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Ambala News: थैलेसीमिया के मरीजों को मिलेगा नया वार्ड
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अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल की चौथी मंजिल पर तैयार हो रहा थैलेसीमिया मरीजों के लिए नया वार्ड: स
अंबाला। छावनी नागरिक अस्पताल में आने वाले थैलेसीमिया के मरीजों को डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जल्द अपना वार्ड मिलने जा रहा है। यह वार्ड अस्पताल के आईपीडी ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर बनाया जा रहा है। अभी इस वार्ड की तैयारियां की जा रही है। मौजूदा समय में यह स्थिति है कि इन मरीजों को उपचार के लिए प्राइवेट वार्ड के एक कमरे में जगह दी गई है।
कई बार अलग-अलग वार्ड तो ब्लड बैंक तक में उनका उपचार किया जाता है। ऐसे में उन्हें मजबूरन इधर-उधर भटकना पड़ता था। अब उन्हें इस परेशानी से छुटकारा मिलेगा। अलग से वार्ड बनाने को लेकर कई बार मरीज व उनके संग आने वाले तीमारदार भी मांग उठा चुके थे।
हर बार उन्हें महज आश्वासन ही मिलता था। बता दें कि मौजूदा समय में 25 थैलेसीमिया के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वार्ड के बाहर पेंटिंग के अलावा भीतर बैड लगाए जा रहे हैं। एल्युमिनियम शीट से तैयार किए गए इस वार्ड में ही इन मरीजों को उपचार दिया जाएगा।
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खून चढ़ाने के लिए आते हैं मरीज
दरअसल, थैलेसीमिया रोग एक तरह का रक्त विकार है। इसमें बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सही ढंग से नहीं हो पाता है। इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। इस कारण इन बच्चों को हर 21 दिन बाद कम से कम एक यूनिट रक्त की जरूरत होती है। इसलिए समय-समय अस्पताल में इस तरह से मरीज व उनके तीमारदार आते हैं। खून चढ़वाने के बाद बाद चले जाते हैं। इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी। इन मरीजों को दवाएं भी दी जाती है।
वर्जन
नागरिक अस्पतालों में थैलेसीमिया के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। छावनी अस्पताल में अलग से वार्ड बनने से मरीजों को परेशानी नहीं होगी।
डॉ. राकेश सहल, सीएमओ, अंबाला।
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कई बार अलग-अलग वार्ड तो ब्लड बैंक तक में उनका उपचार किया जाता है। ऐसे में उन्हें मजबूरन इधर-उधर भटकना पड़ता था। अब उन्हें इस परेशानी से छुटकारा मिलेगा। अलग से वार्ड बनाने को लेकर कई बार मरीज व उनके संग आने वाले तीमारदार भी मांग उठा चुके थे।
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हर बार उन्हें महज आश्वासन ही मिलता था। बता दें कि मौजूदा समय में 25 थैलेसीमिया के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वार्ड के बाहर पेंटिंग के अलावा भीतर बैड लगाए जा रहे हैं। एल्युमिनियम शीट से तैयार किए गए इस वार्ड में ही इन मरीजों को उपचार दिया जाएगा।
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खून चढ़ाने के लिए आते हैं मरीज
दरअसल, थैलेसीमिया रोग एक तरह का रक्त विकार है। इसमें बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सही ढंग से नहीं हो पाता है। इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। इस कारण इन बच्चों को हर 21 दिन बाद कम से कम एक यूनिट रक्त की जरूरत होती है। इसलिए समय-समय अस्पताल में इस तरह से मरीज व उनके तीमारदार आते हैं। खून चढ़वाने के बाद बाद चले जाते हैं। इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी। इन मरीजों को दवाएं भी दी जाती है।
वर्जन
नागरिक अस्पतालों में थैलेसीमिया के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। छावनी अस्पताल में अलग से वार्ड बनने से मरीजों को परेशानी नहीं होगी।
डॉ. राकेश सहल, सीएमओ, अंबाला।