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Ambala News: मिट्टी की किल्लत राजमार्ग निर्माण में रोड़ा
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अंबाला शामली राजमार्ग । आर्काइव
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। अंबाला से शामली तक जाने वाले 120 किलोमीटर के राजमार्ग पर प्रधानमंत्री कार्यालय से निगरानी रखी जा रही है। इस परियोजना का पीएम नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया था। ऐसे में परियोजना से संबंधित अधिकारियों को भी समीक्षा के लिए पीएमओ के अधिकारियों को भी स्टेटस बताना होता है। मगर इस परियोजना के लिए मिट्टी की किल्लत मुसीबत बन गई है।
अंबाला-शामली राजमार्ग सहित अन्य निर्माणाधीन परियोजनाओं में मिट्टी की किल्लत सामने आ रही है। यही हाल अंबाला-शामली राजमार्ग परियोजना का है। इस राजमार्ग को तीन कंपनियों की ओर से बनाया जा रहा है। अगर पूरी परियोजना में मिट्टी का लागत देखें तो करीब 20 फीसद होगी। मगर मौजूदा समय में हालात यह हैं कि 40 रुपये क्यूबिक मीटर में आने वाली मिट्टी अब दूर स्थान से लानी पड़ रही है। इसकी खोदाई और सफाई का काम करने के बाद 350 रुपये क्यूबिक मीटर तक दाम पहुंच रहे हैं। ऐसे में परियोजना की लागत पर ठेका कंपनियों पर भार बढ़ रहा है। इससे कंपनियाें को नुकसान हो रहा है।
मिट्टी की कमी देरी का कारण
खास बात है कि परियोजना को बनाने के लिए मिट्टी अत्यंत आवश्यक है। महंगी मिट्टी तो फिर भी खरीदी जा सकती है मगर जब मिट्टी ही पर्याप्त मात्रा में नहीं मिले तो परियोजना में तेजी लाना किसी भी कंपनी के लिए मुश्किल हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो यही कारण है कि परियाेजना पर काम तो चल रहा है मगर मिट्टी की उपलब्धता सीमित होने के कारण काम में उतनी गति नहीं है।
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अंबाला में खनन के भरोसे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को उम्मीद है कि बाढ़ के बाद नदियों में खनन शुरू हो तो उन्हें अच्छी मिट्टी मिल सकती है। जिससे उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ने अनुमति भी दे दी है। खनन विभाग खनन के लिए ऑक्शन करनी है जोकि अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। अधिकारियों की बैठक पर बैठक चल रही हैं कि किसी तरह से इस समस्या का समाधान हो जाए।
अंबाला में 38 किलोमीटर लंबी है यह परियोजना
अंबाला से शामली एक्सप्रेस हाईवे कैथल रोड से शुरू होगा और उत्तर प्रदेश शामली तक जाएगा। अंबाला में यह एक्सप्रेस हाईवे 38 किलोमीटर लंबा होगा और इस परियोजना पर करीब 1500 करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा। इस परियोजना को नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वर्जन
मिट्टी की जरूरत को लेकर प्रदेश सरकार के समक्ष बात रखी है। बाढ़ के बाद नदियों से अच्छी मिट्टी मिल सकती है। इसके समाधान का आश्वासन दिया गया है।
-आशिम बंसल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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अंबाला सिटी। अंबाला से शामली तक जाने वाले 120 किलोमीटर के राजमार्ग पर प्रधानमंत्री कार्यालय से निगरानी रखी जा रही है। इस परियोजना का पीएम नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया था। ऐसे में परियोजना से संबंधित अधिकारियों को भी समीक्षा के लिए पीएमओ के अधिकारियों को भी स्टेटस बताना होता है। मगर इस परियोजना के लिए मिट्टी की किल्लत मुसीबत बन गई है।
अंबाला-शामली राजमार्ग सहित अन्य निर्माणाधीन परियोजनाओं में मिट्टी की किल्लत सामने आ रही है। यही हाल अंबाला-शामली राजमार्ग परियोजना का है। इस राजमार्ग को तीन कंपनियों की ओर से बनाया जा रहा है। अगर पूरी परियोजना में मिट्टी का लागत देखें तो करीब 20 फीसद होगी। मगर मौजूदा समय में हालात यह हैं कि 40 रुपये क्यूबिक मीटर में आने वाली मिट्टी अब दूर स्थान से लानी पड़ रही है। इसकी खोदाई और सफाई का काम करने के बाद 350 रुपये क्यूबिक मीटर तक दाम पहुंच रहे हैं। ऐसे में परियोजना की लागत पर ठेका कंपनियों पर भार बढ़ रहा है। इससे कंपनियाें को नुकसान हो रहा है।
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मिट्टी की कमी देरी का कारण
खास बात है कि परियोजना को बनाने के लिए मिट्टी अत्यंत आवश्यक है। महंगी मिट्टी तो फिर भी खरीदी जा सकती है मगर जब मिट्टी ही पर्याप्त मात्रा में नहीं मिले तो परियोजना में तेजी लाना किसी भी कंपनी के लिए मुश्किल हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो यही कारण है कि परियाेजना पर काम तो चल रहा है मगर मिट्टी की उपलब्धता सीमित होने के कारण काम में उतनी गति नहीं है।
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अंबाला में खनन के भरोसे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को उम्मीद है कि बाढ़ के बाद नदियों में खनन शुरू हो तो उन्हें अच्छी मिट्टी मिल सकती है। जिससे उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ने अनुमति भी दे दी है। खनन विभाग खनन के लिए ऑक्शन करनी है जोकि अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। अधिकारियों की बैठक पर बैठक चल रही हैं कि किसी तरह से इस समस्या का समाधान हो जाए।
अंबाला में 38 किलोमीटर लंबी है यह परियोजना
अंबाला से शामली एक्सप्रेस हाईवे कैथल रोड से शुरू होगा और उत्तर प्रदेश शामली तक जाएगा। अंबाला में यह एक्सप्रेस हाईवे 38 किलोमीटर लंबा होगा और इस परियोजना पर करीब 1500 करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा। इस परियोजना को नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वर्जन
मिट्टी की जरूरत को लेकर प्रदेश सरकार के समक्ष बात रखी है। बाढ़ के बाद नदियों से अच्छी मिट्टी मिल सकती है। इसके समाधान का आश्वासन दिया गया है।
-आशिम बंसल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई