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Ambala News: बुजुर्गों के पास योजनाओं की जानकारी नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2024 05:05 AM IST
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The elderly do not have information about the schemes
अंबाला। अपनों द्वारा छोडे़ जाने या फिर घर से निकाले जाने का दर्द अपना घर (वृद्धाश्रम ) में रहने वाले बुजुर्गों के अलावा कोई ओर नहीं समझ सकता। इस वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्ग आपस में मिल जुलकर रहते हैं और सुखदुख में एक दूसरे का सहारा बनते हैं। अंबाला छावनी में रेडक्राॅस सोसाइटी की ओर से संचालित अपना घर (वृद्धाश्रम ) में कुल 17 लोग रहते हैं। इनमें 12 बुजुर्ग हैं और एक ही परिवार के पांच सदस्य हैं। इन 12 बुजुर्गों में चार बुजुर्गों की पेंशन लगी हुई हैं। इसके अलावा आठ बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके अभी तक आधार कार्ड, वोटर कार्ड और परिवार पहचान पत्र ही नहीं बने हैं। यह बुजुर्ग कई बार आधार कार्ड और वोटर कार्ड के लिए आवेदन कर चुके हैं मगर अभी तक उन्हें यह सेवा नहीं मिली। इसकी कमी के कारण वह योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं।
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आवेदन के बाद भी नहीं आया वोटर कार्ड
सुमनलता ने बताया कि वह 60 साल की हैं और वह तीन साल से अपना घर में रह रही हैं। उन्होंने कई बार वोटर कार्ड के लिए आवेदन किया है मगर आज तक वोटर कार्ड नहीं मिला। बुजुर्गों को यह सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी तो वह कैसे योजनाओं का लाभ लेंगे।
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76 साल हो गई उम्र नहीं लगी पेंशन
मनमोहन सिंह ने बताया कि उनकी उम्र 76 साल हो गई है। तीन साल से वह अपना घर में रह रहे हैं। घरवालों ने घर से निकाल दिया था। घरवाले उनके परिवार पहचान पत्र पर राशन ले रहे हैं। आज तक पेंशन भी नहीं लगी है।
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दोनों किडनी खराब प्रशासन के कारण निशुल्क हो रहा डायलिसिस
जोगिंद्र सिंह ने बताया कि उनकी उम्र 47 वर्ष है। प्रशासन के सहयोग से डायलिसिस फ्री हो रहा है। लेकिन दवा और आने जाने का खर्चा पूरा नहीं हो रहा है अगर पेंशन लग जाती तो अपने आप दवा का खर्चा उठा सकते थे। समस्या यह है कि लोगों को छोटे-छोटे कार्यों की जानकारी नहीं है।
नहीं बना आधार कार्ड
पटियाला के गांव कोरजी वाला निवासी ज्ञान सिंह ने बताया कि वह 73 साल के हैं। 11 साल से वह अपना घर में रह रहे हैं। वह अपना घर में कुक का काम करते हैं। तीन से चार बार वह आधार कार्ड के लिए आवेदन कर चुके हैं मगर अभी तक उनका आधार कार्ड ही नहीं बना है।

आधार कार्ड तक नहीं है बुजुर्ग महिला के पास
राजकुमारी ने बताया कि वह 70 वर्ष की हैं। तीन साल हो गए हैं अपना घर में रहते हुए पति की मौत के बाद वह लाडवा में घर में काम करती थी और वहीं रहती थी काम नहीं होने पर मकान मालिक गुरुद्वारे छोड़ आया। गुरुद्वारे से पुलिस ने अपना घर में छोड़ दिया तब से यहीं रह रही हैं। उसके पास कोई भी कागज नहीं है।
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