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Ambala News: अस्थि कलश लेकर पिता बोले- ऐसा कलंकी बेटा जन्म लेते ही मर जाता
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नारायणगढ़। नारायणगढ़-रायपुरानी सीमा के पास बने गांव रतौर में बुधवार को सुबह पिता ओम प्रकाश अपने रिश्तेदारों के साथ पहुंचे। यहां उन्होंने छोटे बेटे हरीश सहित अन्य परिजनों के चिता से फूल एकत्रित किए। फूल एकत्रित करते समय उनके हाथ कांप रहे थे।
उनके मुंह से एक ही शब्द निकला कि ऐसा कलंकी बेटा तो जन्म लेते ही मर जाता तो ठीक था, सब नाश कर दिया। इस दौरान 15 से अधिक गांव के लोग रतौर में इस किरया में साथ खड़े थे। वह बार-बार ओमप्रकाश को ढांढ़स बंधा रहे थे। कह रहे थे कि हिम्मत से काम लो। इसके बाद परिजनों के साथ एक गाड़ी में ओमप्रकाश यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज की तरफ निकल गए।
यहां पर दामाद और अन्य परिजनाें के साथ उन्होंने पूजा कर अस्थियां विसर्जित कीं और कहा कि अपनी दुनिया में खुश रहो। इस दौरान भी वह बहुत भावुक थे और उन्हें अन्य रिश्तेदार संभाल रहे थे। दरअसल मंगलवार को चंडीगढ़ पीजीआई से अपने दामाद विनोद कुमार के साथ बराड़ा के गांव थंबड़ आ गए थे। यहां भी कम बात कर रहे थे। पिता और बेटी काफी देर तक रोते रहे। मंगलवार तक भी निश्चित नहीं था कि वह अस्थि कलश लेने रतौर गांव में जाएंगे भी या नहीं, क्योंकि उन्हें वह हालात बार-बार परेशान कर रहे हैं।
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मगर सभी ने समझाया तो वह सुबह साढ़े आठ बजे रतौर गांव में रिश्तेदारों के साथ पहुंच गए। यहां अपने घर तक जाने में भी पिता ओम प्रकाश के हाथ कांप रहे थे। ग्रामीणों ने उन्हें साहस बंधाया और हिम्मत रखने को कहा। इस दौरान पिता ओमप्रकाश ने मांग की है कि इस मामले में संलिप्त सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिले।
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उनके मुंह से एक ही शब्द निकला कि ऐसा कलंकी बेटा तो जन्म लेते ही मर जाता तो ठीक था, सब नाश कर दिया। इस दौरान 15 से अधिक गांव के लोग रतौर में इस किरया में साथ खड़े थे। वह बार-बार ओमप्रकाश को ढांढ़स बंधा रहे थे। कह रहे थे कि हिम्मत से काम लो। इसके बाद परिजनों के साथ एक गाड़ी में ओमप्रकाश यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज की तरफ निकल गए।
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यहां पर दामाद और अन्य परिजनाें के साथ उन्होंने पूजा कर अस्थियां विसर्जित कीं और कहा कि अपनी दुनिया में खुश रहो। इस दौरान भी वह बहुत भावुक थे और उन्हें अन्य रिश्तेदार संभाल रहे थे। दरअसल मंगलवार को चंडीगढ़ पीजीआई से अपने दामाद विनोद कुमार के साथ बराड़ा के गांव थंबड़ आ गए थे। यहां भी कम बात कर रहे थे। पिता और बेटी काफी देर तक रोते रहे। मंगलवार तक भी निश्चित नहीं था कि वह अस्थि कलश लेने रतौर गांव में जाएंगे भी या नहीं, क्योंकि उन्हें वह हालात बार-बार परेशान कर रहे हैं।
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मगर सभी ने समझाया तो वह सुबह साढ़े आठ बजे रतौर गांव में रिश्तेदारों के साथ पहुंच गए। यहां अपने घर तक जाने में भी पिता ओम प्रकाश के हाथ कांप रहे थे। ग्रामीणों ने उन्हें साहस बंधाया और हिम्मत रखने को कहा। इस दौरान पिता ओमप्रकाश ने मांग की है कि इस मामले में संलिप्त सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिले।