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Ambala News: कोर्ट ने पलटा रजिस्ट्रार जनरल का फैसला
Sat, 09 May 2026 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 09 May 2026 02:56 AM IST
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अंबाला। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रवाल सभा अंबाला कैंट के चुनाव के मामले में रजिस्ट्रार जनरल द्वारा चुनाव रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने और रिव्यू याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद आदेश दिया कि अब रजिस्ट्रार जनरल को सभी पक्षों को सुनने के बाद चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से आदेश जारी करने होंगे। जब तक नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक सभा के चुनाव नहीं कराए जाएंगे।
अग्रवाल सभा की कार्यकारी समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 28 अप्रैल, 2021 को एक एडहॉक समिति का गठन किया गया था। अप्रैल 2025 में इस समिति ने कॉलेजियम के गठन और सदस्यता रजिस्टर को लेकर निर्णय लिया, जिसे जिला रजिस्ट्रार और बाद में राज्य रजिस्ट्रार से मंजूरी मिल गई थी। चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और 50 में से 32 कॉलेजियम सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए थे।
इसी बीच, उमेश गुप्ता और अन्य सदस्यों ने रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील दायर की। जब इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका डाली गई, तो उसे भी बिना सुनवाई के खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता सुभाष चंद गोयल की ओर से वकील अवनीश मित्तल और अपर्णा सिंघल ने दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। सुनवाई के दौरान सरकार और प्रतिवादी पक्ष ने भी इस बात पर सहमति जताई कि अगर आदेश रद्द कर दोबारा सुनवाई की जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। संवाद
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अग्रवाल सभा की कार्यकारी समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 28 अप्रैल, 2021 को एक एडहॉक समिति का गठन किया गया था। अप्रैल 2025 में इस समिति ने कॉलेजियम के गठन और सदस्यता रजिस्टर को लेकर निर्णय लिया, जिसे जिला रजिस्ट्रार और बाद में राज्य रजिस्ट्रार से मंजूरी मिल गई थी। चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और 50 में से 32 कॉलेजियम सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए थे।
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इसी बीच, उमेश गुप्ता और अन्य सदस्यों ने रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील दायर की। जब इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका डाली गई, तो उसे भी बिना सुनवाई के खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता सुभाष चंद गोयल की ओर से वकील अवनीश मित्तल और अपर्णा सिंघल ने दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। सुनवाई के दौरान सरकार और प्रतिवादी पक्ष ने भी इस बात पर सहमति जताई कि अगर आदेश रद्द कर दोबारा सुनवाई की जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। संवाद
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