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Ambala News: फर्जी आधार पर बच्चों की तस्करी का खेल
Fri, 22 Aug 2025 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 22 Aug 2025 02:22 AM IST
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अंबाला। फर्जी आधार कार्ड के सहारे बाल तस्करी को अंजाम देने की कोशिश वीरवार को नाकाम हो गई। जब गुप्त सूचना के आधार पर जिला युवा विकास संगठन सहित सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन नंबर 12408 कर्मभूमि एक्सप्रेस को खंगाला तो इस खेल का खुलासा हो गया।
सुनियोजित ढंग से इस तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की गई, लेकिन जब सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन से रेस्क्यू किए गए बच्चों के आधार कार्ड को खंगाला तो वह फर्जी पाए गए। बच्चों ने बताया कि वह कटिहार, आजमनगर, खगरिया व बेगूसराय के रहने वाले हैं।
बाल तस्करी के खेल को सुरक्षा एजेंसियों से बचाने के लिए सरगना ने आधार कार्ड में बच्चों की उम्र 18 वर्ष दिखाई। बाकायदा उन्हें ट्रेन का टिकट भी दिया गया और बचाव के लिए ज्ञान भी दिया गया। आधार कार्ड जून 2025 के बने हुए थे जोकि देखने मात्र से ही फोटो कॉपी लग रहे थे। आधार कार्ड में बच्चों की जन्मतिथि वर्ष 2007 दर्शायी गई ताकि बालिग देखकर उन्हें कोई पकड़े नहीं। लेकिन जब आधार कार्ड स्कैन किए गए तो उनका डाटा खुल ही नहीं पाया, जबकि हकीकत में संरक्षण में लिए गए बच्चों की उम्र 13 से 17 साल के बीच है।
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प्राथमिक जानकारी में कुछ बच्चों ने बताया कि एक व्यक्ति उनके घर आया था और उसने कुछ रुपये माता-पिता को भी दिए थे। वहीं पुलिस से बचने के लिए उसने आधार कार्ड बनाने की बात कही थी और माता-पिता से कुछ दस्तावेज भी लिए थे। ट्रेन में सवार होने से कुछ समय पहले उसने रेलवे स्टेशन के नजदीक ही उन्हें आधार कार्ड व ट्रेन का टिकट दिया और वह खुद किसी अन्य डिब्बे में बैठ गया, बच्चों के सभी आधार कार्ड बिहार राज्य में बनाए गए हैं।
ट्रेन में 24 बच्चों के तस्करी की सूचना थी मगर ट्रेन के सात मिनट के ठहराव के दौरान 10 बच्चों को ही संरक्षण में लिया जा सका। जिला युवा विकास संगठन को सूचना मिली थी कि बच्चों को अलग-अलग कोच में बैठाया गया है। ट्रेन के इंजन से पीछे बोगी नंबर चार में सीट नंबर 10 से 18 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर पांच में सीट नंबर 9 से 20 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर छह में 8 से 15 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर आठ में सीट नंबर 10 से 15 के बीच तीन बच्चे, बोगी नंबर 12 में 10 से 15 के बीच तीन बच्चे और बोगी नंबर 14 में चार बच्चे एक साथ बैठे हुए हैं।
27 फरवरी बचपन बचाओ आंदोलन की टीम ने अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट पर जानकारी दी थी कि बाल तस्करी के तहत कुछ बच्चों को ट्रेन नंबर 12407 कर्मभूमि एक्सप्रेस द्वारा बिहार से अमृतसर मजदूरी कराने हेतु ले जाया जा रहा है। सूचना पर आरपीएफ की टीम ने ट्रेन में सवार होकर 13 बच्चों को शक के आधार पर संरक्षण में लेकर लुधियाना स्टेशन पर उतारा था। प्राथमिक पूछताछ में आठ बच्चों ने बताया कि उन्हें जबरदस्ती बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था।
संगठन से जानकारी मिली थी कि लगभग 24 बच्चों को बाल तस्करी के तहत लुधियाना की फैक्टरी में ले जाया जा रहा है। अंबाला पहुंचने पर जब ट्रेन की जांच की गई तो इसमें से 10 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। बच्चों के पास मिले आधार कार्ड नकली पाए गए। मामले में आगामी कार्यवाही संगठन प्रबंधन द्वारा की जा रही है।
- रविंदर सिंह, प्रभारी आरपीएफ अंबाला।
बाल तस्करी से जुड़े सरगना तक पहुंचने के प्रयास किए जाएंगे ताकि इस पर लगाम लगाई जा सके। बच्चों के माता-पिता को भी जागरूक किया जाएगा।
-परमजीत सिंह बड़ौला, अध्यक्ष, जिला युवा विकास संगठन।
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सुनियोजित ढंग से इस तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की गई, लेकिन जब सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन से रेस्क्यू किए गए बच्चों के आधार कार्ड को खंगाला तो वह फर्जी पाए गए। बच्चों ने बताया कि वह कटिहार, आजमनगर, खगरिया व बेगूसराय के रहने वाले हैं।
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बाल तस्करी के खेल को सुरक्षा एजेंसियों से बचाने के लिए सरगना ने आधार कार्ड में बच्चों की उम्र 18 वर्ष दिखाई। बाकायदा उन्हें ट्रेन का टिकट भी दिया गया और बचाव के लिए ज्ञान भी दिया गया। आधार कार्ड जून 2025 के बने हुए थे जोकि देखने मात्र से ही फोटो कॉपी लग रहे थे। आधार कार्ड में बच्चों की जन्मतिथि वर्ष 2007 दर्शायी गई ताकि बालिग देखकर उन्हें कोई पकड़े नहीं। लेकिन जब आधार कार्ड स्कैन किए गए तो उनका डाटा खुल ही नहीं पाया, जबकि हकीकत में संरक्षण में लिए गए बच्चों की उम्र 13 से 17 साल के बीच है।
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प्राथमिक जानकारी में कुछ बच्चों ने बताया कि एक व्यक्ति उनके घर आया था और उसने कुछ रुपये माता-पिता को भी दिए थे। वहीं पुलिस से बचने के लिए उसने आधार कार्ड बनाने की बात कही थी और माता-पिता से कुछ दस्तावेज भी लिए थे। ट्रेन में सवार होने से कुछ समय पहले उसने रेलवे स्टेशन के नजदीक ही उन्हें आधार कार्ड व ट्रेन का टिकट दिया और वह खुद किसी अन्य डिब्बे में बैठ गया, बच्चों के सभी आधार कार्ड बिहार राज्य में बनाए गए हैं।
ट्रेन में 24 बच्चों के तस्करी की सूचना थी मगर ट्रेन के सात मिनट के ठहराव के दौरान 10 बच्चों को ही संरक्षण में लिया जा सका। जिला युवा विकास संगठन को सूचना मिली थी कि बच्चों को अलग-अलग कोच में बैठाया गया है। ट्रेन के इंजन से पीछे बोगी नंबर चार में सीट नंबर 10 से 18 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर पांच में सीट नंबर 9 से 20 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर छह में 8 से 15 के बीच चार बच्चे, बोगी नंबर आठ में सीट नंबर 10 से 15 के बीच तीन बच्चे, बोगी नंबर 12 में 10 से 15 के बीच तीन बच्चे और बोगी नंबर 14 में चार बच्चे एक साथ बैठे हुए हैं।
27 फरवरी बचपन बचाओ आंदोलन की टीम ने अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट पर जानकारी दी थी कि बाल तस्करी के तहत कुछ बच्चों को ट्रेन नंबर 12407 कर्मभूमि एक्सप्रेस द्वारा बिहार से अमृतसर मजदूरी कराने हेतु ले जाया जा रहा है। सूचना पर आरपीएफ की टीम ने ट्रेन में सवार होकर 13 बच्चों को शक के आधार पर संरक्षण में लेकर लुधियाना स्टेशन पर उतारा था। प्राथमिक पूछताछ में आठ बच्चों ने बताया कि उन्हें जबरदस्ती बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था।
संगठन से जानकारी मिली थी कि लगभग 24 बच्चों को बाल तस्करी के तहत लुधियाना की फैक्टरी में ले जाया जा रहा है। अंबाला पहुंचने पर जब ट्रेन की जांच की गई तो इसमें से 10 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। बच्चों के पास मिले आधार कार्ड नकली पाए गए। मामले में आगामी कार्यवाही संगठन प्रबंधन द्वारा की जा रही है।
- रविंदर सिंह, प्रभारी आरपीएफ अंबाला।
बाल तस्करी से जुड़े सरगना तक पहुंचने के प्रयास किए जाएंगे ताकि इस पर लगाम लगाई जा सके। बच्चों के माता-पिता को भी जागरूक किया जाएगा।
-परमजीत सिंह बड़ौला, अध्यक्ष, जिला युवा विकास संगठन।