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Ambala News: बहुचर्चित हत्याकांड में गैंगस्टर समेत दो बरी
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अंबाला सिटी। नारायणगढ़ के बहुचर्चित रणधीर सिंह हत्याकांड में आरोपी रहे गैंगस्टर विकास उर्फ विक्की और रजविंद्र उर्फ अन्नू को बुधवार को कोर्ट ने बरी कर दिया। सेशन जज कंचन माही की अदालत ने यह फैसला सुनाया। इस मामले की सुनवाई करीब साढ़े पांच साल तक चली। इसमें 42 गवाहों को शामिल किया था। यहां तक कि गवाहों की उच्च स्तरीय सुरक्षा भी दी गई थी। आरोपी पक्ष की तरफ से कोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता मान सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस की बड़ी हीलाहवाली देखने को मिली। मामले में कई कमियां थी, जिसके पुलिस के पास जवाब ही नहीं थे।
यह कमियां बनी मजबूत वजह
पहला कारण
अधिवक्ता मान सिंह ने बताया कि आरोप था कि रणधीर सिंह की हत्या के मामले में विकास उर्फ विक्की के साथ हथियारों का जखीरा पकड़ा था। इसमें पुलिस ने कुछ हथियारों की तो उपयुक्त से सेंक्शन कराई और मधुबन जांच के लिए हथियार भेजे। मगर कार्बाइन जैसे हथियार को जांच को मधुबन नहीं भेजा गया। जबकि यह मुख्य हथियार था। इसके बाद सरकार की तरफ से इस मामले में कोर्ट में अपील की गई कि कार्बाइन और मृतक गोलियों के मिलान के लिए हथियार मधुबन भेजा जाए, मगर यहां कोर्ट ने यह स्वीकार नहीं किया।
दूसरा कारण
अधिवक्ता ने बताया कि चश्मदीद ने बताया था कि यह हत्याकांड सुबह साढ़े आठ बजे हुआ था, ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस साढ़े 12 बजे कैसे आई। जबकि थाना घटनास्थल से महज 20 किलोमीटर था। अगर पुलिस कहती है कि वह साढ़े 12 बजे पहुंच गई तो डेढ़ बजे मुकदमा क्यों दर्ज किया गया। साढ़े आठ बजे से लेकर डेढ़ बजे तक प्रोसीक्यूशन को काफी समय मिल गया। ऐसे में को कहानी बनाई जा सकता थी।
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तीसरा कारण
अधिवक्ता ने बताया कि मृतक रणधीर के शरीर और कपड़ों स्थानों से जो खून के सैंपल मिले उन्हें 30 से 60 दिनों तक मधुबन जांच के लिए भेजा ही नहीं। जबकि कानून कहता है कि यह सैंपल तत्काल भेजे जाने चाहिए थे।
चौथा कारण
अधिवक्ता मान सिंह ने बताया कि पुलिस की थ्योरी थी कि मृतक की पिस्टल लेकर आरोपी भाग गए थे। मगर यहां सवाल खड़ा हुआ कि कोई भी हत्या में प्रयोग हथियार है तो उसे अक्सर नष्ट किया जाता है, क्या आरोपी इतने साल तक हथियार साथ लेकर घूमते रहे।
कुख्यात गैंगस्टर विक्की पर लगे थे आरोप
रणधीर सिंह हत्याकांड में आरोप लगाए थे कि हत्यारोपियों के साथ शार्प शूटर बागपत निवासी गैंगस्टर विकास उर्फ विक्की थी था। पुलिस ने अगस्त 2018 में विक्की को सोहना से गिरफ्तार किया था। जिसके पास से तीन पिस्टल 32 बोर, एक कार्बाइन, 15 कारतूस और एक बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद किया गया था।
ये है बहुचर्चित रणधीर सिंह हत्याकांड
नारायणगढ़ के महुआखेड़ी गांव निवासी रणधीर सिंह की 13 मई 2018 को गोलियाें से भूनकर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने उस समय हत्या की जब वह अपने परिवार को नखड़ौली गांव स्थित राधा स्वामी सत्संग में छोड़कर वापस आ रहा था। इस मामले में नारायणगढ़ थाने में शिकायत देते हुए चश्मदीद गवाह पूर्णचंद्र ने बताया था कि नखड़ौली गांव से वापस आते समय नारायणगढ़ की तरफ से आ रही काली कार ने ओवरटेक कर उनकी स्विफ्ट कार को रुकवाया, इसके बाद काली कार में बैठे चार लड़के उतरे और ड्राइवर सीट पर बैठे उसके भाई रणधीर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे। इसके बाद चाकुओं से रणधीर सिंह के शरीर पर कई वार किए। इस दौरान रणधीर सिंह ने दम तोड़ दिया था।
मुख्य गवाह की भी कर दी थी हत्या
बहुचर्चित रणधीर सिंह हत्याकांड मामले में मुख्य गवाह पूर्णचंद्र दो जुलाई 2019 को अपने घर में सो रहे थे। तभी बदमाशों ने रात्रि साढ़े 12 बजे पूर्णचंद्र के घर में घुसकर उन्हें छह गोलियां मारी थी। इनमें से पूर्णचंद को एक गोली सिर में दूसरी सीने और तीसरी बाजू पर लगी थी। जिसके बाद पूर्णचंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। ऐसे में हत्यारोपियों ने इस मुख्य गवाह को भी अपने रास्ते से हटा दिया था।
फैसले को आगे देंगे चुनौती : रामपाल
इस मामले को लेकर मृतक रणधीर सिंह के तहेरे भाई रामपाल का कहना है कि इस मामले उन्होंने अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश की है। अब कोर्ट का फैसला आया है तो इसे पढ़ने समझने के बाद आगे की अदालत में और मजबूती से पक्ष रखेंगे।
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यह कमियां बनी मजबूत वजह
पहला कारण
अधिवक्ता मान सिंह ने बताया कि आरोप था कि रणधीर सिंह की हत्या के मामले में विकास उर्फ विक्की के साथ हथियारों का जखीरा पकड़ा था। इसमें पुलिस ने कुछ हथियारों की तो उपयुक्त से सेंक्शन कराई और मधुबन जांच के लिए हथियार भेजे। मगर कार्बाइन जैसे हथियार को जांच को मधुबन नहीं भेजा गया। जबकि यह मुख्य हथियार था। इसके बाद सरकार की तरफ से इस मामले में कोर्ट में अपील की गई कि कार्बाइन और मृतक गोलियों के मिलान के लिए हथियार मधुबन भेजा जाए, मगर यहां कोर्ट ने यह स्वीकार नहीं किया।
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दूसरा कारण
अधिवक्ता ने बताया कि चश्मदीद ने बताया था कि यह हत्याकांड सुबह साढ़े आठ बजे हुआ था, ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस साढ़े 12 बजे कैसे आई। जबकि थाना घटनास्थल से महज 20 किलोमीटर था। अगर पुलिस कहती है कि वह साढ़े 12 बजे पहुंच गई तो डेढ़ बजे मुकदमा क्यों दर्ज किया गया। साढ़े आठ बजे से लेकर डेढ़ बजे तक प्रोसीक्यूशन को काफी समय मिल गया। ऐसे में को कहानी बनाई जा सकता थी।
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तीसरा कारण
अधिवक्ता ने बताया कि मृतक रणधीर के शरीर और कपड़ों स्थानों से जो खून के सैंपल मिले उन्हें 30 से 60 दिनों तक मधुबन जांच के लिए भेजा ही नहीं। जबकि कानून कहता है कि यह सैंपल तत्काल भेजे जाने चाहिए थे।
चौथा कारण
अधिवक्ता मान सिंह ने बताया कि पुलिस की थ्योरी थी कि मृतक की पिस्टल लेकर आरोपी भाग गए थे। मगर यहां सवाल खड़ा हुआ कि कोई भी हत्या में प्रयोग हथियार है तो उसे अक्सर नष्ट किया जाता है, क्या आरोपी इतने साल तक हथियार साथ लेकर घूमते रहे।
कुख्यात गैंगस्टर विक्की पर लगे थे आरोप
रणधीर सिंह हत्याकांड में आरोप लगाए थे कि हत्यारोपियों के साथ शार्प शूटर बागपत निवासी गैंगस्टर विकास उर्फ विक्की थी था। पुलिस ने अगस्त 2018 में विक्की को सोहना से गिरफ्तार किया था। जिसके पास से तीन पिस्टल 32 बोर, एक कार्बाइन, 15 कारतूस और एक बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद किया गया था।
ये है बहुचर्चित रणधीर सिंह हत्याकांड
नारायणगढ़ के महुआखेड़ी गांव निवासी रणधीर सिंह की 13 मई 2018 को गोलियाें से भूनकर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने उस समय हत्या की जब वह अपने परिवार को नखड़ौली गांव स्थित राधा स्वामी सत्संग में छोड़कर वापस आ रहा था। इस मामले में नारायणगढ़ थाने में शिकायत देते हुए चश्मदीद गवाह पूर्णचंद्र ने बताया था कि नखड़ौली गांव से वापस आते समय नारायणगढ़ की तरफ से आ रही काली कार ने ओवरटेक कर उनकी स्विफ्ट कार को रुकवाया, इसके बाद काली कार में बैठे चार लड़के उतरे और ड्राइवर सीट पर बैठे उसके भाई रणधीर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे। इसके बाद चाकुओं से रणधीर सिंह के शरीर पर कई वार किए। इस दौरान रणधीर सिंह ने दम तोड़ दिया था।
मुख्य गवाह की भी कर दी थी हत्या
बहुचर्चित रणधीर सिंह हत्याकांड मामले में मुख्य गवाह पूर्णचंद्र दो जुलाई 2019 को अपने घर में सो रहे थे। तभी बदमाशों ने रात्रि साढ़े 12 बजे पूर्णचंद्र के घर में घुसकर उन्हें छह गोलियां मारी थी। इनमें से पूर्णचंद को एक गोली सिर में दूसरी सीने और तीसरी बाजू पर लगी थी। जिसके बाद पूर्णचंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। ऐसे में हत्यारोपियों ने इस मुख्य गवाह को भी अपने रास्ते से हटा दिया था।
फैसले को आगे देंगे चुनौती : रामपाल
इस मामले को लेकर मृतक रणधीर सिंह के तहेरे भाई रामपाल का कहना है कि इस मामले उन्होंने अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश की है। अब कोर्ट का फैसला आया है तो इसे पढ़ने समझने के बाद आगे की अदालत में और मजबूती से पक्ष रखेंगे।