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Ambala News: पांच दिसंबर को अंबाला पहुंचेगी शीश मार्ग यात्रा
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अंबाला सिटी के शीशगंज गुरुद्वारा में श्री गुरु तेग बहादुर जी के शीश के चित्र के आगे रखे अस्त्र-
अंबाला सिटी। श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर दिल्ली से आने वाली शीश मार्ग यात्रा पांच दिसंबर को अंबाला पहुंचेगी। अंबाला पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया जाएगा। जत्थेदार हरपाल सिंह मच्छाैंडा ने बताया कि दिल्ली से जब भाई जैता जी गुरु जी का शीश लेकर चले थे तो बीच रास्ते में कई जगहों पर पड़ाव डाले। जहां-जहां पर भाई जैता जी ने पड़ाव डाला था वहां-वहां पर शीशगंज गुरुद्वारा स्थापित किया है। इस दौरान पहला पड़ाव तरावड़ी में डाला गया था तो वहीं दूसरा पड़ाव अंबाला सिटी में डाला गया था। इसी कारण यहां पर शीशगंज गुरुद्वारा स्थापित किया है।
यात्रा का अंबाला में होता है स्वागत
दिल्ली से चली महान शीश यात्रा प्रत्येक वर्ष अंबाला सिटी स्थित शीशगंज गुरुद्वारा में पहुंचती है। यहां पर संगत की ओर से यात्रा का स्वागत किया जाता है। इसके साथ ही यात्रा में साथ चल रही संगत का भी सम्मान किया जाता है। यहां चार, पांच और छह दिसंबर को हर साल कीर्तन समागम किया जाता है। जिसमें महान जत्थेदार और रागी गुरु की वाणी का गुणगान करते हैं। इस बार भी कार्यक्रम के लिए तैयारियों जारी हैं।
जहां रुकती है यात्रा वहीं से साथ होती है संगत
जत्थेदार हरपाल सिंह पाली बताते हैं कि महान शीश यात्रा के दौरान दिल्ली से चलते हुए तरावड़ी, अंबाला सिटी व अन्य स्थानों पर जहां-जहां यात्रा पड़ाव होता है, वहां की स्थानीय संगत भी यात्रा में शामिल होती है। यह यात्रा पंजाब के आनंदपुर साहिब तक जाती है। जगह-जगह यात्रा का स्वागत सभी शीशगंज गुरुद्वारों में किया जाता है।
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यात्रा का अंबाला में होता है स्वागत
दिल्ली से चली महान शीश यात्रा प्रत्येक वर्ष अंबाला सिटी स्थित शीशगंज गुरुद्वारा में पहुंचती है। यहां पर संगत की ओर से यात्रा का स्वागत किया जाता है। इसके साथ ही यात्रा में साथ चल रही संगत का भी सम्मान किया जाता है। यहां चार, पांच और छह दिसंबर को हर साल कीर्तन समागम किया जाता है। जिसमें महान जत्थेदार और रागी गुरु की वाणी का गुणगान करते हैं। इस बार भी कार्यक्रम के लिए तैयारियों जारी हैं।
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जहां रुकती है यात्रा वहीं से साथ होती है संगत
जत्थेदार हरपाल सिंह पाली बताते हैं कि महान शीश यात्रा के दौरान दिल्ली से चलते हुए तरावड़ी, अंबाला सिटी व अन्य स्थानों पर जहां-जहां यात्रा पड़ाव होता है, वहां की स्थानीय संगत भी यात्रा में शामिल होती है। यह यात्रा पंजाब के आनंदपुर साहिब तक जाती है। जगह-जगह यात्रा का स्वागत सभी शीशगंज गुरुद्वारों में किया जाता है।
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