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श्रवण, कीर्तन और चिंतन प्रभु प्राप्ति के तीन महासाधन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2022 01:15 AM IST
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Shravan, Kirtan and contemplation are the three great means of attaining the Lord
अंबाला सिटी। श्री कबीर जन कल्याण सेवाश्रम नगर खेड़ा मोती नगर में आयोजित ज्योर्तिलिंग शिवमहापुराण सप्ताह अमर कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने प्रभु भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि शिवपुराण विद्दवेश्वर संहिता में भगवान की कृपा प्राप्ति के तीन महासाधन बताए गए हैं। इसमें श्रवण, कीर्तन और चिंतन शामिल हैं। ‘श्रोत्रेण श्रवणं तस्य, वचसा कीर्तन तथा मनसा मननं तस्य, महा साधन मुच्यते’, अर्थात जीवन में जितना ज्यादा शिव कथा, श्रीराम कथा, श्रीकृष्ण कथा सुनने का अवसर मिले, ग्रहण करने की कोशिश करनी चाहिए, वहीं उस प्रभु का भजन कीर्तन वाणी से करते रहे और तीसरा मन से भगवान का स्मरण रखते हुए, उन्हीं का चिन्तन विचार करते रहना चाहिए।
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कथा से पूर्व बुधवार को सर्वप्रथम रजनीश गुप्ता, शीप गुप्ता, राजीव वर्मा, सीमा वर्मा, सरोज बाला, संजीव कबीर, तारोदेवी गुप्ता आदि ने शिवमहापुराण व कथा व्यास को पुष्पमालाएं पहनाई। शिव महापुराण द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य सनातन चैतन्य ने पयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा के बारे में बताया। उन्होंने कहा की महाराष्ट्र हिमगिरि पर्वत के समीप योग तपोनिष्ठ महर्षि गौतम रहते थे। उनकी ख्याति चारों दिशाओं में फैली हुई थी। उस क्षेत्र में बहुत से संत महात्मा रहते थे। किसी कारण सभी संत महात्मा गौतम से ईर्ष्या करने लगे। वे सभी ये सोचते कि गौतम को अपने स्थान से कैसे दूर किया जाए। इसलिए उन्होंने श्रीगणेश जी से सहायता मांगी। गणेश जी गाय का रूप बनाकर गौतम ऋषि के खेत की घास खाने लगे, गौतम ऋषि ने गाय को भगाने के लिए घास का तिनका उसके शरीर पर लगाया तो गाय मर गई।
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ऋषि गौतम को ये देखकर बहुत दुख हुआ। गो हत्या का आरोप लगाकर सभी ने उनको और उनकी धर्म पत्नी अहिल्या को वहां से भगा दिया गया। संतों ने ऋषि गौतम को बताया कि आप को इस पाप से मुक्ति तभी मिलेगी जब आप अपने पापों का व्याख्यान करते हुए ब्रह्मगिरि की 101 परिक्रमा करें और फिर गंगा जी को यहां प्रकट कर उसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करो, तभी शुद्धि होगी। गौतम ऋषि ने साधना की तो भगवान प्रसन्न होकर प्रकट हो गए। गौतम ने भगवान की स्तुति करते हुए कहा कि प्रभु आप यहां भक्तों के कल्याण के लिए शिवलिंग के रूप में स्थापित हो जाए।
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इस प्रकार भगवान हिमगिरि पर्वत पर पयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नाम से विराजमान हो गए। कथा में सहारनपुर से महंत गुरुमिलन शास्त्री महाराज व ब्रम्हचारी मंगल दास भी पहुंचे और मंच पर कथा व्यास आचार्य को तिलक लगाकर और उनको अंगवस्त्र व पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। कथा में विशेष रुप से शिव मंदिर रणजीत नगर समिति सदस्य बलदेवराज शर्मा प्रधान, राजकुमार जोशी प्रधान, बबली शर्मा, गुरदयाल सन्धु, गुरूसेवक सन्धु, गुरजिन्द्र सिंह चिन्टू, पवन वडेरा, सूरज प्रकाश गोयल, शीप गुप्ता, सरोज बाला, सीमा वर्मा, राजकुमार शर्मा, संजीव कुमार कबीर, राजीव वर्मा, नरेश कुमार, सुरभी अरोड़ा, सुनीता वर्मा, नीलम सैनी उपस्थित रहीं।
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