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Ambala News: हैंडबॉल नर्सरी में प्रशिक्षण ले नेशनल तक पहुंचा रहे बाॅल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Mar 2024 03:12 AM IST
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Taking training in handball nursery and taking balls to national level
अंबाला। खेल विभाग की तरफ से चल रही खेल नर्सरियों से खिलाड़ियों की फौज तैयार हो रही है। ऐसे ही छावनी के जीएमएन कॉलेज के मैदान में चल रही खेल विभाग की हैंडबॉल की खेल नर्सरी से निकलकर खिलाड़ियों ने स्कूल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान पदक भी झटके।
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बता दें कि पिछले दो साल से हैंडबॉल की खेल नर्सरी चल रही है। हर साल इस नर्सरी में ट्रायलों के बाद 25 खिलाड़ियों का चयन होता है। इन्हें न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि डाइट भी दी जाती है, जिससे कि आगे बढ़कर खेल के क्षेत्र में अपना नाम चमका सके।
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बता दें कि खेल नर्सरी एक अप्रैल से 31 जनवरी तक चलती है। जो अब बंद हो गई है। इसमें आठ से 19 साल तक के लड़के और लड़कियां शामिल हो सकती हैं। आठ से 14 साल के बच्चों को खेल विभाग की ओर से 1500 रुपये व 14 से 19 साल तक के बच्चों को दो हजार रुपये दिए जाते हैं। जिलाभर से बच्चे आकर ट्रायल देते हैं और उसमें से 25 खिलाड़ियों का चयन होता है।
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खेल नर्सरी से आया सुधार
छावनी के टुंडला निवासी 15 वर्षीय तनीष कश्यप ने बताया कि उसके पिता दुकान चलाते हैं। हैंडबॉल की खेल नर्सरी में भाग लेने के बाद उसके खेल में काफी सुधार आया है। बेहतर प्रशिक्षण की बदौलत ही वह केवीएस नेशनल में कांस्य पदक हासिल कर पाया। उसके अलावा जिला व राज्य, राष्ट्रीय स्तर पर भी भाग ले चुका है।
हैंडबॉल से देशभर में करना है नाम रोशन
छावनी के तोपखाना निवासी अंकित ने बताया कि वह पिछले दो साल से खेल नर्सरी में रहकर प्रशिक्षण ले रहा है। पिता एयरफोर्स में थे और उनका 10 साल पहले ही देहांत हो चुका है। ऐसे में हैंडबॉल खेल से ही माता-पिता और अंबाला का देशभर में नाम रोशन करने का संकल्प लिया है। खेल नर्सरी में न केवल प्रशिक्षण मिल रहा है, बल्कि डाइट राशि से भी काफी सहारा मिलता है। वह नेशनल लैवल पर कई बार बेहतरीन प्रदर्शन कर पदक हासिल कर पाया है।
खेल नर्सरी में दूर हुई खामियां
सिटी के जंडली निवासी दीपक ने बताया कि उसने 2015 से हैंडबॉल खेल शुरू कर दिया था। खेल नर्सरी में दो साल से प्रशिक्षण ले रहा है। पहले जो छोटी-मोटी कमियां थी वो खेल नर्सरी में कोच द्वारा ठीक कर दी गई है। इसी के बदौलत दिसंबर 2023 को होने वाली जूनियर स्टेट में स्वर्ण पदक हासिल कर पाया है। जूनियर नेशनल का भी प्रतिभागी रह चुका है।
नर्सरी में बारीकियां सीखने को मिली
छावनी के पारस नगर निवासी प्रिंस कुमार ने बताया कि वो दो साल से नर्सरी में प्रशिक्षण ले रहा है लेकिन अब उसका आखिरी साल है। आठ साल से वह हैंडबॉल खेल रहा हूं। जूनियर, सीनियर, नेशनल और इंटर कॉलेज चैंपियनशिप खेल चुका हूं और इंटर कॉलेज में गोल्ड मैडल भी है। खेल नर्सरी में हैंडबॉल की कोच रमन से काफी बारीकियां सीखने को मिली।

वर्जन
खेल नर्सरियां शुरू होने से हैंडबॉल में नए-नए खिलाड़ी आते हैं और अपनी प्रतिभा को निखारने के बाद नेशनल स्तर पर भाग लेकर पदक झटक रहे हैं। प्रशिक्षण के अलावा एक खिलाड़ी को अपने खानपान यानी डाइट का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। खेल नर्सरी में खिलाड़ियों की डाइट भी दी जाती है।
रमनदीप जांगड़ा, कोच, हैंडबॉल
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