned off, new mothers are fanning their newborns with hand fans.
सिटी के नागरिक अस्पताल में जच्चा बच्चा वार्ड में बंद पड़े पंखे। संवाद
शम्मी मेहरोल
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अंबाला सिटी, धूलकोट। दो दिन के लंबे अवकाश के बाद सोमवार को नागरिक अस्पताल की ओपीडी खुली तो इलाज के लिए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अस्पताल के जच्चा-बच्चा (एमएनसी) वार्ड में भर्ती प्रसूताओं और नवजातों के लिए गर्मी और उमस से राहत का कोई इंतजाम नजर नहीं आया। वार्ड में लगे एसी बंद पड़े हैं और छत के पंखे भी पर्याप्त हवा नहीं दे पा रहे।
ऐसे में प्रसूताएं और तीमारदार हाथ के पंखे से नवजात बच्चों को हवा करते हुए दिन काटने को मजबूर हैं। दोपहर के समय वार्ड का माहौल और भी परेशान करने वाला हो जाता है। तीमारदारों का कहना है कि कई दिनों से एसी खराब हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। वहीं, सीएमओ रेनू बेरी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। इसकी जानकारी लेकर एसी बंद होने का कारण पता किया जाएगा और व्यवस्था सुचारू कराई जाएगी।
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पांच दिन से झेल रहे परेशानी
तीमारदार सुदेश ने बताया कि पांच दिन पहले पोते का जन्म हुआ था, तब से यहीं हैं। एसी सिर्फ नाम के हैं, चलते ही नहीं। मजबूरन हमें नवजात बच्चे को दिन-रात हाथ वाली पंखी से हवा देनी पड़ रही है। यही हाल बलाना गांव की पिंकी का भी है। चार दिन पहले मां बनी पिंकी का कहना है कि दोपहर में वार्ड का तापमान इतना बढ़ जाता है कि बेड पर लेटना तो दूर, बैठना भी दूभर है। छत पर लगे पंखे इतनी धीमी रफ्तार से घूम रहे हैं कि उनकी हवा नीचे मरीजों तक पहुंच ही नहीं पाती।
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गर्मी और उमस से संक्रमण का खतरा
भीषण गर्मी और हवा के अभाव के कारण पैदा हुई उमस से नवजात शिशुओं में त्वचा के इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। डॉक्टरों का भी मानना है कि ऐसे माहौल में प्रसूताओं की रिकवरी प्रभावित हो सकती है और संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। तीमारदारों का आरोप है कि इस बदहाली की शिकायत कई बार अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी स्टाफ से की गई, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करने वाला यह जिला अस्पताल खुद गंभीर बीमारी का शिकार नजर आ रहा है।
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