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Ambala News: नवनिर्मित मकान की थी खुशी, मन्नतों का धागा बांधने से पहले ही टूट गया परिवार
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अंबाला। बुलंदशहर के भोपतपुर गांव निवासी राजिंद्र पूरे परिवार को नवनिर्मित तीन मंजिला मकान के मुहूर्त से पहले वैष्णो देवी के लिए लेकर निकला था। सोचा था कि मंदिर में मन्नत का धागा बांधेंगे और लौटने के बाद ग्रह प्रवेश करेगा। सभी सदस्य 23 मई की देर शाम को मन में आस्था लिए भजनों का गुणगान करते जा रहे थे। रात ज्यादा होने पर अभी कुछ परिवार के सदस्यों ने आंख की झपकी ली ही थी कि हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। एक साथ परिवार के छह लोगों की मौत ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया। देर रात हादसे के बाद शुक्रवार की सुबह तक सभी एक-दूसरे को नम आंखों से संभालते नजर आए।
राजेंद्र का कहना है कि क्या पता था कि जिस खुशी के लिए पूरे परिवार को इकट्ठा किया वो सफर मातम में बदल जाएगा। हादसे के दौरान राजेंद्र ने अपने जीजा विनोद, भाई मनोज कुमार व उसकी पत्नी गुड्डी, ताऊ का लड़का सतबीर, ससुर मेहर चन्द व दोहती दीप्ति उर्फ दीपिका को खो दिया। रिश्तेदार धीरज ने बताया कि राजिंद्र का भोपतपुर गांव में पुश्तैनी मकान है और वह चार भाई हैं। वह खुद प्रापर्टी डीलर का काम करता है। वैष्णो देवी के लिए भाई मनोज व नरेंद्र को संग लेकर गया था लेकिन एक भाई दीपक पत्नी की तबीयत ठीक होने के कारण नहीं गया था। परिजनों ने बताया कि ट्रैवलर में एक कुनबे के सात परिवार सवार थे।
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फोटो नंबर - 62
माता-पिता की हादसे में गई जान, बेटी उपासना लड़ रही जिंदगी की जंग
हादसे में भोपतपुर गांव निवासी मनोज व उसकी पत्नी गड्डी की मौत हो गई। दंपती के तीन बच्चे हैं और उसमें से एक लड़की उपासना भी गंभीर रूप से घायल है और अंबाला के आदेश अस्पताल में जिंदगी मौत के बीच जूझ रही है। जबकि दो बेटे पंकज व अनिकेश भी मामूली घायल हैं और अस्पताल में ही उपचाराधीन हैं। ऐसे में अब इन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने के बाद पूरा परिवार बच्चों को सांत्वना देने में लगा है।
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बेटी को खोने पर फूट-फूटकर रोए दंपती, बोले-हर माह मनाते थे खुशी
धनकौड़ निवासी अजय व राधिका को यह हादसा पूरी जिंदगी का गम दे गया। छह माह की बेटी की मौत की खबर सुनते ही दंपती अस्पताल में ही फूट-फूट कर रोने लगे। उनका कहना था कि जिस बेटी के आने से परिवार में खुशियां आईं और हर माह बीतने पर उसे सजाकर वीडियो बनाते थे। उसे कैसे भूल पाएंगे।
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आठ साल से जा रही वैष्णो देवी, पहली बार परिवार संग जाने की खुशी थी डबल
घायल अनुराधा ने बताया कि वह आठ साल से वैष्णो देवी जा रही है। राजेंद्र से वैष्णो देवी जाने की बात हुई थी और एक माह से ही तैयारियां चल रही थीं। फोन कर काफी बात होती थी कि कैसे जाएंगे और क्या-क्या करेंगे। पहली बार पूरे परिवार संग वैष्णो देवी का मौका था तो दर्शन की खुशी डबल हो गई थी।
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फोटो नंबर - 53, 54,
पूर्व गृहमंत्री पहुंचे, मुख्यमंत्री से भी की बात पर नहीं मिली कोई मदद
आश्वासन के बाद भी जैसे-तैसे पैसों का जुगाड़ कर हजारों खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस से घायल पहुंचे अपने घर
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दिल्ली-अंबाला हाईवे पर हुए भीषण हादसे के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स पर संवेदना भी जताई। यहां तक कि हरियाणा के पूर्व गृहमंत्री अनिल विज ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को फोन कर हर संभव मदद करने की बात भी कही। मगर परिवार को कहीं से कोई मदद मिल नहीं सकी।
घायलों के उपचार व पोस्टमार्टम के बाद जब परिजन मृतकों के शव को कई किलोमीटर दूर अपने घर ले जाने लगे तो कोई सरकारी मदद नहीं मिली। यहां तक कि घायलों ने खुद अस्पताल में खड़ी प्राइवेट एंबुलेंसों सहित एक निजी गाड़ी को किराये पर लिया और उसमें तीन-तीन बैठकर घर गए। इस दौरान मृतकों के परिजनों ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उनका कहना था कि एक तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और ऊपर से मदद का आश्वासन मिलने के बाद भी सुध नहीं ली गई। जैसे-तैसे जुगाड़ कर छावनी नागरिक अस्पताल से करीब 10 लोग व आदेश अस्पताल से बाकी घायल एंबुलेंसों व एक निजी गाड़ी से अपने घर पहुंचे हालांकि अस्पताल में रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारी जरूर आए थे।
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राजेंद्र का कहना है कि क्या पता था कि जिस खुशी के लिए पूरे परिवार को इकट्ठा किया वो सफर मातम में बदल जाएगा। हादसे के दौरान राजेंद्र ने अपने जीजा विनोद, भाई मनोज कुमार व उसकी पत्नी गुड्डी, ताऊ का लड़का सतबीर, ससुर मेहर चन्द व दोहती दीप्ति उर्फ दीपिका को खो दिया। रिश्तेदार धीरज ने बताया कि राजिंद्र का भोपतपुर गांव में पुश्तैनी मकान है और वह चार भाई हैं। वह खुद प्रापर्टी डीलर का काम करता है। वैष्णो देवी के लिए भाई मनोज व नरेंद्र को संग लेकर गया था लेकिन एक भाई दीपक पत्नी की तबीयत ठीक होने के कारण नहीं गया था। परिजनों ने बताया कि ट्रैवलर में एक कुनबे के सात परिवार सवार थे।
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माता-पिता की हादसे में गई जान, बेटी उपासना लड़ रही जिंदगी की जंग
हादसे में भोपतपुर गांव निवासी मनोज व उसकी पत्नी गड्डी की मौत हो गई। दंपती के तीन बच्चे हैं और उसमें से एक लड़की उपासना भी गंभीर रूप से घायल है और अंबाला के आदेश अस्पताल में जिंदगी मौत के बीच जूझ रही है। जबकि दो बेटे पंकज व अनिकेश भी मामूली घायल हैं और अस्पताल में ही उपचाराधीन हैं। ऐसे में अब इन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने के बाद पूरा परिवार बच्चों को सांत्वना देने में लगा है।
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बेटी को खोने पर फूट-फूटकर रोए दंपती, बोले-हर माह मनाते थे खुशी
धनकौड़ निवासी अजय व राधिका को यह हादसा पूरी जिंदगी का गम दे गया। छह माह की बेटी की मौत की खबर सुनते ही दंपती अस्पताल में ही फूट-फूट कर रोने लगे। उनका कहना था कि जिस बेटी के आने से परिवार में खुशियां आईं और हर माह बीतने पर उसे सजाकर वीडियो बनाते थे। उसे कैसे भूल पाएंगे।
आठ साल से जा रही वैष्णो देवी, पहली बार परिवार संग जाने की खुशी थी डबल
घायल अनुराधा ने बताया कि वह आठ साल से वैष्णो देवी जा रही है। राजेंद्र से वैष्णो देवी जाने की बात हुई थी और एक माह से ही तैयारियां चल रही थीं। फोन कर काफी बात होती थी कि कैसे जाएंगे और क्या-क्या करेंगे। पहली बार पूरे परिवार संग वैष्णो देवी का मौका था तो दर्शन की खुशी डबल हो गई थी।
फोटो नंबर - 53, 54,
पूर्व गृहमंत्री पहुंचे, मुख्यमंत्री से भी की बात पर नहीं मिली कोई मदद
आश्वासन के बाद भी जैसे-तैसे पैसों का जुगाड़ कर हजारों खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस से घायल पहुंचे अपने घर
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दिल्ली-अंबाला हाईवे पर हुए भीषण हादसे के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स पर संवेदना भी जताई। यहां तक कि हरियाणा के पूर्व गृहमंत्री अनिल विज ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को फोन कर हर संभव मदद करने की बात भी कही। मगर परिवार को कहीं से कोई मदद मिल नहीं सकी।
घायलों के उपचार व पोस्टमार्टम के बाद जब परिजन मृतकों के शव को कई किलोमीटर दूर अपने घर ले जाने लगे तो कोई सरकारी मदद नहीं मिली। यहां तक कि घायलों ने खुद अस्पताल में खड़ी प्राइवेट एंबुलेंसों सहित एक निजी गाड़ी को किराये पर लिया और उसमें तीन-तीन बैठकर घर गए। इस दौरान मृतकों के परिजनों ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उनका कहना था कि एक तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और ऊपर से मदद का आश्वासन मिलने के बाद भी सुध नहीं ली गई। जैसे-तैसे जुगाड़ कर छावनी नागरिक अस्पताल से करीब 10 लोग व आदेश अस्पताल से बाकी घायल एंबुलेंसों व एक निजी गाड़ी से अपने घर पहुंचे हालांकि अस्पताल में रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारी जरूर आए थे।