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15 में से 6 मंडियों में हुई गेहूं की खरीद, कुल 50 प्रतिशत हो चुका गेहूं का उठान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 02:06 AM IST
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Wheat procurement done in 6 out of 15 mandis, 50 percent of the total wheat lifted
अंबाला सिटी की अनाज मंडी में गेहूं की फसल के बैग भरते मजदूर। - फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। गेहूं खरीद के कार्य में रविवार को सुस्ती रही। जिले भर की 15 मंडियों में से केवल छह मंडियों में ही गेहूं की खरीद हुई। जबकि बाकी नौ मंडियों में गेहूं खरीद का आंकड़ा शून्य रहा। इन मंडियों में कुल 8675 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है।
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इसमें भी अंबाला सिटी मंडी से सबसे अधिक कुल 4627 मीट्रिक टन गेहूं हैफेड और डीएफएसी की ओर से खरीदा गया। गेहूं खरीद के साथ गेहूं उठान का कार्य भी तेजी के साथ किया जा रहा है। अभी तक कुल खरीदे गए 45 हजार 149 मीट्रिक टन में से 50 प्रतिशत तक गेहूं का उठान किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही अन्य बची हुई फसल का उठान भी कर दिया जाएगा, इससे कि मंडी में आने वाले किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
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गेहूूं की कम आवक से तेजी के साथ हो रही खरीद
इस बार फसल की उपज 50 प्रतिशत कम घट गई है। हालात यह है कि जहां एक एकड़ से कम से कम 20 क्विंटल तक गेहूं की उपज हो रही थी। वह इस बार घटकर 10 क्विंटल तक रह गई है। यही कारण है कि गेहूं की आवक भी काफी कम है और दूसरी और पंजाब से आने वाले किसानों की फसल को भी हरियाणा में लाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसका भी असर अंबाला की मंडियों में दिखाई दे रहा है।
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इस मंडियों में हुई खरीद
अंबाला कैंट में 762, अंबाला सिटी में 4627, नारायणगढ़ 1180, मुलाना 1205, शहजादपुर 715, भरेड़ी कलां 206।
यह बोले किसान
इस बार हम किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस बार फसल की उपज काफी कम है। जहां पिछली बार 20 क्विंटल प्रति एकड़ फसल निकली थी। वह अब घटकर केवल नौ क्विंटल तक रह गई है।
- जगजीत सिंह।
पहले जहां इन दिनों में मंडियों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी, इस बार मंडी काफी खाली दिखाई दे रही है। इसके दो कारण है, एक तो पंजाब के किसानों की हरियाणा की मंडियों में इंट्री बंद कर दी है और दूसरा फसल की उपज भी बहुत कम हुई है।
- दलबीर सिंह।
मंडियों में इस बार अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है, मंडियां इस बार अधिकतर खाली है और कई आढ़तियों ने तो अपना काम भी निपटा दिया है। जबकि इन दिनों में आढ़तियों के पास ही समय नहीं होता था। इस बार मौसम ने ऐसी मार मारी है कि हम किसानों की उपज ही आधी रह गई है।
- मलकीत सिंह।
हम किसानों को इस बार बहुत अधिक नुकसान हुआ है। सरकार को हम किसानों को कुछ राहत देनी चाहिए, इससे कि हम किसान अगली फसल को लगा सकें। इस बार जो फसल की उपज है उससे न तो कर्जे उतर सकेंगे और न ही नई फसल लगाई जा सकेगी।

- गुरजिंद्र सिंह
इस बार की फसल देखकर समझ नहीं आ रहा है कि इतनी सी फसल का आखिर क्या करें। पहले जहां 26 क्विंटल प्रति एकड़ तक निकल जाती थी। वह इस बार घटकर 10 एकड़ तक रह गई है। हम किसानों के लिए इस बार बहुत बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
-सुखप्रीत सिंह।
मंडियों में गेहूं खरीद और उठान का कार्य तेजी के साथ चल रहा है। जो कि आगे भी जारी रहेगा।
- अपार तिवारी, डीएफएससी, अंबाला।
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