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Farmers Protest Update: किसानों के लिए मौसम बना चुनौती; ज्यादातर पेट दर्द, दस्त, बुखार, खांसी-जुकाम से पीड़ित

Tue, 20 Feb 2024 09:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 20 Feb 2024 09:21 AM IST
सार

किसानों आंदोलन में किसानों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो आंसू गैस और रबर बुलेट का सामना किया और अब किसानों के लिए मौसम भी चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि समाजसेवियों की ओर से निशुल्क चिकित्सा शिविर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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Farmers Protest Update, Weather becomes challenge for farmers and suffering from stomach ache, diarrhea, fever
किसान आंदोलन में लगाए गए मेडिकल कैंप में दवाईयां वितरित करते चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसान आंदोलन के लिए गांव और घर छोड़कर शंभू सीमा पर डटे किसानों के लिए मौसम भी चुनौती बन रहा है। आलम ये है कि पहले तो किसानों ने पुलिस की आंसू गैस और रबर बुलेट का सामना कर उपचार कराया और अब किसान सर्दी से जूझ रहे हैं।

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शंभू सीमा पर कुछ समाजसेवियों की ओर से चिकित्सा शिविर लगाकर उपचार किया जा रहा है। जहां रोजाना सर्दी, जुकाम और पेट दर्द से जुड़े किसान आ रहे हैं। उन्हें दवाएं भी निशुल्क दी जा रही हैं। किसान आंदोलन में बीते 13 फरवरी शाम सात बजे से ही खालसा इंटरनेशनल के तत्वावधान में किसानों को निशुल्क चिकित्सा शिविर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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इस मौके पर शिविर के प्रभारी डॉ. शरणप्रीत सिंह ने बताते हैं कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों को अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में रखा जा रहा है। शिविर में 24 घंटे डॉक्टर अपनी सेवाए दे रहे हैं। किसान आंदोलन के चलते जब भी किसी किसान की तबीयत बिगड़ती है तो उसको तुरंत डॉक्टरों द्वारा देखा जाता है। ज्यादा तबीयत बिगडऩे पश्चात उसे रेफर किया जाता है। किसानों को ज्यादातर पेट दर्द, दस्त, बुखार, खांसी जुकाम हो रहे हैं। अब तक सैकड़ों किसानों का इलाज किया गया है। डॉ. शरणप्रीत सिंह खालसा इंटरनेशनल की ओर से दो शिविर लगाए गए हैं। दूसरा चिकित्सा शिविर खिनौरी बॉर्डर पर लगाया है।
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हाईवे की लाइटों से मिल रही बिजली
ट्रॉलियों में आए सैकड़ों किसानों के पास अपने मोबाइल फोन, लाइट आदि जलाने के लिए कई साधन हैं। उन्होंने राजमार्ग पर लगी लाइटों के कनेक्शनों को खोलकर उनसे अपने बिजली के तार जोड़ दिए हैं। इससे उनके बिजली के उपकरण चल पा रहे हैं। वहीं, कहीं पर किसान ट्रैक्टर से बिजली बना रहे हैं। जिस जगह सुबह से लेकर रात्रि तक किसानों का मंच पर संबोधन हो रहा है उस लाउड स्पीकर के लिए बिजली को भी ट्रैक्टर से बनाया जा रहा है। यह ट्रेक्टर दिनभर स्टाॅर्ट रहता है।

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