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हरि कथा करने वाले भक्त श्रेष्ठ : साक्षी गोपाल
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शहर के सेक्टर-9 स्थित अग्रवाल भवन में श्रीमद् भागवत कथा में झूमते हुए श्रद्धालु।
अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर-9 स्थित अग्रवाल भवन में इस्कॉन कुरुक्षेत्र के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। जहां कथा में पहुंचे साक्षी गोपाल दास महाराज का इस्कॉन अंबाला शहर के सदस्यों की ओर से स्वागत किया।
इस मौके पर इस्कॉन सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार में इस्कॉन कुरुक्षेत्र के नेतृत्व में श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का आयोजन भक्तों की ओर से श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। कथा के समापन पर सभी भक्तों के लिए भंडारा प्रसाद की व्यवस्था की गई। कथा से पूर्व सर्वप्रथम भक्तों की ओर से श्रीमद् भागवत महापुराण पर पुष्प अर्पित किए गए, वहीं कथा व्यास साक्षी गोपाल दास महाराज का भी विधिवत पुष्प मालाओं से अभिनंदन किया गया। कथा का शुभारंभ पंडितों ने मंत्रोच्चारण कर श्रीगणेश वंदना से प्रारंभ किया गया।
जहां कथा व्यास महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन मृत्यु के सागर को पार करने के लिए एक नाव की भांति है, जिससे मनुष्य जीवन में हमें भगवान के प्रति प्रेम और दुनिया के प्रति वैराग्य सिखाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य के जीवन को और ज्यादा सरल बनाने के उद्देश्य से उनकी आत्माओं का शुद्धिकरण करने के लिए ग्रंथों के माध्यम से अनुकूल करने का विशेष उपाय किया हुआ है, मनुष्य जीवन बहुत ही दुर्लभ है। मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए सत्संग ही सबसे बड़ा साधन माना गया है। जो मनुष्य हरि की कथा करते हैं, वह श्रेष्ठ है।
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भगवान की कृपा के बिना भक्तों की संगत नहीं मिल सकती। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हर समय हर जगह पर भगवान की कथा से आधारित चर्चा करते हैं और किसी भी वाक्य की व्याख्यान क्यों न हो, वह भगवान का ही गुणगान करते हैं। उन भक्तों का दर्शन अति दुर्लभ है और जो व्यक्ति भगवान के दासों का दास बन जाता है। वह भगवान को अति प्रिय होते हैं। भगवान कहते हैं कि मेरे सभी भक्तजन सरल और शांत स्वभाव के होते हैं। जोकि स्वयं भगवान को अति प्रिय होते हैं। जो मनुष्य अपने सभी दुख कष्टों का निर्वाण करने के लिए भगवान को समर्पित कर देता है, भगवान उसके कष्टों की मुक्ति जरूर करते हैं।
भगवान अपने भक्तों की हर सुख सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। इस मौके पर इस्कॉन प्रचार समिति के सदस्यों सहित भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती में भाग लिया। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर इस्कॉन सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार में इस्कॉन कुरुक्षेत्र के नेतृत्व में श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का आयोजन भक्तों की ओर से श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। कथा के समापन पर सभी भक्तों के लिए भंडारा प्रसाद की व्यवस्था की गई। कथा से पूर्व सर्वप्रथम भक्तों की ओर से श्रीमद् भागवत महापुराण पर पुष्प अर्पित किए गए, वहीं कथा व्यास साक्षी गोपाल दास महाराज का भी विधिवत पुष्प मालाओं से अभिनंदन किया गया। कथा का शुभारंभ पंडितों ने मंत्रोच्चारण कर श्रीगणेश वंदना से प्रारंभ किया गया।
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जहां कथा व्यास महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन मृत्यु के सागर को पार करने के लिए एक नाव की भांति है, जिससे मनुष्य जीवन में हमें भगवान के प्रति प्रेम और दुनिया के प्रति वैराग्य सिखाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य के जीवन को और ज्यादा सरल बनाने के उद्देश्य से उनकी आत्माओं का शुद्धिकरण करने के लिए ग्रंथों के माध्यम से अनुकूल करने का विशेष उपाय किया हुआ है, मनुष्य जीवन बहुत ही दुर्लभ है। मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए सत्संग ही सबसे बड़ा साधन माना गया है। जो मनुष्य हरि की कथा करते हैं, वह श्रेष्ठ है।
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भगवान की कृपा के बिना भक्तों की संगत नहीं मिल सकती। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हर समय हर जगह पर भगवान की कथा से आधारित चर्चा करते हैं और किसी भी वाक्य की व्याख्यान क्यों न हो, वह भगवान का ही गुणगान करते हैं। उन भक्तों का दर्शन अति दुर्लभ है और जो व्यक्ति भगवान के दासों का दास बन जाता है। वह भगवान को अति प्रिय होते हैं। भगवान कहते हैं कि मेरे सभी भक्तजन सरल और शांत स्वभाव के होते हैं। जोकि स्वयं भगवान को अति प्रिय होते हैं। जो मनुष्य अपने सभी दुख कष्टों का निर्वाण करने के लिए भगवान को समर्पित कर देता है, भगवान उसके कष्टों की मुक्ति जरूर करते हैं।
भगवान अपने भक्तों की हर सुख सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। इस मौके पर इस्कॉन प्रचार समिति के सदस्यों सहित भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती में भाग लिया। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।