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अतीत की पुरानी यादों को किया साझा
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छावनी के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में रविवार को सिल्वर जुबली एलुमनाई मीट का आयोजन किया गया। इस मौके पर बीते 25 सालों में कॉलेज में पढ़े करीब दो सौ छात्रों व सेवानिवृत्त स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने अपने अतीत की सुनहरी यादों को एक दूसरे से साझा किया। समारोह का शुभारंभ कॉलेज प्राचार्य प्रो. अरुण जोशी ने सेवानिवृत्त प्रो वीपी सिंह, डॉ. प्रकाश ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
प्राचार्य जोशी ने कहा कि आप सबके योगदान व उपलब्धियों के कारण ही आज यह कॉलेज इस मुकाम पर पहुंचा है। कॉलेज के संस्थापक स्टाफ का हिस्सा रहे पूर्व प्राचार्य डॉ. गुरदेव सिंह ने कॉलेज की स्थापना के समय पैदा चुनौतियों व उनसे लड़ते हुए कॉलेज को विकास की राह पर बढ़ाने के अपने अनुभव शेयर किए। इसी प्रकार पूर्व प्राचार्य डॉ. संगीता चौधरी ने भी अपने कार्यकाल के अनुभव पूर्व छात्रों व स्टाफ सदस्यों से शेयर किए। कॉलेज के सबसे पहले बैच के छात्र व वर्तमान में एकाउंट मैनेजर के पद पर कार्यरत धर्मवीर तथा पीजीटी रामकरण ने भी अपने अनुभव सुनाए। कार्यक्रम के अंत मे सभी पूर्व छात्रों व स्टाफ सदस्यों को गुलाब का फूल व स्मृति चिह्न भेंट किये। सिल्वर जुबली समारोह की कन्वीनर प्रो. अलका चौधरी व एलुमनाई एसोसिएशन के कन्वीनर डॉ. रविप्रकाश ने इस सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में बिलिवर बैंड के सदस्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सबक दिल मोह लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन प्रो. पूनम राजौरा ने किया।
कॉलेज में वापस आने पर उस समय की यादें ताजा हो गई, जब हम कुछ स्टाफ सदस्यों ने मिलकर कॉलेज को शुरू किया था। उस समय की सरकारी कॉलेज की बहुत बड़ी मांग थी, जब यह कॉलेज स्थापित हुआ उस समय कुछ ही स्टाफ सदस्य आए थे और सभी ने पूरा प्रयास करते हुए इस कॉलेज को खड़ा करने का काम किया है और आज कॉलेज की प्रगति देखते हुए बहुत ही खुशी महसूस हो रही है।
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- गुरदेव सिंह, पूर्व प्राचार्य
जब यहां पर प्राचार्य बनकर आई थी, उस समय मुझे बहुत कुछ सीखने के लिए मिला था कि आखिर खुद का राजा कैसे बनना है। यहां पर जो कुछ भी सीखा वह आज मेरे जीवन में बहुत अच्छे तरीके से काम आ रहा है। कॉलेज आज उस मुकाम पर पहुंच चुका है कि बच्चों की कॉलेज में दाखिला लेने के लिए लाईनें लगी होती है।
- संगीता चौधरी, पूर्व प्राचार्य।
इस कॉलेज से 2009 में एम हिस्ट्री से पास आऊट हैं, जो पल कॉलेज में बिताए थे उन लम्हों को आज भी याद करें तो बहुत खुशी होती है। आज कॉलेज में आए तो वह लम्हें ताजा हो गए, आज चाहें हम किसी भी मुकाम पर पहुंच गए मगर वह लम्हें भुलाए नहीं जा सकते हैं।
- ममता, पूर्व छात्र।
2009 में कॉलेज से बाहर आए थे, आज राजकीय कॉलेज पुलिस लाइन में शिक्षक के पद पर तैनात हूं, परंतु कॉलेज के दिन भुलाए नहीं जा सकते हैं, आज जब कॉलेज वापस आए हैं तो वही लम्हें एक बार फिर ताजा हो गए हैं।
- डॉ. निशा रानी, पूर्व छात्र।
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प्राचार्य जोशी ने कहा कि आप सबके योगदान व उपलब्धियों के कारण ही आज यह कॉलेज इस मुकाम पर पहुंचा है। कॉलेज के संस्थापक स्टाफ का हिस्सा रहे पूर्व प्राचार्य डॉ. गुरदेव सिंह ने कॉलेज की स्थापना के समय पैदा चुनौतियों व उनसे लड़ते हुए कॉलेज को विकास की राह पर बढ़ाने के अपने अनुभव शेयर किए। इसी प्रकार पूर्व प्राचार्य डॉ. संगीता चौधरी ने भी अपने कार्यकाल के अनुभव पूर्व छात्रों व स्टाफ सदस्यों से शेयर किए। कॉलेज के सबसे पहले बैच के छात्र व वर्तमान में एकाउंट मैनेजर के पद पर कार्यरत धर्मवीर तथा पीजीटी रामकरण ने भी अपने अनुभव सुनाए। कार्यक्रम के अंत मे सभी पूर्व छात्रों व स्टाफ सदस्यों को गुलाब का फूल व स्मृति चिह्न भेंट किये। सिल्वर जुबली समारोह की कन्वीनर प्रो. अलका चौधरी व एलुमनाई एसोसिएशन के कन्वीनर डॉ. रविप्रकाश ने इस सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में बिलिवर बैंड के सदस्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सबक दिल मोह लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन प्रो. पूनम राजौरा ने किया।
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कॉलेज में वापस आने पर उस समय की यादें ताजा हो गई, जब हम कुछ स्टाफ सदस्यों ने मिलकर कॉलेज को शुरू किया था। उस समय की सरकारी कॉलेज की बहुत बड़ी मांग थी, जब यह कॉलेज स्थापित हुआ उस समय कुछ ही स्टाफ सदस्य आए थे और सभी ने पूरा प्रयास करते हुए इस कॉलेज को खड़ा करने का काम किया है और आज कॉलेज की प्रगति देखते हुए बहुत ही खुशी महसूस हो रही है।
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- गुरदेव सिंह, पूर्व प्राचार्य
जब यहां पर प्राचार्य बनकर आई थी, उस समय मुझे बहुत कुछ सीखने के लिए मिला था कि आखिर खुद का राजा कैसे बनना है। यहां पर जो कुछ भी सीखा वह आज मेरे जीवन में बहुत अच्छे तरीके से काम आ रहा है। कॉलेज आज उस मुकाम पर पहुंच चुका है कि बच्चों की कॉलेज में दाखिला लेने के लिए लाईनें लगी होती है।
- संगीता चौधरी, पूर्व प्राचार्य।
इस कॉलेज से 2009 में एम हिस्ट्री से पास आऊट हैं, जो पल कॉलेज में बिताए थे उन लम्हों को आज भी याद करें तो बहुत खुशी होती है। आज कॉलेज में आए तो वह लम्हें ताजा हो गए, आज चाहें हम किसी भी मुकाम पर पहुंच गए मगर वह लम्हें भुलाए नहीं जा सकते हैं।
- ममता, पूर्व छात्र।
2009 में कॉलेज से बाहर आए थे, आज राजकीय कॉलेज पुलिस लाइन में शिक्षक के पद पर तैनात हूं, परंतु कॉलेज के दिन भुलाए नहीं जा सकते हैं, आज जब कॉलेज वापस आए हैं तो वही लम्हें एक बार फिर ताजा हो गए हैं।
- डॉ. निशा रानी, पूर्व छात्र।