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Ambala News: शान से कहते थे कि मैं सांसद-मंत्री बन गया पर पिता जी ने जूते गांठने का काम नहीं छोड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 May 2023 02:48 AM IST
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Used to proudly say that I became a MP-minister but my father did not give up the job of tying shoes.
सतनाम सिंह
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अंबाला सिटी। अपने हंसी-मजाक और बेबाक बयानों से चर्चा में रहने वाले अंबाला सांसद रतनलाल कटारिया का वीरवार की सुबह निधन हो गया। वह भारत सरकार में केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री भी थे और तीन बार के सांसद रहे। वह गंभीर से गंभीर स्थिति में भी लोगों का मूड हंसी-मजाक से ठीक कर देते थे। राजनीतिक कॅरिअर में जहां वे बहुत कम अंतर से चुनाव हारे तो उन्होंने रिकॉर्ड वोट के साथ जीत भी हासिल की है। कटारिया कैंट के एसडी कॉलेज में पढ़े। उन्होंने एमए राजनीति शास्त्र और एलएलबी की पढ़ाई की। कटारिया की सबसे खास बात यह रही है कि वह जमीन से जुड़े नेता रहे। वह जिस भी कार्यक्रम में जाते थे तो अपने साथ रहे पुराने कार्यकर्ता व साथियों को सीधा नाम लेकर बुलाते थे और उनके पास जाकर खड़े हो जाते थे। अंबाला शहर विधानसभा से उनका खास लगाव रहा। वह सरकार से जुड़ी योजनाओं व अपने विकास कार्यों को लेकर अक्सर बातचीत करते रहते थे, हालांकि नारायणगढ़ रेलवे प्रोजेक्ट का उनका सपना अधूरा रह गया।
यमुनानगर के गांव संधाला में जन्मे कटारिया शान से कहते थे कि मैं सांसद-मंत्री बन गया, लेकिन पिता जी ने जूते गांठने का काम नहीं छोड़ा। चुनाव प्रचार में पल्ला पसार (झोली फैलाकर) वोट मांगने का उनका स्टाइल ही अलग था, जो लोगों को खूब भाता था। अक्सर कहा करते थे कि मैं लोगों से इतना घुला-मिला रहता हूं कि किसी का झरीट (बच्चा) रोए, तब उसे बहलाने के लिए भी लोग मुझे बुला लेते हैं।
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यही कारण है कि सांसद रतनलाल कटारिया तीन बार सांसद रहे। वह 1999, 2014 और 2019 में सांसद बने। इससे पहले वह 1985 में रादौर से विधायक भी रहे। उन्हें राजस्वमंत्री भी बनाया गया था। कारगिल युद्ध के बाद भाजपा की लहर थी। इसके बाद 1999 में कटारिया को लोकसभा का टिकट मिला। तब रतनलाल कटारिया ने कांग्रेस के फूलचंद मुलाना को हराया था। इस चुनाव में कटारिया को 3 लाख 57 हजार 460 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के फूलचंद मुलाना को 2 लाख 32 हजार 982 वोट मिले थे। कटारिया यह चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने थे। कटारिया को 51.63 प्रतिशत वोट मिले थे।
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कटारिया को 2004 में भी लोकसभा का टिकट मिला। तब कुमारी सैलजा ने कटारिया को हराया था। कटारिया को एक लाख 80 हजार 329 वोट मिले थे। इसके बाद 2009 में फिर कुमारी सैलजा ने कटारिया को हराया। इस दौरान कटारिया सबसे छोटे मॉर्जिन से हारे थे। तब सैलजा को तीन लाख 22 हजार 258 और रतनलाल कटारिया को तीन लाख 7 हजार 688 वोट मिले थे। सैलजा को 25.48 प्रतिशत और कटारिया को 24.32 प्रतिशत वोट मिले थे। हार के बाद कटारिया का डॉयलाग था कि वह तो आखिर में निश्चिंत होकर सो गए थे कि उनकी जीत पक्की है। 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर चली तो 2014 में कटारिया का सामना कांग्रेस के राजकुमार वाल्मीकि से हुआ। 2014 में कटारिया को छह लाख 12 हजार 121 वोट मिले थे और राजकुमार को 2 लाख 72 हजार 047 वोट मिले थे। कटारिया ने 10 साल बाद जीत के साथ वापसी की। 2019 के चुनाव में कटारिया का सामना फिर कांग्रेस की कुमारी सैलजा से हुआ तो कटारिया ने अपने वोट के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कटारिया को सात लाख 46 हजार 508 और सैलजा को चार लाख चार हजार 163 वोट मिले थे। कटारिया को 56.64 प्रतिशत वोट मिले थे। सैलजा को 30.67 वोट मिले थे। कटारिया का यह अंतिम चुनाव रहा।


सांसद रतन लाल कटारिया के निधन से पार्टी और देश की राजनीति को अपूर्णीय क्षति : विज
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। लोकसभा के सांसद रतन लाल कटारिया के निधन पर दुख जताते हुए हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि उनके निधन से पार्टी और देश की राजनीति को भारी क्षति पहुंची है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। इससे पहले निधन की जानकारी मिलते ही गृह मंत्री ने सभी कार्यक्रम रद किए और उनके अंतिम दर्शन के लिए पंचकुला पहुंचे। विज ने कहा कि रतन लाल कटारिया पार्टी के कद्दावर नेता थे और उनके बहुत अच्छे मित्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि रतनलाल कटारिया हंसमुख नेता थे और गंभीर से गंभीर स्थिति में भी लोगों का मूड हंसी-मजाक से ठीक कर देते थे।
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