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चुनाव में चेक की काम की कद्र : विज
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अंबाला। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि मैंने छावनी में विकास के मुद्दे पर विधानसभा चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में किसी सभा, मीटिंग और भाषण में कोई राष्ट्रीय या प्रदेशस्तरीय मुद्दा नहीं उठाया। मैंने चुनाव प्रचार में हर जगह विकास की बात कही। विज ने कहा कि मैं देखना चाहता था कि मेरी विधानसभा में काम करने की कितनी कद्र है।
मैंने चुनाव में कोई राष्ट्रीय नेता नहीं बुलाया जबकि कई स्थानों पर राष्ट्रीय नेता चुनाव प्रचार के लिए तीन-तीन बार आए। इस बार नीतिगत तरीके से मैनें चुनाव लड़ा व चुनाव में स्थानीय मुद्दों को ही घोषणापत्र में उठाया। मुझे अंबाला छावनी में करवाए गए विकास कार्यों पर पूरा भरोसा था और मैंने कभी भी जाति-पाति की राजनीति नहीं की जबकि उनके विरोधी यह कर रहे थे। कैबिनेट मंत्री अनिल विज देर शाम एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मैंने पहले सोच लिया था कि मैं जो दिन-रात काम करने के लिए मर रहा हूं मैं देखू कि मेरे मरने की यह शहर कीमत पाता है या नहीं। हो सकता है कि इस चुनाव में इस वजह से मैं हार भी जाता, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी था। मैंने कोरे काम के सिर पर चुनाव लड़ा, एक पेड़ वर्कर तक मेरे पास नहीं था। सारे हिंदुस्तान में में चैलेंज करके कह सकता हूं कि ऐसा चुनाव कहीं नहीं लड़ा गया होगा और मैंने बहुत आराम से योजनाबद्ध तरीके से चुनाव लड़ा।
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पहले होता था कि कुछ गिने-चुने हाथों में कमान चली जाती थी और काम बिखर जाता था। इस बार मैंने चुनाव से पहले छावनी में 14 जोन बनाए थे और सभी जोन प्रधान अपने-अपने जोन के प्रति जवाबदेह है।
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मैंने चुनाव में कोई राष्ट्रीय नेता नहीं बुलाया जबकि कई स्थानों पर राष्ट्रीय नेता चुनाव प्रचार के लिए तीन-तीन बार आए। इस बार नीतिगत तरीके से मैनें चुनाव लड़ा व चुनाव में स्थानीय मुद्दों को ही घोषणापत्र में उठाया। मुझे अंबाला छावनी में करवाए गए विकास कार्यों पर पूरा भरोसा था और मैंने कभी भी जाति-पाति की राजनीति नहीं की जबकि उनके विरोधी यह कर रहे थे। कैबिनेट मंत्री अनिल विज देर शाम एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि मैंने पहले सोच लिया था कि मैं जो दिन-रात काम करने के लिए मर रहा हूं मैं देखू कि मेरे मरने की यह शहर कीमत पाता है या नहीं। हो सकता है कि इस चुनाव में इस वजह से मैं हार भी जाता, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी था। मैंने कोरे काम के सिर पर चुनाव लड़ा, एक पेड़ वर्कर तक मेरे पास नहीं था। सारे हिंदुस्तान में में चैलेंज करके कह सकता हूं कि ऐसा चुनाव कहीं नहीं लड़ा गया होगा और मैंने बहुत आराम से योजनाबद्ध तरीके से चुनाव लड़ा।
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पहले होता था कि कुछ गिने-चुने हाथों में कमान चली जाती थी और काम बिखर जाता था। इस बार मैंने चुनाव से पहले छावनी में 14 जोन बनाए थे और सभी जोन प्रधान अपने-अपने जोन के प्रति जवाबदेह है।