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दृष्टि ही सृष्टि की रचना करती है : स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ
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शिव धाम गौरी ताल मंदिर के श्री कृष्ण दिव्य भारती आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। शिव धाम गौरी ताल मंदिर के श्री कृष्ण दिव्य भारती आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। यह कथा ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री दिव्य भारती महाराज के प्रथम पुण्य स्मरण के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। इसमें श्रीमद्भागवत कथा का प्रसार स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कथा के तीसरे दिन कहा कि दृष्टि ही सृष्टि की रचना करती है और मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका जीवन आकार लेता है।
उन्होंने बताया कि स्थान, पोषण, इच्छा, मन और विचार ये सभी तत्व व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने समझाया कि जिस वातावरण में व्यक्ति रहता है और जैसा आहार ग्रहण करता है, वैसी ही उसकी मानसिकता और प्रवृत्ति बनती है। इसलिए सत्संग, सदविचार और संयमित जीवन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को ईश्वर कृपा, संयम और अनुशासन को जीवन की सफलता का आधार बताते हुए आत्मचिंतन करने का आह्वान किया। मौके पर विशेष रूप से साध्वी पूर्णानंद महाराज मौजूद रहे, वहीं आयोजक समिति श्री कृष्ण दिव्य भारती आश्रम के सदस्यगणों सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। शिव धाम गौरी ताल मंदिर के श्री कृष्ण दिव्य भारती आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। यह कथा ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री दिव्य भारती महाराज के प्रथम पुण्य स्मरण के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। इसमें श्रीमद्भागवत कथा का प्रसार स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कथा के तीसरे दिन कहा कि दृष्टि ही सृष्टि की रचना करती है और मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका जीवन आकार लेता है।
उन्होंने बताया कि स्थान, पोषण, इच्छा, मन और विचार ये सभी तत्व व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने समझाया कि जिस वातावरण में व्यक्ति रहता है और जैसा आहार ग्रहण करता है, वैसी ही उसकी मानसिकता और प्रवृत्ति बनती है। इसलिए सत्संग, सदविचार और संयमित जीवन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को ईश्वर कृपा, संयम और अनुशासन को जीवन की सफलता का आधार बताते हुए आत्मचिंतन करने का आह्वान किया। मौके पर विशेष रूप से साध्वी पूर्णानंद महाराज मौजूद रहे, वहीं आयोजक समिति श्री कृष्ण दिव्य भारती आश्रम के सदस्यगणों सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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