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Ambala News: स्ट्रीट लाइटें लगी पर अंधेरा बरकरार
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अंबाला। अगर हम अपने घर में कुछ हजार रुपये का भी कार्य कराते हैं तो 10 बार सोचते हैं। कई जगह पूछते हैं, सलाह भी लेते हैं। मगर छावनी के नगर परिषद की कार्यशैली का अनोखा मामला सामने आया है। विभागीय अधिकारियों ने छावनी क्षेत्र को जगमग करने के लिए करीब 18 करोड़ से लगभग 12,000 से अधिक स्ट्रीट लाइटों का टेंडर जारी हुआ। वह भी 20 वाट की लाइटों के लिए। मगर जब ठेकेदार ने लाइटें लगाई और वह जलीं तो पर्याप्त रोशनी नहीं दे सकीं।
इस बात को खुद गृहमंत्री अनिल विज ने महसूस किया। मगर काम इतनी तेजी से चला कि जब तक इस बात का नगर परिषद को पता लगा तब तक 11000 से अधिक लाइटें ठेकेदार कंपनी लगा चुकी थी। ऐसे में अब दोबारा से गृहमंत्री ने इस मामले पर संज्ञान लिया तो नगर परिषद के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए।
टेंडर से पहले ही होना चाहिए था होमवर्क
हैरानी की बात तो यह है कि जिस समय लाइटें लगाने की तैयारी चल रही थी, उस समय अधिकारियों ने इस बात पर गौर ही नहीं किया कि क्या 20 वाट की लाइट पर्याप्त रोशनी दे भी पाएंगी या नहीं। अगर एक परीक्षण हो जाता तो शायद अब यहां प्रशासन फंसा हुआ नहीं दिखता।
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लाइटों के सैंपल भरने के निर्देश
दरअसल, 117 विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान शुक्रवार को छावनी के सर्किट हाउस में गृहमंत्री ने 20 वाट की लाइटों की पर्याप्त रोशनी नहीं होने का मुद्दा उठाया था। ऐसे में नगर परिषद के अधिकारियों से जवाब लिया तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने तो नियमानुसार 20 वाट की लाइटें लगाई हैं। यह उसके एग्रीमेंट में लिखा है।
अब 11000 से अधिक लाइटें लग गई हैं तो उन्हें बदलाया भी नहीं जा सकता है, क्योंकि इससे तो करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। फिर ठेकेदार कंपनी भी लाइटों को बदलने के लिए तैयार नहीं होगा और मामला लिटिगेशन में चला जाएगा। क्योंकि अगर ठेकेदार अधिक वाट वाली लाइटें लगाता है तो उसे काफी रुपये खर्च करने होंगे।
इसके बाद डीसी डाॅ. शालीन ने पूछा कि शेष कितनी लाइटें लगनी बाकी हैं तो नप अधिकारियों ने बताया कि 1000 लाइटें ही लगनी बाकी हैं। ऐसे में डीसी ने कहा कि कम से कम 1 हजार लाइटें तो अधिक वाट की लगाने के लिए ठेकेदार को कहो। मगर इस पर नप अधिकारियों ने कहा कि वह राजी नहीं होगा, क्योंकि अधिक वाट की लाइटें लगाने पर फिर खर्चा बढ़ जाएगा। ऐसे में नप प्रशासन यहां पर फंसा नजर आया।
पुलिस को सैंपल भरने के दिए निर्देश
इस मामले पर आईजी सिवास कविराज ने सलाह दी कि जो लाइटें लगी हैं, क्या वह वास्तव में 20 वाट की हैं। इसकी जांच भी करा लेनी चाहिए। इस पर गृहमंत्री ने भी सहमति जताई। इसके बाद डीसी ने नप अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इनमें से कुछ लाइटों के सैंपल पुलिस के पास टेस्ट के लिए भेजें। पुलिस अपनी लैब में सैंपल की जांच कराएगी। वहीं, सभी लाइटों को कुछ रेगुलर कर्मचारियों को लगाकर गिना भी जाए कि 11000 लाइटें वास्तव में लग भी गई हैं या नहीं।
सुभाष पार्क में सोलर लाइटें लगाने के इच्छुक
छावनी में सुभाष पार्क में सैकड़ों लोग रोजाना आते जाते हैं। गृहमंत्री अनिल विज भी खुद रोजाना यहां टहलने जाते हैं। ऐसे में उन्होने महसूस किया कि किसी दिन लाइट चली गई तो सुभाष पार्क में अंधेरा हो जाएगा और उस समय किसी ने कोई शरारत कर दी तो लोगों को दिखेगा भी नहीं। ऐसे में पार्क के कुछ कोनों पर सोलर लाइट लगाई जाए। इसको लेकर अधिकारियों का रास्ता निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
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इस बात को खुद गृहमंत्री अनिल विज ने महसूस किया। मगर काम इतनी तेजी से चला कि जब तक इस बात का नगर परिषद को पता लगा तब तक 11000 से अधिक लाइटें ठेकेदार कंपनी लगा चुकी थी। ऐसे में अब दोबारा से गृहमंत्री ने इस मामले पर संज्ञान लिया तो नगर परिषद के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए।
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टेंडर से पहले ही होना चाहिए था होमवर्क
हैरानी की बात तो यह है कि जिस समय लाइटें लगाने की तैयारी चल रही थी, उस समय अधिकारियों ने इस बात पर गौर ही नहीं किया कि क्या 20 वाट की लाइट पर्याप्त रोशनी दे भी पाएंगी या नहीं। अगर एक परीक्षण हो जाता तो शायद अब यहां प्रशासन फंसा हुआ नहीं दिखता।
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लाइटों के सैंपल भरने के निर्देश
दरअसल, 117 विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान शुक्रवार को छावनी के सर्किट हाउस में गृहमंत्री ने 20 वाट की लाइटों की पर्याप्त रोशनी नहीं होने का मुद्दा उठाया था। ऐसे में नगर परिषद के अधिकारियों से जवाब लिया तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने तो नियमानुसार 20 वाट की लाइटें लगाई हैं। यह उसके एग्रीमेंट में लिखा है।
अब 11000 से अधिक लाइटें लग गई हैं तो उन्हें बदलाया भी नहीं जा सकता है, क्योंकि इससे तो करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। फिर ठेकेदार कंपनी भी लाइटों को बदलने के लिए तैयार नहीं होगा और मामला लिटिगेशन में चला जाएगा। क्योंकि अगर ठेकेदार अधिक वाट वाली लाइटें लगाता है तो उसे काफी रुपये खर्च करने होंगे।
इसके बाद डीसी डाॅ. शालीन ने पूछा कि शेष कितनी लाइटें लगनी बाकी हैं तो नप अधिकारियों ने बताया कि 1000 लाइटें ही लगनी बाकी हैं। ऐसे में डीसी ने कहा कि कम से कम 1 हजार लाइटें तो अधिक वाट की लगाने के लिए ठेकेदार को कहो। मगर इस पर नप अधिकारियों ने कहा कि वह राजी नहीं होगा, क्योंकि अधिक वाट की लाइटें लगाने पर फिर खर्चा बढ़ जाएगा। ऐसे में नप प्रशासन यहां पर फंसा नजर आया।
पुलिस को सैंपल भरने के दिए निर्देश
इस मामले पर आईजी सिवास कविराज ने सलाह दी कि जो लाइटें लगी हैं, क्या वह वास्तव में 20 वाट की हैं। इसकी जांच भी करा लेनी चाहिए। इस पर गृहमंत्री ने भी सहमति जताई। इसके बाद डीसी ने नप अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इनमें से कुछ लाइटों के सैंपल पुलिस के पास टेस्ट के लिए भेजें। पुलिस अपनी लैब में सैंपल की जांच कराएगी। वहीं, सभी लाइटों को कुछ रेगुलर कर्मचारियों को लगाकर गिना भी जाए कि 11000 लाइटें वास्तव में लग भी गई हैं या नहीं।
सुभाष पार्क में सोलर लाइटें लगाने के इच्छुक
छावनी में सुभाष पार्क में सैकड़ों लोग रोजाना आते जाते हैं। गृहमंत्री अनिल विज भी खुद रोजाना यहां टहलने जाते हैं। ऐसे में उन्होने महसूस किया कि किसी दिन लाइट चली गई तो सुभाष पार्क में अंधेरा हो जाएगा और उस समय किसी ने कोई शरारत कर दी तो लोगों को दिखेगा भी नहीं। ऐसे में पार्क के कुछ कोनों पर सोलर लाइट लगाई जाए। इसको लेकर अधिकारियों का रास्ता निकालने के निर्देश दिए गए हैं।