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Ambala News: विभाग सिर्फ पत्र लिखने तक ही सीमित, ज्यादातर स्टोर पर बिक चुकी किताबें
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अंबाला सिटी। नया सत्र शुरू हुए 8 दिन बीत चुके हैं। अभी तक शिक्षा विभाग अधिकारियों ने जिले में स्टोर और स्कूल में किताबें बेचने वालों पर शिकंजा नहीं कसा। जिसका खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं विभाग अनाधिकृत स्कूलों की सूची भी जारी कर चुका है, लेकिन इन स्कूलों में दाखिले निरंतर जारी हैं। यह स्कूल अभिभावकों को महंगी किताब, कॉपी, मील, बैग की पर्ची थमा रहे हैं, जबकि विभाग को शिकायत का इंतजार है। विभाग ने अपने स्तर पर स्कूलों की चेकिंग नहीं की है।
अंग्रेजी डिक्शनरी भी दी जा रही, इसकी कीमत 500 रुपये तक
निजी स्कूल जिन स्टोर संचालकों के पास अभिभावकों को भेज रहे हैं। वह स्टोर संचालक अभिभावकों को किताबें व कॉपियां तो दे ही रहे हैं। साथ ही अन्य सामग्री जैसे डिक्शनरी भी साथ दी जा रही है। इन रेफरेंस किताबों की कीमत 500 रुपये तक है।
नर्सरी विंग में किताबों के साथ बैग भी दिए जा रहे
एक अभिभावक ने बताया कि निजी स्कूल नर्सरी कक्षा के बच्चों के लिए किताबों व कॉपी के साथ बैग भी दे रहे हैं। इस बैग की कीमत 500 रुपये तक रखी गई है। इसमें पंजीकरण फीस 500 रुपये, दाखिला फीस 5 हजार रुपये, वार्षिक फीस 9500, तिमाही फीस 10 हजार 200, तिमासी मील 3 हजार रुपये, किताबें 2 हजार रुपये, बैग 500 रुपये का दिया जा रहा है। यह गलत है।
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किताबें व कॉपी और अन्य सामान में लूट चल रही : महाजन
कांग्रेस नेता अतुल महाजन ने बताया कि किताबें व कॉपी और अन्य सामान में लूट चल रही है। मनचाही कीमत अभिभावकों से वसूली रही है। वर्दी भी मनचाही दाम पर मिल रही है। निजी स्कूल जिस दुकानदार के पास भेज रहे हैं, उसी दुकानदार के पास यह किताबें व अन्य सामग्री मिल रही है। इसमें कमिशन का मोटा खेल है। यह सब मिलीभगत से एक ही दुकानदार या स्टोर को ठेका दिया गया है। इस पर सरकार की ओर से आंखें बंद करना गंभीर बात है। उनके पास दूसरी कक्षा का बिल 2290 रुपये का पहुंचा। सरकार से मांग करता हूं कि इस खेल पर लगाम लगाई जाए।
वर्जन
एनसीईआरटी की किताबों की बाजार में कमी रहती है। हर स्कूल का सिलेबस ही उसकी विशेषता होता है। इसी कारण अच्छे लेखकों की किताबें स्कूल में लगाई जाती है ताकि शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी हो सके। नियम है कि निजी स्कूल अपने प्रांगण में किताबें व वर्दी नहीं बेच सकते और न ही किसी एक स्टोर पर खरीदने के लिए बाध्य कर सकते हैं।
सौरभ कपूर, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेस।
वर्जन
अगर किसी स्कूल की किताब व कॉपी बेचने की शिकायत आती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सभी खंड बीईओ को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह निजी स्कूलों की चेकिंग करें। अगर कोई शिकायत या समस्या आती है तो उस पर कार्रवाई करते हुए समाधान किया जाए। इसको लेकर पत्र जारी किया गया है।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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अंग्रेजी डिक्शनरी भी दी जा रही, इसकी कीमत 500 रुपये तक
निजी स्कूल जिन स्टोर संचालकों के पास अभिभावकों को भेज रहे हैं। वह स्टोर संचालक अभिभावकों को किताबें व कॉपियां तो दे ही रहे हैं। साथ ही अन्य सामग्री जैसे डिक्शनरी भी साथ दी जा रही है। इन रेफरेंस किताबों की कीमत 500 रुपये तक है।
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नर्सरी विंग में किताबों के साथ बैग भी दिए जा रहे
एक अभिभावक ने बताया कि निजी स्कूल नर्सरी कक्षा के बच्चों के लिए किताबों व कॉपी के साथ बैग भी दे रहे हैं। इस बैग की कीमत 500 रुपये तक रखी गई है। इसमें पंजीकरण फीस 500 रुपये, दाखिला फीस 5 हजार रुपये, वार्षिक फीस 9500, तिमाही फीस 10 हजार 200, तिमासी मील 3 हजार रुपये, किताबें 2 हजार रुपये, बैग 500 रुपये का दिया जा रहा है। यह गलत है।
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किताबें व कॉपी और अन्य सामान में लूट चल रही : महाजन
कांग्रेस नेता अतुल महाजन ने बताया कि किताबें व कॉपी और अन्य सामान में लूट चल रही है। मनचाही कीमत अभिभावकों से वसूली रही है। वर्दी भी मनचाही दाम पर मिल रही है। निजी स्कूल जिस दुकानदार के पास भेज रहे हैं, उसी दुकानदार के पास यह किताबें व अन्य सामग्री मिल रही है। इसमें कमिशन का मोटा खेल है। यह सब मिलीभगत से एक ही दुकानदार या स्टोर को ठेका दिया गया है। इस पर सरकार की ओर से आंखें बंद करना गंभीर बात है। उनके पास दूसरी कक्षा का बिल 2290 रुपये का पहुंचा। सरकार से मांग करता हूं कि इस खेल पर लगाम लगाई जाए।
वर्जन
एनसीईआरटी की किताबों की बाजार में कमी रहती है। हर स्कूल का सिलेबस ही उसकी विशेषता होता है। इसी कारण अच्छे लेखकों की किताबें स्कूल में लगाई जाती है ताकि शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी हो सके। नियम है कि निजी स्कूल अपने प्रांगण में किताबें व वर्दी नहीं बेच सकते और न ही किसी एक स्टोर पर खरीदने के लिए बाध्य कर सकते हैं।
सौरभ कपूर, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेस।
वर्जन
अगर किसी स्कूल की किताब व कॉपी बेचने की शिकायत आती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सभी खंड बीईओ को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह निजी स्कूलों की चेकिंग करें। अगर कोई शिकायत या समस्या आती है तो उस पर कार्रवाई करते हुए समाधान किया जाए। इसको लेकर पत्र जारी किया गया है।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।